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लड़कियों के फिगर पर टिपण्णी करना आखिर क्यों एक गलत बात है?

Monica-Bellucci

मैं एक आदमी हूँ!

मुझे लड़कियों को देखना पसंद है.

मुझे लड़कियों के उभारों को देखना और घूरना भी पसंद है.

रस्ते पर चलते-चलते अगर किसी लड़की ने या किसी औरत ने छोटे कपडे पहने हों तो मैं उस लड़की को या औरत को ज़रूर घूरता हूँ, हाँ! लेकिन लोगों की नज़रों से बचा कर! अगर पकड़ा गया तो लोग छोड़ेंगे नहीं और कहीं मेरी हालत नागालैंड के उस आदमी की तरह न कर दें जिसके ऊपर बलात्कार का आरोप लगा था.

जी हाँ, मैं एक आदमी हूँ!

मुझे PORNOGRAPHY देखना बहुत पसंद है.

मुझे पता है कि मैं भी किसीका बेटा हूँ, किसीका भाई हूँ, किसीका पिता हूँ और इसलिए मुझे ये बात बार-बार याद दिलाने की कोई ज़रूरत नहीं है. मुझे पता है कि कई इंसाफ के देवता आयेंगे और मुझ पर मौलिक सच्चाई थूंकना शुरू कर देंगे. अपनी लेक्चरबाज़ी से मेरे कानों से खून निकाल देंगे.

लेकिन मैं कभी-कभी सोचता हूँ कि क्या उन्हें वैश्यावृत्ति के बारे में कैसे कुछ पता नहीं?!

अगर किसी आदमी को लगता है कि किसी खूबसूरत औरत को या खूबसूरत लड़की को देखना या लड़कियों के फिगर पर टिपण्णी करना अच्छी बात नहीं है तो मेरे ख्याल से वह मर्द ही नहीं है.

और मुझे एक बात बताइये, दुनिया की आधे से ज्यादा आबादी पोर्न फिल्में देखती है. सही की गलत?

जिनको नहीं पता पोर्न फिल्में क्या होती हैं उन्हें मैं बताए देता हूँ, पोर्न फिल्में वे फिल्में होती हैं जिनमें एक लड़का या कई लड़के मिलके एक लड़की या कई लड़कियों का बलात्कार करते हैं. मैं बलात्कार इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि अगर आप उन फिल्मों पर गौर दें तो ये शब्द बार-बार आपके दिमाग से किसी बड़े लोहे के हथौड़े की तरह बार-बार भिड़ता रहेगा. रही बात वैश्यावृत्ति की, वैश्यावृत्ति की शिकार, फिर से, मैं शिकार इसलिए कह रहा हूँ आप सभी इंसाफ के देवता मुझे किसी और शब्द का इस्तेमाल करने ही नहीं देंगे, हाँ! वैश्यावृत्ति की शिकार औरतें, मुझे नहीं लगता अपनी मर्ज़ी से इस धंधे में घुसती हैं. वे मजबूर होती हैं!

कल को दिल्ली, या मुंबई या किसी अन्य बड़े शहर में अगर किसी लड़की का बलात्कार हो गया और लोगों को इस बात का पता चल गया तो न जाने कितने लोग सडको पर चले आयेंगे और फिर से मोमबत्तियां बर्बाद करने लग जाएंगे. मैं कहता हूँ इन मोमबत्तियों को उन गावों में दे आओ जहां के लोगों को ये मोमबत्तियां तक नसीब नहीं होतीं, बिजली की बात तो दूर है. मुझे समझ नहीं आता कि वे लोग वैश्यावृत्ति में फँसी उन औरतों को कैसे भूल जाते हैं जिनपर रोज़ इसी तरह के बलात्कार होते हैं. जो औरतें, औरतों की आज़ादी के लिए अपना गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाती हैं, भला उन्हें वैश्यावृत्ति में फँसी इन औरतों की मदद की गूँज कैसे नहीं सुनाई देती? मेरा सवाल पूरी की पूरी औरत नस्ल से है!

और वे लोग जिन्होंने इंसाफ का ठेका ले रखा है, इन वेश्याओं के पास क्यों जाते हैं?

कुछ सालों पहले किसी नेता को असेंबली में पोर्न फिल्म देखते हुए एक CCTV कैमरा ने कैद कर लिया. अब उस नेता पर कई सवाल उठे पर उस पोर्न क्लिप में दिख रही उस महिला पर किसीने कुछ नहीं कहा!

लडकियां चाहती हैं कि कोई मर्द उन्हें घूरे ना लेकिन फिर वैश्यावृत्ति में फँसी औरतें और पोर्न फिल्मों में दिखने वाली महिलाएं आखिर क्यों जान-बूझकर अपना शरीर बेचना चाहती हैं? और women activists आखिर क्यों इन चीज़ों पर रोक नहीं लगाते! एक तरह से औरतें अपना बदन दिखाना भी चाहती हैं और ये भी चाहती हैं कि हम उनके बदन की तरफ ना देखें!

हर एक पुरुष एक संभावित बलात्कारी होता है- नंदिता दास

तो औरतों ध्यान से सोना, कहीं आपके पिता या आपका भाई आपका बलात्कार ना कर दे!

मैं बस यही चाहता हूँ कि ये समाज अपनी हिपोक्रिसी यानी अपना पाखण्ड छोड़कर जो बात सही है उसी की बात करे! अपने फायदे के लिए सोचना तो बहुत आसान है लेकिन दूसरों का अच्छा सोचना बहुत मुश्किल!

मेरी यही आशा है कि लोग सत्य की राह पर चलें और जो लोग पाखण्ड का चादर ओढ़कर सोये हैं, कृपा करके उसे उतार फेंके, आखिर तभी तो सुबह होगी!

क्यों?

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