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ये है दुनिया का सबसे ऊंचा शिवालय, जहाँ श्रीराम ने की थी भगवान शिव की तपस्या !

सबसे ऊंचा शिवालय

सबसे ऊंचा शिवालय – वैसे इस दुनिया में देवों के देव महादेव के कई मंदिर स्थित हैं जहां हमेशा उनके भक्तों की भीड़ लगी रहती है. खासकर हिंदुस्तान तो युगो-युगों से देवों की भूमि रही है.

यूं तो आपने महादेव को समर्पित कई प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों के दर्शन किए होंगे लेकिन क्या आपको दुनिया के सबसे ऊंचे शिवालय के दर्शन का सौभाग्य मिला है.

अगर आप अब तक दुनिया के इस सबसे ऊंचे शिवालय की महिमा से अंजान हैं.

तो चलिए आज हम आपको इस बेहद ही खास सबसे ऊंचा शिवालय की गाथा से रूबरू कराते हैं.

सबसे ऊंचा शिवालय –

देवभूमि उत्तराखंड में स्थित है ये शिवालय

दुनिया का सबसे ऊंचा शिवालय देवभूमि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है. इस जिले में तुंगनाथ नामक पहाड़ पर स्थित ये शिवालय तुंगनाथ मंदिर के नाम से मशहूर है.

भगवान शिव को समर्पित तकरीबन 1000 साल पुराना यह तुंगनाथ मंदिर केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर के बीचों-बीच स्थित है. ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित इस भव्य और प्राचीन मंदिर को देखने के लिए हर साल भारी तादात में तीर्थयात्री और पर्यटक यहां आते हैं.

करीब 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस शिवालय को विश्व का सबसे ऊंचा शिवालय माना जाता है. साथ ही यह उत्तराखंड के पंच केदारों में भी गिना जाता है.

सबसे ऊंचे शिवालय से जुड़ी मान्यताएं

इस मंदिर के निर्माण के बारे में ऐसी मान्यता है कि द्वापर युग में महाभारत के युद्ध के दौरान हुए विशाल नरसंहार के बाद भगवान शिव पांडवों से रूष्ट हो गए थे. तब भगवान शिव की प्रसन्न करने के लिए पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण कर उनकी उपासना की थी.

इस मंदिर को लेकर एक और मान्यता जुड़ी हुई है. कहा जाता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने जब रावण का वध किया तब खुद को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त करने के लिये उन्होंने इस स्थान पर आकर भगवान शिव की तपस्या की थी.

भक्तों की हर मनोकामना यहां होती है पूरी

इस सबसे ऊंचे प्राचीन शिवालय का समय-समय पर जीर्णोद्धार किया जा चुका है. इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां आनेवाले ज्यादातर भक्त मन्नतें मांगते हैं और अपनी झोली खुशियों से भरकर जाते हैं.

लेकिन इस ऊंचे शिवालय तक पहुंचना इतना आसान भी नहीं है. तुंगनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर चोपता की ओर बढ़ते हुए रास्ते में बांस के वृक्षों का घना जंगल और मनोहारी दृश्य दिखाई पड़ता है.

चोपता से तुंगनाथ मंदिर की दूरी मात्र तीन किलोमीटर ही रह जाती है. चोपता से तुंगनाथ तक यात्रियों को पैदल ही सफर तय करना होता है. इस दौरान भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिरों के दर्शन भी होते हैं.

आपको बता दें कि हर साल नवंबर और मार्च के बीच के समय में यह मंदिर बर्फबारी के कारण बंद रहता है. लकिन जब आम भक्तों के लिए इस मंदिर के कपाट खुलते हैं तब देश और दुनियाभर से तमाम शिवभक्त महादेव के दरबार में पहुंचते हैं.

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