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बेटी होने पर पति ने छोड़ दिया ! लेकिन माँ ने बेटी को बनाया गूगल में IT एक्जीक्यूटिव!

जमाने ने भले हीं कितनी भी तरक्की क्यों न कर ली हो, लेकिन आज भी महिलाओं को बेटियों को बचाने की खातिर समाज में कई तरह की यातनाओं से रु-ब-रु होना पड़ता है.

इसकी जीती-जागती उदाहरण है वेणु मदान. वेणु मदान पेशे से कॉलेज की प्रोफेसर हैं. उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में कई तरह के संघर्षों का सामना किया है.

वेणु मदान की कहानी इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि समाज में अनपढ़ – गरीब लोग हीं बेटियों के खिलाफ नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे एजुकेटेड लोग उनसे कहीं ज्यादा घिनौनी हरकत करने को उतारू होते हैं.

दोस्तों जान कर आपको हैरानी होगी कि वेणु मदान जो की महिला कॉलेज में प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत हैं.

उनके पति पेशे से वकील हैं. और उन्होंने बेटे की चाहत में अपनी पत्नी को दो बेटियों के साथ छोड़ दिया.

दरअसल वेणु मदान की शादी साल 1988 में पंजाब के रहने वाले एक वकील से हुई थी. शादी के बाद उनकी दो बेटियां हुई.

लेकिन वेणु के ससुराल वालों की इच्छा थी कि उन्हें बेटा हो. बेटे की चाहत में वेणु के पति और उनके घरवाले उन्हें काफी प्रताड़ित करते थे. ताने देते थे. वेणु कहती हैं कि उनकी बड़ी बेटी के साथ भी उनके ससुराल वालों का बर्ताव अच्छा नहीं रहता था. लगभग 8 सालों तक ऐसा हीं चलता रहा.

लेकिन वेणु के बर्दाश्त की सीमा शब्द टूट गई जब पति ने बेटे की चाहत में दूसरी शादी करने का फैसला लिया. इतना ही नहीं वेणु के पति ने उन्हें धमकी भी दी कि अगर उनके खिलाफ किसी तरह का कोई केस दर्ज किया तो वो उनके वेतन में से भी आधा हिस्सा ले लेंगे. ऐसे में साल 1996 में वेणु अपने पति की धमकी से डर गई और बिना केस दर्ज किए ही लिखित में एग्रीमेंट करा लिया. इसके बाद वेणु के पति उन्हें छोड़ कर पंजाब चले गए. और वेणु के ऊपर दोनों बेटियों के लालन-पालन की जिम्मेदारी आ गई.

बेटियों को कभी पिता की कमी का एहसास नहीं होने दी.

पति से अलग होने के बाद वेणु ने अपनी दोनों बेटियों की काफी अच्छी परवरिश की. और उन्हें अपने पिता की कमी का एहसास नहीं होने दिया. अपनी बेटियों को अच्छे स्कूलों में शिक्षा दिलाई. आज वेणु की बड़ी बेटी हिमांशी गूगल में आईटी एक्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत है. और उनकी छोटी बेटी भव्या पंजाब यूनिवर्सिटी से अपनी एम. एस. सी. की पढ़ाई पूरी कर चुकी है. इनकी दोनों बेटियों का भी मानना है कि उनकी मां का 22 साल पहले लिया गया फैसला पूरी तरह सही था.

शायद इसलिए कहते हैं कि जो होता है वह अच्छे के लिए ही होता है. तभी तो आज वेणु और उनकी बेटियां सुखी – संपन्न हैं. जो शायद उस परिवार के साथ रहते हुए नहीं हो पाता.

Khushbu Singh

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