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हमारी इस सोच के कारण मर जाते हैं गरीब ! यह वीडियो आपकी सोच बदल देगा !

आपकी सोच

भीख मांगना एक व्यापार बन चुका है।

यह व्यापार इतना विशाल रुप ले चुका है कि इसमें शामिल लोग लाखों करोड़ों के मालिक बन बैठे है, इसलिए तो अब ज्यादातर लोग भीख नहीं देते। वह यह कह कर टाल देते हैं कि यह लोग फ्रॉड होते है।

सर्वे बताते हैं कि सबसे अमीर है ज्यादातर भीखारी। आम लोगों से ज्यादा कमाई कर लेते हैं। एक दिन में औसतन आम आदमी चार सौ से छः सौ कमाता है वहीं भीखारियों की आमदनी एक दिन में पंद्रह सौ से दो हजार तक होती है।

गंदा है पर धंधा है की तर्ज पर भीखारी इस पेशे में उतरते हैं।

वो इसे भीख मांगना नहीं मानकर इस एक धंधा मानते हैं। शाहरुख ने अपनी फिल्म रईश में एक डॉयलग बोला है- हमारी अम्मीजान कहती हैं कोई भी धंधा छोटा नहीं होता, वैसे ही भीखारी यह मानते हैं कोई भी धंधा गंदा नहीं होता।

यही वजह है कि आम लोग अब भीख देने से मना कर देते हैं।

उनका यह मानना है कि भीख से इनको बढ़ावा मिलता है इसलिए इन्हें भीख नहीं देनी चाहिए।

कुछ लोग कहते हैं कि देख कर देना चाहिए कि सामने वाला क्या भीख लेने के योग्य है। यह योग्यता सभी लोगों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। कुछ विक्लांग को भीख लेने की श्रेणी में रखते हैं तो कुछ वृद्ध को।

लेकिन इस कशमकश में शायद वो जरुरतमंद लोग रह जाते हैं जिन्हें सही मायने में मदद की जरुरत होती है।

जरुरतमंद लोग व्यवसायिक भिखारियों की तरह प्रोफ्रेशन नहीं है इसलिए वो सामान्य ढ़ंग से मांगते हैं वहीं प्रोफ्रेशनल इतने प्रतिभावान होने लगे है कि वो बहुत आसानी से भीख प्राप्त करने में सफल होते हैं।  ऐसे जरुरतमंद लोगों का प्रतिशत बहुत कम है इसलिए हम पहचान नहीं कर पाते कि क्या करें?

हम किसे दे किसे न दे?

लेकिन हम जो वीडियो आपको दिखा रहे हैं वो आपके द्वंद को दूर कर देगा, आपकी सोच को बदल देगा । इस वीडियो के बाद आपको फैसला करने में देर नहीं लगेगी कि किसे देना चाहिए किसे नहीं।

यह आपकी सोच को पूरी तरह से बदल देगा।

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अभियान

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