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Twitter Trolling – मानसिक प्रताड़ना का नया तरीका ?

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अगर आप ट्विटर के बारे में थोडा भी जानते होंगे तो कह सकते हैं की वहां कई नाम प्रचलित हैं.

मोदी समर्थकों को “भक्त” और आप समर्थकों को “AAPtards” कह कर बुलाया जाता है.

अब इन्हें ये नाम क्यूँ दिया गया?

जब भी ट्विटर पर कोई नरेन्द्र मोदी के खिलाफ लिखता है तो तथाकथित “भक्त” उस व्यक्ति के पीछे पड़ जाते हैं. यही चीज आम आदमी पार्टी के लिए भी लागू होती है. जहाँ किसी ने भी “आप” के या “अरविन्द केजरीवाल” के खिलाफ ट्वीट किया वहीँ तथाकथित “AAPtards” उस व्यक्ति के पीछे पड़ जाते हैं.

हम सिर्फ इन्ही दो पार्टियों की बात इसलिए कर रहे हैं, क्यूंकि सोशल मीडिया को इन्होने एक साधन बनाया जनता तक पहुँचने के लिए. और इन दो पार्टी के लोग ट्विटर या फेसबुक पर सबसे ज्यादा एक्टिव हैं. बहुत आम हो गया है ये देखना की जब भी किसी ने मोदी के खिलाफ या केजरीवाल के खिलाफ ट्वीट किया तो लोग उस व्यक्ति के पीछे हाथ धो कर पड़ जाते हैं.अश्लील भाषा का प्रयोग किया जाता है, गालियाँ दी जाती है, और यहाँ तक की धमकी भी दे दी जाती है.

जहाँ सोशल मीडिया का प्रयोग लोग अपनी बात रखने के लिए करते हैं, वहीँ लगातार अपने लिए अपशब्दों के प्रयोग से लोग परेशान भी हो जाते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार निखिल वाघले ने आज इस  Twitter Trolling को मानसिक प्रताड़ना का नाम दिया. हाल ही में जब भी निखिल वाघले ने ट्वीट किया तब उनको अपशब्द कहे गए.

निखिल वाघले ने एक के बाद एक कई ट्वीट किये

यहाँ हम आपको कुछ ट्वीट उदहारण के तौर पर दिखा रहे हैं की ट्विटर पर ट्रोलिंग कैसे होती है?

ये हमने आपको एक उदहारण दिया. इंडिया टुडे ग्रुप जिस पर आरोप लगते आये हैं की वो “आम आदमी पार्टी” समर्थक है, तो इंडिया टुडे ग्रुप के मालिक अरुण पूरी ने आज अरविन्द केजरीवाल के बारे में ट्वीट किया. और तथाकथित “AAPtards” अपनी
सारी मर्यादा भूलकर अरुण पूरी को गाली देने लगे.
पहले हम आपको अरुण पूरी का ट्वीट दिखाते हैं.

इस ट्वीट के बाद आये तथाकथित “AAPtards” के जवाब

जब यंगिस्तान ने ट्विटर का उपयोग करने वाले युवाओं से इसके बारे में पूछा.

तो युवाओं ने माना कि कई बार अपनी बात जब आप रखते हैं तो उसके बाद आने वाली रिएक्शन बहुत ख़राब होती है.

कई ट्वीट उन पर आ सकने वाले रिएक्शन का सोच कर भी नहीं किया जाता और बहुत बार अपने लिए इस्तेमाल हुई भाषा का प्रयोग देखकर परेशानी होती है.

आज जब हम अभिव्यक्ति के अधिकार के लिए लड़ रहे हैं, उस वक्त अपने अभिव्यक्ति के अधिकार का प्रयोग इस प्रकार किए जाना कितना सही है?

क्या सही में “Twitter Trolling” मानसिक प्रताड़ना का कारण बन रही है?

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