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ट्रिपल तलाक की पहली लड़ाई लड़ने वाली शाह बानो की अनसुनी कहानियाँ !

शाह बानो

शाह बानो – कई सालों से तीन तलाक का मुद्दा गरमाया हुआ था और हर नेता इस मुद्दे पर सियासी रोटियां सेंकता नजर आता था।

लेकिन 22 अगस्त 2017 को इस मुद्दे पर भारत की सर्वोच्च अदालत ने सबसे बड़ा फैसला सुनाया और तीन तलाक असंवैधानिक बताया । सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मुस्लिम महिलाओं ने दिल खोलकर स्वागत किया और मिठाईयां भी बाटीं। लेकिन क्या आपको पता है कि तीन तलाक पर सबसे पहले किसने चिंगारी भड़काने का काम किया था?

किसने तीन तलाक की बहस को सबसे पहले कोर्ट में ले जाने की हिम्मत जताई थी?

इस मुद्दे पर सबसे पहले कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली कोई और नहीं बल्कि शाह बानो थीं।

आइए आपको बताते हैं शाह बानो की अनसुनी कहानी।

अपने पति के खिलाफ जीत चुकीं हैं केस:

साल 1978 में शाह बानो के पति मोहम्मद खान ने उन्हें तलाक दे दिया था। 5 बच्चों की मां शाह ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और गुजारा भत्ता पाने के लिए कोर्ट में अपील की। मामला पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शाह के पक्ष में फैसला सुनाया और पति से कहा गया कि वो शाह को गुजारा भत्ता दें।

शाह बानो ने नहीं हारी हिम्मत:

माना जाता है कि शाह बानो केस वापस लेने के लिए विदेशों से भी दबाव बनाया जाता था। इस दौरान दुबई से शेखों के फोन आते थे, धर्मगुरुओं ने भी शाह पर काफी दबाव डाला, लेकिन शाह ने हिम्मत नहीं हारी और वो अपने हक की लड़ाई लड़तीं रहीं।

राजीव गांधी ने पलटा शाह बानो के फैसले को:

सुप्रीम कोर्ट के शाह के पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद देशभर में मुस्लिमों में खलबली मच गई और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हरकत में आ गया। बोर्ड ने कोर्ट के फैसले का जोरदार विरोध किया और देशभर में राजनीतिक भूचाल आ गया। मामला राजीव गांधी तक पहुंचा और राजीव गांधी ने महिलाओं को मिलने वाले मुआवजे के खिलाफ एक साल के अंदर ही नया अधिनियम पारित कर दिया और कोर्ट के फैसले को पलट दिया।

एक मशहूर कवि ने क्या खूब लिखा है, ”लहरों में हर एक नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।” ये पंक्तियां शाह बानो पर बिल्कुल फिट बैठती है। भले ही शाह बानो को अपनी जंग जीतने में काफी लंबा सफर तय करना पड़ा हो, भले ही उन्हें एक बार जीतकर भी हारना पड़ा हो। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार कोशिश के बाद उन्हें आखिरकार सफलता मिल ही गई। उनके साथ-साथ देश कई मुस्लिम महिलाओं को भी न्याय मिला।

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