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जब देश के मंदिरों को मुग़ल तोड़ रहे थे, तब सारे हिंदू कहाँ थे?

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1992 का साल, बाबरी मस्जिद इलाहाबाद के लोगों द्वारा तोड़ा जा रहा था.

कोई सलिए से मस्जिद की दीवारें तोड़ने में लगा था तो कोई लकड़ी के डंडों से! कोई पत्थर मारकर तो कईयों को यह लग रहा था कि उनकी आवाज़ ही इस मस्जिद को गिराने के लिए काफी है. एक बड़ा दंगा पैदा हुआ, इस बड़े दंगे से छोटे-छोटे दंगे इजाद हुए!

यह सब क्यों हुआ?

क्योंकि हिन्दुओं को अचानक इतने सालों बाद इस बात का बोध हुआ कि वह रामजन्म भूमि है और यहाँ किसी मस्जिद का रहना ठीक नहीं!

मेरा सवाल एक बेहद ही न्यायसिद्ध सवाल है, बहुत लोग मेरे इस सवाल को हिंदू मान्यताओं का अपमान मानेंगे और ये भी हो सकता है कि बहुत लोग मेरे सवाल को आज के सिस्टम के केंद्र पर चलाया गया एक सटीक तीर भी माने!

मेरा सवाल है यह!

जब रामजन्म भूमि पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया जा रहा था, तब देश भर के हिंदू कहाँ थे?

तब के समय किसीने इसके खिलाफ आवाज़ क्यों नहीं उठाई?

देखिये! इसमें कोई शक नहीं कि जो कुछ भी मुग़लों ने भारत और हिन्दुओं के साथ किया, वह बिलकुल ग़लत था, लेकिन इस बात को 600 सालों बाद उछालना और इस बात पर लड़ मरना कहाँ की समझदारी है? ये तो सरासर बेअक्ली है!

जितने भी मुग़ल सम्राटों ने भारत पर राज किया, सभी के सभी कमअक्ल थे!

आप ही बताइये, भला कोई क्यों किसी और की सभ्यता, धर्म, मान्यता की बेईज्ज़ती इस तरह से करता है?

मतलब आप एक मुस्लिम राजा हो तो आपको हिंदू मंदिरों को गिराने का पूरा हक है?

हिन्दुओं के तौर तरीकों की बेईज्ज़ती करने का पूरा हक है?

दुनिया के सबसे पुराने धर्म, सनातन धर्म की बेइज्ज़ती करने का पूरा हक़ है?

मेरे ख्याल से जो कुछ भी अयोध्या में हुआ, सही हुआ! लेकिन 600 सालों बाद सभी हिन्दुओं के भीतर का हिंदुत्व जागा, ये गलत हुआ! मेरे कहने का मतलब है जब बाबरी मस्ज्दी का निर्माण रामजन्मभूमि पर हो रहा था, तब किसी सनातनी लीडर या किसी निडर सनातनी ने क्यों कुछ नहीं किया?

भई ये तो हम सनातनियों का देश था, वे यानी मुग़ल दूसरे देश से आये थे, तो फिर भी हम उनपर भारी क्यों नहीं पड़े! इसमें कोई शक़ नहीं कि हमारी संख्या उनसे ज़्यादा थी, तब फिर भी हम उनके अत्याचार क्यों सहते रहे? और फिर 1992 में हम में बड़ी दिलेरी आ गई! जब बाबरी मस्जिद बन रहा था, तब क्या देश के हर एक हिंदू ने हाथों में चूड़ियाँ पहन रखी थीं?

ये सब चीज़ें पता नहीं कोई क्यों नहीं सोचता और अगर सोचने लग जाए तो जो धर्म हज़ारों सालों से चला आ रहा है वह और कई हज़ारों सालों तक ऐसे ही मुसलसल चलता रहेगा!

मुझे आशा है कि आप लोग मेरी बात समझ गए होंगे! मैं किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं हूँ, जो काम 600 साल पहले मुस्लिम मुग़लों ने किया, वही काम 1992 में हिन्दुओं ने किया. दोनों की सोचों में कोई फर्क नहीं है.

पढने के लिए धन्यवाद. नीचे कमेंट करके आप हमसे अपनी राय भी शेयर कर सकते है!

जय हिंद!