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बंगाल के इस बुनकर ने साङी में बुन डाली रामायण और लंदन यूनिवर्सिटी ने दी डाक्टरेट की उपाधि !

साङी में बुन डाली रामायण

साङी में बुन डाली रामायण – भारतीय संस्कृति की छाप पूरे विश्व में है इसकी एक बङी वजह है भारतीयों के अपनी संस्कृति और सभ्यता के प्रति गहरा लगाव है ।

इस बात का आंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गांव के बुनकर ने साङी में बुन डाली रामायण – हमारी देश की पौराणिक कथा रामायण को ही साङी पर बुन डाला ।

साङी में बुन डाली रामायण – 

20 साल पहले 6.5 गज की साङी पर उकेरी रामायण

पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के रहने वाले बिरेन कुमार बसाक ने 20 साल पहले रामायण के तीन खंडो को साङी पर उकेरे  था ।  उनके ऐस कारनामे को सिर्फ देश ने ही दुनिया भी सहारा । और उसी का परिणाम है कि बिरेन कुमार बसाक को हाल ही में इस अद्भुत कला के लिए ब्रिटेन की वर्ल्ड रिकॉर्ड  यूनिर्वसिटी ने डाक्टरेट की उपाधि दी है। बिरेन कुमार बसाक को ये सम्मान दिल्ली में आयोजित  समारोह के दौरान दिया गया । बिरेन कुमार बसाक ने सन 1996 में रामायण को साङी पर उकेरना शुरू किया था। जिसे पूरा होने में कम से कम ढाई साल लगे। बिरेन कुमार बसाक के अनुसार उन्हें इस अद्भुत साङी को बुने के लिए  लगने वाली तैयारी में ही एक साल का वक्त लग गया था।

साङी में बुन डाली रामायण

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ले जा चुके है कई वैश्विक समारोह में प्रदर्शन के लिए

आज तक किसी भी साङी में कहानी को नही उकेरा गया जिसे विश्व की पहली ऐसी साङी जिस पर किसी कहानी को उकेरा गया वो भी इतने मुशिकल खण्डो को । जो वाकई में तारीफ के काबिल है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब भी किसी वैश्विक ट्रिप पर जाती है प्रदर्शन के लिए इस साङी को लेकर जाती है। बिरेन कुमार बसाक ने कहा कि ” पिछले साल जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब इग्लैंड गई थी तो दूसरी साङियो के साथ इस साङी को भी प्रदर्शन के लिए साथ लेकर गई थी।  आपको बता दें ये साङी 6.5 गज की है जिस पर मूगा और तसर सिल्क से रामायण को जमादनी स्टाइल में उकेरा गया है ।

पहले भी हो चुकी है ऑवार्डो की भरमार

इस कलाकृति के लिए  बिरन कुमार बसाक को पहले भी कई ऑवार्डो से नवाजा जा चुका है । बिरेन कुमार बसाक को इस साङी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार , संत कबीर ऑवार्ड और मेरिट सेटिफिकेट ऑवार्ड मिल चुके है इसके आलावा बसाक का नाम अपनी इस कला के लिए  इंडियन बुक ऑफ रिकाॅर्ड  , लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड और वर्ल्ड यूनिक रिकार्डस में दर्ज किया गया है।

मुंबई की एक कंपनी 8 लाख में खरीदना चाहा था ।

इसके अलावा मुबंई की एक मशहूर कंपनी ने सन 2004 में  बिरन कुमार बसाक को उनकी इस अद्भुत साङी के लिए आठ लाख की धन राशि ऑफर की थी । जिसे बिरने बराक ने ठुकरा दिया । क्योंकि शायद बिरेन भी जानते हैं कि उनकी इस कला का मोल नही लगाया जा सकता ।

साङी में बुन डाली रामायण

ब्रिटेन की वर्ल्ड फेमस यूनिवर्सटी ने दी डाक्टरेट की उपाधि

बिरेन कुमार बसाक का जन्म पश्चिम बंगाल के कृष्मानगर गांव में हुआ था। उनकी भगवान और संस्कृति के प्रति आस्था का ही नतीजा है कि एक आम बुनकर होने के बावजूद उन्होंने इतनी बङी कला को रच डाला । बिरेन बसाक का एक बेटा है जिसके अनुसार “उनके पिता ने जिस बेहतरीन कला को साङी पर उकेरा अब उसे काफी लंबा हो गया है जिस वजह से इस साङी की चमक हल्की हल्की खोने लगी है । वही बसाक को डाक्टेरेट की उपाधि देने वाली यूनिर्सवटी का कहना है कि वो बसाक की कला से बहुत प्रभावित है  उन्होंने ढाय साल के अंदर 6.5 गज की साङी पर सिल्क के दागो से रामायण के खण्डो को उकेर कर अदुभुत मिसाल कायम की है।

साङी में बुन डाली रामायण – वैसे आपको बता दें बसाक अब रवीन्द्र नाथ टैगोर की जीवनी को साङी में उकेरने की तैयारी कर रहे है । और हो सकता ये साङी पहली साङी के रिकॉर्ड तोङ दे।

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