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आज भी जिन्दा है अश्वत्थामा, लोगों के बयान पढ़कर तो यही लगता है

वीर योद्धा अश्वत्थामा

वीर योद्धा अश्वत्थामा – यदि आपने महाभारत देखी या पढ़ी है तो आप अश्वत्थामा के बारे में जानते ही होंगे।

वीर योद्धा अश्वत्थामा कौरवों के गुरू द्रोणाचार्य के पुत्र थे। द्रोणाचार्य ने कई वर्षों तक भगवान शिव को मनाने के लिए तप किया था। तब जाकर अश्वत्थामा जैसे बहादुर पुत्र का जन्म हुआ था। अश्वत्थामा के माथे पर एक चमत्कारिक मणि भी था, जिसकी वजह से उन्हें भूख, प्यास या थकान नहीं सताती थी। कुरुक्षेत्र के युद्ध में यह महारथी कौरवों की ओर से लड़े थे और कर्ण के बाद अश्वत्थामा ने ही कौरवों की तरफ से सबसे अधिक योद्धाओं का वध किया था।

अश्वत्थामा के बारे में अक्सर ही कहा जाता है कि वो आज भी जिंदा हैं। अश्वत्थामा के कलयुग में भी जीवित होने के पीछे एक कहानी जुड़ी है। यह कहानी उनकी अमरता की नहीं बल्कि भगवान कृष्ण के श्राप की है। इतना ही नहीं कुछ लोग दावा भी कर चुके हैं कि उन्होंने साक्षात अश्वत्थामा को देखा है।

तो क्या वाकई वीर योद्धा अश्वत्थामा जीवित है? कृष्ण के श्राप के बारे में जानकर और लोगों के बयान पढ़ने के बाद तो आपको भी यही लगने लगेगा।

  1. ऐसी है श्राप की कहानी
  • पिता की मौत

वीर योद्धा अश्वत्थामा

पांडवों द्वारा धोखे से पिता द्रोणाचर्य की मृत्यु के बाद अश्वत्थामा क्रोध से भर गए थे। उन्होंने बर्बरता से पांडवों के कई सैनिकों का वध किया। लेकिन फिर भी दुर्योधन व कौरवों की हार ही हुई। दुर्योधन की हार के बाद अश्वत्थामा ने कौरवों के राजा से पांडवों को मारने का वादा किया। वो रात के अँधेरे में पांडवों के तंबुओं में उन्हें मारने गए। पांडव नहीं मिले तो उन्होंने पांडव पुत्रों का वध कर दिया।

  • अर्जुन से सामना

वीर योद्धा अश्वत्थामा

अगली सुबह जब पांडवों को पिछली रात के कांड के बारे में पता चला तो वे गुस्से से भर गए। इसके बाद अश्वत्थामा व अर्जुन का आमना-सामना हुआ। दोनों ने एक-दूसरे पर ब्रह्मास्त्र से वार किया। लेकिन यह विनाशकारी सिद्ध होता इसलिए ऋषियों ने दोनों से अपने अस्त्र वापस लेने की विनती की। अर्जुन अपना अस्त्र वापस ले सकते थे। मगर अश्वत्थामा ऐसा नहीं कर सकते थे, हालांकि वो अस्त्र को किसी एक लक्ष्य पर केंद्रित कर सकते थे। बदले की भावना से ग्रसित अश्वत्थामा ने इस विध्वंसक अस्त्र का निशाना अर्जुन की बहू व अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी के गर्भ पर लगाया। जिससे उसके होने वाले पुत्र की मृत्यु हो गई।

  • कृष्ण ने दिया श्राप

वीर योद्धा अश्वत्थामा

अश्वत्थामा के इस दुस्साहस से क्रोधित होकर कृष्ण ने उन्हें श्राप दिया कि वो 3000 सालों तक कोढ़ से पीड़ित होकर जंगलों में घूमते रहेंगे और कोई उनकी मदद नहीं करेगा। इसके साथ ही अश्वत्थामा के माथे का मणि भी छीन लिया गया था। इसलिए माना जाता है कि अश्वत्थामा आज भी जीवित है।

  1. लोगों के आंखों-देखे किस्से
  • डॉक्टर ने किया इलाज

वीर योद्धा अश्वत्थामा

आमतौर पर डॉक्टर्स इस तरह की बातें नहीं करते हैं। मगर मध्यप्रदेश के एक डॉक्टर का कहना था कि उनके पास एक ऐसा पेशेंट आया था, जिसके माथे पर एक गहरा निशान था और बहुत बार दवाई लगाने के बाद भी उसके शरीर के घाव ताजे बने हुए थे और उनमें से खून आ रहा था। उसके घाव बहुत पुराने और कभी ठीक ना होने वाले लग रहे थे। डॉक्टर ने उससे पूछा भी कि, “क्या तुम अश्वत्थामा हो?” और जब डॉक्टर अगला डोज़ लगाने के लिए मुड़ा तो वो मरीज गायब हो चुका था।

  • योगियों की कहानी

वीर योद्धा अश्वत्थामा

पायलट बाबा समेत कुछ अन्य योगियों का भी दावा है कि वो अश्वत्थामा से मिले हैं। अश्वत्थामा हिमायल की तलहटी में कुछ जनजातियों के साथ रहते हैं। वो हर सुबह एक शिवलिंग पर जल भी चढ़ाते हैं

  • रेस्टॉरेंट मालिक से मुलाकात

वीर योद्धा अश्वत्थामा

कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि माथे के मध्य में निशान वाला एक बहुत लंबा आदमी साल में एक बार हिमालय की तलहटी में बने किसी रेस्टॉरेंट के मालिक से मिलने आता है।

  • नर्मदा पर भटकते अश्वत्थामा

वीर योद्धा अश्वत्थामा

लोगों का तो यह भी दावा है कि नर्मदा के तटों में रात के समय अश्वत्थामा घूमते हैं और लोगों को राह भी दिखाते हैं।

इसके अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, ग्वारीघाट व मंडला के जंगल, असीरगढ़ का किला जैसी कई जगहों पर अश्वत्थामा की मौजूदगी का दावा किया जाता है।

आज तक कोई व्यक्ति वीर योद्धा अश्वत्थामा के जिंदा होने का कोई सबूत तो नहीं दे पाया है। मगर लोगों की बातों को पूरी तरह नाकारा भी नहीं जा सकता। क्या पता अगली बार आपकी अश्वत्थामा से कही मुलाकात हो जाए।