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मोदी को बिहार में मुँह की क्यों खानी पड़ी? एक रिपोर्टर की डायरी से जानिये सच!

बिहार ने मोदी सरकार को एक करारा चांटा मारा है जिसकी गूँज आने वाले लम्बे समय तक रहेगी और इसका असर पूरे देश की राजनीती पर पड़ेगा!

पर ऐसा हुआ क्यों? अभी कुछ ही समय पहले तक नरेंद्र मोदी देश के लाडले थे और अब कुछ ही दिनों में ऐसा लग रहा है कि उनकी साख काम हो गयी है, उनका असर धुंधलाने लगा है!

आईये देखें कि कहाँ चूक गए – मोदी को बिहार में मुँह की क्यों खानी पड़ी और क्यों वोटरों ने उन्हें धुल चटा दी:

1) सबसे पहला कारण रहा खाने की चीज़ों के दाम! भले ही नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी रैलियों में बताया कि दुनिया में भारत का नाम कितना चमक रहा है उनकी वजह से, वो ये भूल गये कि तूर की दाल अगर आम आदमी की पहुँच से बाहर हो गयी तो उसे आपके अपने मुँह मियां मिट्ठू बनने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता! पहले सस्ते में पेट भरो, फ़िर तारीफ़ें करो!

2) समाज कल्याण की तरफ़ से ध्यान हटा दिया मोदी सरकार ने! चाहे वो इंदिरा आवास योजना हो, खाने की सब्सिडी हो, किसानों के लिए मिनिमम प्राइस सपोर्ट हो या ग्रामिक रोज़गार गारंटी प्रोग्राम हो, इन सभी के बजट गिरा के मोदी सरकार ने उन वोटरों को अपने से दूर कर दिया जिन्हें इनसे काफी मात्रा में लाभ पहुँच रहा था!

3) भाजपा के अमित शाह ने कहा था कि कांग्रेस की सरकार उलटी चक्की चलाती रही, पहले अधिकार दे दिए और फ़िर बात हुई कि आप कैसे उन अधिकारों का इस्तेमाल कर पाएँगे लेकिन हमारी सरकार पहले आपको अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने का तरीका बताएगी, उसके लायक बनाएगी और फ़िर अधिकार देगी! बस यहीं फँस गए वो!

4) करीब 1.5 साल सत्ता में रहने के बाद भी वोटर मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि नहीं बता पा रहे सिवाए इसके कि उनके विदेशी दौरे बहुत मशहूर हैं! जितनी उम्मीदें श्री मोदी से बाँधी थीं, वो सब टूटने लगी हैं क्योंकि वादे सिर्फ़ हवा में हैं, हक़ीक़त में बदलाव अभी तक नज़र नहीं आ रहा!

5) इसके बाद जिस बात ने सबसे बड़ा धक्का पहुँचाया है वो ये कि 2014 के लोक सभा चुनावों में श्री मोदी ने कहा था कि हर भारतीय के अकाउंट में 15 लाख रुपये आएँगे, काला-धन वापसी से! और फिर अमित शाह ने कहा ये तो चुनावी जुमले थे! वोटर बेवकूफ़ नहीं हैं, ये बात अब शायद श्री मोदी और श्री शाह को समझ आ गयी होगी!

भाजपा कितना भी कहे इन चुनावों से श्री मोदी की सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा पर सच्चाई इस से परे है! अगर असर नहीं पड़ता तो मोदी साहब चुनावों में इतनी गहराई से नहीं उतरते!

अब उम्मीद यही है कि वो अपनी ग़लतियों से सीखें और वापस देश को विकास की राह पर ले जाएँ! वरना 2019 अन्धकार से भरा दिख रहा है!