इतिहास

कैसे और कब हुई थी किन्नरों की उत्पत्ति ?

किन्नरों की उत्पत्ति – जिस तरह स्त्री और पुरुष एक समाज में रहते हैं, उसी तरह इस दुनिया में किन्नरों का भी एक समाज है.

मनुष्य जाति की तरह ही किन्नरों मे भी दो प्रकार होते हैं.

एक किन्न पुरुष और दूसरी किन्नरी. इसे भी किन्न पुरुष ही कहा जाता है. मनुष्य जाति में हम सब जानते हैं कि स्त्री और पुरुष होते हैं. उनके जन्म की बात को भी हम जानते हैं कि कैसे होती है.

लेकिन किन्नरों की उत्पत्ति कब और कैसे हुई इसे हम में से बहुत ही कम लोग जानते हैं.

तो चलिए आज हम चर्चा करते हैं किन्नर समाज के इतिहास की. कि कैसे हुई किन्नरों की उत्पत्ति ?

बहुत पहले प्रजापति के यहां एक इल नाम का पुत्र था. बड़ा होकर यही इल बड़ा ही धर्मात्मा राजा बना. कहते हैं राजा इल को शिकार खेलने का बड़ा शौक था. इसी शौक के कारण राजा इल अपने कुछ सैनिकों के साथ शिकार करने एक वन को गए. जंगल में राजा ने कई जानवरों का शिकार किया. लेकिन इसके बाद भी उनका मन नहीं भरा. वो और शिकार करना चाहते थे. इसी चाहत में वो जंगल में आगे बढ़ते चले गए. और उस पर्वत पर पहुंच गए, जहां भगवान शिव माता पार्वती के साथ विहाग कर रहे थे. कहते हैं भगवान शिव ने माता पार्वती को खुश करने के लिए खुद को स्त्री बना लिया था. जिस समय भगवान शिव ने स्त्री रूप धारण किया था, उस समय जंगल में जितने जीव – जंतू, पेड़ – पौधे थे सब स्त्री बन गए. चुकी राजा इल भी उसी जंगल में मौजूद थे, सो राजा इल भी स्त्री बन गए और उनके साथ आये सारे सैनिक भी स्त्री बन गए.

राजा इल अपने आप को स्त्री रूप में देख बहुत दुखी हुए.

उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ऐसा कैसे हो गया. लेकिन जैसे ही उन्हें यह पता चला कि भगवान शिव के कारण वो सब स्त्री बन गए. तब राजा इल और ज्यादा चिंतित और डर गए. अपने इसी डर के कारण राजा इल भगवान शिव के चरणों में पहुंच गए. जहां उन्होंने भगवान शिव से अपने आप को पुरुष में परिवर्तित करने की अपील की. लेकिन भगवान शिव ने राजा इल से कहा कि तुम पुरुषत्व को छोड़कर कोई और वरदान मांग लो मैं दे दूंगा.

लेकिन इल ने दूसरा वरदान मांगने से मना कर दिया और वहां से चले गए.

वहां से जाने के बाद राजा हिल माता पार्वती को प्रसन्न करने में लग गए. राजा इल से माता पार्वती ने प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहा.

तब राजा ने अपनी सारी कहानी बता कर अपना पुरुषत्व वापस लौटाने का वरदान माता पार्वती से मांगा. लेकिन माता पार्वती ने राजा से कहा कि तुम जिस पुरुषत्व का वरदान चाहते हो उसके आधे हिस्से के दाता तो खुद महादेव हैं. मैं तो सिर्फ आधा भाग ही दे सकती हूं. यानि तुम अपना आधा जीवन स्त्री रूप में और आधा जीवन पुरुष के रूप में व्यतीत कर सकते हो. अतः तुम कब स्त्री रूप में और कब पुरुष रूप में रहना चाहते हो यह सोच कर मुझे बता दो.

तब राजा ने काफी सोच कर माता पार्वती से कहा कि “हे मां मैं एक महीने स्त्री के रूप में, और एक महीने पुरुष के रुप में रहना चाहता हूं”

इस पर माता पार्वती ने तथास्तु कहते हुए राजा इल से ये भी कहा की जब तुम पुरुष के रुप में रहोगे, तो तुम्हें अपना स्त्री रूप नहीं याद रहेगा, और जब तुम अपने स्त्री रुप में रहोगे तो तुम्हें अपने पुरुष रुप का कुछ याद नहीं रहेगा.

इस तरह राजा इल माता पार्वती से एक महीने पुरुष इल और एक महीने स्त्री इला के रूप में रहने का वरदान प्राप्त कर लिए. परंतु राजा के सारे सैनिक स्त्री रूप में ही रह गए.

कहते हैं वो सारे सैनिक एक दिन स्त्री इला के साथ वन में घूमते – घूमते चंद्रमा के पुत्र महात्मा बुद्ध के आश्रम में पहुंच गए. तब चंद्रमा के पुत्र महात्मा बुद्ध ने इन स्त्री रूपी सैनिकों से कहा कि तुम सब किन्न पुरुषी इसी पर्वत पर अपना निवास स्थान बना लो. आगे चलकर तुम सब किन्न पुरुष पतियों को प्राप्त करोगे.

इस तरह से हुई किन्नरों की उत्पत्ति – किन्नरों के बारे में सारी जानकारी विस्तृत रुप से वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड में स्पष्ट रुप से लिखा हुआ है.

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