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भगवान राम की जन्मकुंडली: विवाह से लेकर राज्याभिषेक तक – क्या थी सीता से अलगाव की वजह

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पुराणों की माने तो भगवान राम का जन्म त्रेता युग में हुआ था.

इंटरनेट पर उपलब्ध जन्म चार्ट में स्थित ग्रहों के आधार पर हम कुडंली का अध्यन कर सकते हैं.

भगवान का जन्म 26 मार्च को हुआ था लगभग 1 करोड़ 25 लाख साल पहले हुआ था. भगवान राम चित्रा शुक्ल नवमी में पैदा हुए थे.

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कुंडली का पहले भाव में गुरु

कुंडली के पहले भाव में गुरु बैठा हुआ है इसकी वजह से उन्हें सुंदर काया मिली. गुरु कुंडली के पहले भाव यानि लग्न में बैठा हुआ है. साथ ही वो बुद्धिमान भी थे. इसी की वजह से वो साहसी और महान व्यक्तित्व के धनी भी थे. इनकी कुंडली में पांच ग्रह उच्च के थे जो कि एक बेहतरीन स्थिती मानी जाती है जिसकी वजह से उन्हें एक धनी राजा का होने का मौका मिला. पहला उच्च का ग्रह गुरु है, चौथा शनि, सातवा मंगल, नवा शुक्र और दसवा सूर्य है. इसकी वजह से उनकी कीर्ती  पूरी दुनिया में फैली.

कुंडली के चौथे भाव में शनि

कुडंली के चौथे भाव में शनि बैठा हुआ है. ये घर उच्च का है साथ ही उन्हें अच्छी तरह से हथियार चलाने की योग्यता देता है.

सातवें घर में मंगल

पांचवे घर का स्वामी उच्च का मंगल सातवें घर में बैठा हुआ है. सातवा घर विवाह का होता है और कहते है कि अगर मंगल सातवें घर में हो तो ये अलगाव के लिए उत्तरदायी होता है. इसकी वजह से ना चाहते हुए भी भगवान राम को अपनी पत्नी से दूर रहना पड़ा. रावण ने वनवास के दौरान सीता का अपहरण कर लिया गया. उन्हें अपनी पत्नी को फिर से पाने के लिए लंका पर चढ़ाई करना पड़ी.जब उन्हें अयोध्या में वापस लेकर आए तो एक नगरवासी सीता के राम के साथ रहने से खुश नहीं था. इसलिए जनता के प्रति अपना उत्तरदायित्व मानते हुए सीता का परित्याग करना पड़ा.

नवें घर में शुक्र-

नवम भाव का शुक्र उनके आध्यात्मिक होने की ओर इशारा कर रहा हैं. समुद्री प्रवास का भी योग बनता है जैसा कि भगवान राम और उनकी सेना ने पत्थरों से पुल बनाया और उसे पार करके रावण की नगरी लंका पर चढ़ाई की थी.

पांचवे भाव पर गुरु और चंद्र की दुष्टी है पांचवा घर संतान के सुख को इंगित करता हैं. तभी उनको लव कुश जैसी बेहतरीन संतान मिली. दसवें घर पर उच्च के मंगल और उच्च के शनि की दृष्टि है उच्च का सूर्य दसवें घर में बैठा है. मंगल शनि और सूर्य की ये स्थिती उन्हें बेहतरीन योद्धा, जनता प्रेमी परहित करने वाला एक राजा बना रहा है.

गजकेसरी योग

पहले घर में गुरु और चंद्रमा की युति से गजकेसरी योग बन रहा है इस योग की वजह से व्यक्ति विनम्र होता है , साथ ही उसमें एक अच्छी प्रशासकीय योग्यताएं भी होती है.

भगवान राम की जन्मकुंडली हमेशा से ही ज्योतिषियों के कुतूहल का केंद्र रही है. हालांकी ये चार्ट वाल्मिकी रामायण के आधार बनाया गया है. लेकिन इसके अध्यन से उनके जीवन से जुड़ी बहुत सारी बातें सही साबित होती हैं. जो कहीं ना कहीं इस चार्ट की प्रामाणिकता की ओर इशारा कर रही हैं.

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