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एक गुत्थी – क्या शादीशुदा और बालबच्चे वाले थे जीसस?

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इसाईयों के मसीहा जीसस को मानने वाले लोग दुनिया भर में है.

मगर इस मसीहा के बारे में पुख्ता जानकारी है ऐसा दावा करता कोई दिखायी  नहीं देता.

सब जानते है जीसस ने मासूम लोगों की जान बचाने के लिए उन्हें एक अच्छी दुनिया देने के लिए अपने आप को सूली पर लटकाने दिया. इस दर्द में डूबे और जीसस के मौत से अनाथ हुए लोगों के लिए जीसस ने पुन: जन्म लिया.

आम तौर पर इसाई धर्म के लोगों को इतना पता है की जीसस कहा जन्मे, उनका सफ़र कहा से हुआ और लोगों के कल्याण के लिए कैसे उन्होंने अपने प्राणों की आहुती दी. महज कुछ सालों की जानकारी से भरा एक बाईबल को इसाई लोग नियमित पढ़ते है. किंतु अपने धर्म गुरु के बारे में अधिक जानने की कभी कोशिश नहीं करते है.

मन में क्या सवाल पैदा होते है?

  1. क्या हाल में प्राप्त हुई हस्तलिपियां इशु के बारे में सत्य बताती हैं?
  2. क्या यीशु के देवत्व की गणना कॉन्सटेंटाइन और गिरजा द्वारा किया गया था?
  3. क्या यीशु ने मैरी मग्दलीनि से गुप्त रूप से विवाह किया था?
  4. क्या यीशु के वास्तविक रिकॉर्ड नष्ट कर दिए गए?

हाल ही में उजागर हुआ कि जीसस शादी शुदा थे

भूगर्भशास्त्री डॉक्टर ए शिमरॉन का दावा है कि येरुशलम में जीजस और उनके बेटे की कब्र है.

उन्होंने इसकी प्रमाणिकता को भी पुख्ता किया है. शिमरॉन का कहना है कि गॉड के बेटे’ को नौ अन्य लोगों के साथ दफनाया गया था जीसस के बेटे जुदा और पत्नी मैरी शामिल हैं. 150 कैमिकल टेस्ट के बाद शिमरॉन ने जीसस फैमिली टॉम्ब’ का कनेक्शन भी खोज लिया है. जहा चॉक बॉक्स पर मिले अभिलेखों में ‘जेम्स, जोसेफ का बेटा, जीसस का भाई’ आदि का उल्लेख मिला है. चॉक बॉक्स में लिखित नाम भी एक परिवार से ही संबंधित हैं और इन्हीं संबंधों और जांच के आधारों पर शिमरॉन का दावा है कि जीजस एक बच्चे के पिता भी थे और शादीशुदा थे.

जीसस शादी शुदा है

२००६ में लेखक डैन ब्राउन की “दा विंची कोड” फिल्म ने इसाई धर्म के लोगों के पैरो तले जमीन खिसक गयी. बरसो से जीसस के इसाई धर्म को मानने वालों को यह फिल्म बिलकुल पसंद नहीं आई,  क्योंकि इसमें पहली बार बड़े परदे पर जीसस को लेकर कई खुलासे किये गए. यह फिल्म इसाईयों के शत्रुओं की चाल मानी जाती है.

किंतु एक व्यग्यनिक और सत्य को ध्यान देते हुए इस फिल्म को कोई देखेगा तो अचंभित रह जाएगा.

डैन ब्राउन ने यह कहानी लिखने के लिए कई सालों तक संशोधन किया और अपने पर्यवेक्षण को एक उपन्यास के रूप में प्रकाशित किया और उसके बाद इस पर फिल्म बनाई गई. जीसस के वे दस्तावेज जिन्हें आज तक स्थापित धर्म ने दफना दिया था और गुह्य समूहों ने जीवित रखा था. विख्यात चित्रकार लिओनार्दो द विंची ऐसे ही गुह्य समूह का एक सदस्य था इसलिए उसने अपनी पेंटिंग्स में कुछ सूत्र, कुछ इशारे छुपाए हैं जिन्हें अनकोड करने की कोशिश इस फिल्म द्वारा की गई थी.

सबसे बड़ा धक्का यह इस फिल्म में यह था कि बाइबल में जो अंकित है वह जीसस की असली कहानी और वचन नहीं है. फिल्म में एक एक चित्र और दस्तावेज़ को अनकोड करते हुए यह दिखाया गया है की जीसस की शादी मैरी  मग्दलीनि से हुई थी और आखिर में मसीहा जीसस के बच्चे तक पहुच कर कहानी का अतं होता है.

इस फिल्म में काफी हद तक कहानी सच साबित होती है जहा तक वो हर एक प्रश्न को अनकोड करते हुए जवाब खोज निकालते है. लेकिन हकीकत में जब तक इसाई इसे नहीं मानते तब तक यह गुत्थी बनी ही रहेगी.

करीब २००० सालों बाद कुछ तथ्य अगर उजागर हो रहे है तो उसे इसाई धर्म में एक बार देख लेना चाहिए. विज्ञान को जोड़ कर इसका अभ्यास करना चाहिए और सच्चाई को सबके सामने लाना चाहिए.

इसाई लोगों का ये मानना है की जीसस भगवान नहीं एक मानव रूपी मसीहा थे. अगर २ तिहाई लोग इसाई धर्म को केवल एक मसीहा की वजह से मानते है और वो एक इंसान है तो इससे बड़ी बात मानव समाज को क्या होगी.

इसाईयों ने अगर सच्चाई सामने लायी तो जीसस की गरिमा और बढ़ेगी, ना की घटेगी.

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