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इन राजाओं की गद्दारी की वजह से हमारा देश लम्बे वक़्त तक गुलाम रहा !

राजाओं की गद्दारी

भारत अनेक वर्षों तक गुलाम रहा.

भारत 1857 की क्रांति के समय ही आज़ाद हो जाता था, अगर  देश के कुछ  गद्दार और देशद्रोही राजाओं ने अंग्रेजों का साथ देकर देश के साथ गद्दारी न की होती.

देश का नमक खाकर देश के साथ गद्दारी करने वाले राजाओं ने अपने निजी स्वार्थ और घटिया राजनीति के लिए देश को गुलाम बने रहने दिया और अंग्रेजो की  मदद करते रहे.

चलिए जानते हैं किन राजाओं की गद्दारी की वजह से हमारा देश लम्बे वक़्त तक गुलाम रहा –

राजाओं की गद्दारी –

मीर जाफर  

मीर जफ़र गद्दारों की  सूची  में प्रथम रहे. मीरजाफर ने देश के साथ गद्दारी करते हुए, अंग्रेजों का साथ दिया और  प्लासी के युद्ध में बंगाल के नवाब  सिराज-उद-दौला को हराकर बंगाल की सत्ता हासिल कर गद्दी सम्हाली. सत्ता के लालच में अंधे होकर मीर जाफर ने अंग्रेजो की गुलामी स्वीकार की और देश को गुलाम बनाए रखने में अंग्रेजो की मदद की.

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जयाजीराव सिंधिया

गद्दारी की सूची में ग्वालियर के राज परिवार का नाम भी शामिल है. ग्वालियर के राजा  जयाजीराव सिंधिया ने 1857 की क्रांति के वक़्त न अपनी सेना को अंग्रेजों के  साथ खड़ा कर दिया और  तात्या टोपे व लक्ष्मीबाई को अग्रेजों के हाथो मरवा दिया. इस गद्दारी और ब्रिटिश हुकूमत के लिए वफादारी के कारण इस गद्दार राजा को अंग्रेजों ने  ‘ नाइट्स ग्रैंड कमान्डर’ का  ख़िताब दिया था.

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जयचंद 

गद्दारी की सूची में दूसरा नाम कन्नौज के राजा जयचंद का लिया जाता है. वैसे तो राजपूतों को उनकी वीरता और देश भक्ति के नाम से जाना जाता है, लेकिन यह राजपूत अपनी गद्दारी के नाम से पहचाना जाता है. जयचंद संयोगिता से विवाह न कर पाने और पृथ्वीराज चौहान से करारी हार से तिलमिला कर मोहम्मद गोरी को देश में आक्रमण करने हेतु बुलाया और  तराइन युद्ध के साथ पृथ्वीराज चौहान को मौत के घाट उतरवाया था.

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राय बहादुर जीवन लाल

भरतपुर रियासत  के राजा राय बहादुर जीवन लाल ने भी देशद्रोही की भूमिका निभाते हुए, अंग्रेजो के लिए अपने दरवाजे खुले रखे. कहा जाता है इस राजा के पिता राजा रघुनाथ बहादुर थे, जो  औरंगज़ेब के मुख्यमंत्री रहे . राय बहादुर जीवन लाल ने मुग़ल सत्ता ख़त्म करने हेतु अंग्रेजो से दोस्ती कर ली और अंग्रेजी हुकूमत के गुलाम बनकर देश के साथ गद्दारी करतारहा.

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महाराजा नरेंद्र सिंह

गद्दारों की सूची में पटियाला के महाराज नरेन्द्र सिंह भी शामिल थे . इस राजा ने 1857 क्रांति के समय अंग्रेजों का साथ देते हुए सीख विद्रोह को रोका और अंग्रेजो का वर्चस्व बचाकर रखा.

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राजा रणबीर सिंह

कपूरथला से राजा रणबीर सिंह द्वारा भी देश के साथ गद्दारी कर अंग्रेजों से हाथ मिलाया गया और पंजाब में चल रहे, सिख विद्रोह को खत्म करने के लिए  अंग्रेजों को सेना और  हथियार मुहैया कराया गया था.

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इन राजाओं की गद्दारी की वजह से हमारा देश लम्बे वक़्त तक गुलाम रहा. यह सभी राजा भारत के गद्दार और देशद्रोही राजा थे, जिनकी गन्दी सोच और सत्ता लालच ने कई देश भक्त वीरों को अंग्रेजो के हाथो मरवा दिया और देश को गुलामी की बेडी में बंधे रहने पर मजबूर कर दिया था.

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