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सदियों से चली आ रही वेश्यावृति को किसीने लगाम क्यों नहीं लगाई !

वेश्यावृति की शुरुआत

समाज में वेश्यावृति की समस्या आम नहीं है.

शुरुआत में ये धर्म से संबंधित थी और 64 कलाओं में निपुण हुआ करती थी.

धीरे-धीरे मध्य युग में सामंतवाद के विकास के साथ-साथ इनका अलग वर्ग बनता चला गया और कला प्रियता के साथ-साथ काम वासना से भी संबंध होता गया. आज समाज में स्त्रियां अपनी आश्रितों की क्षुधा को शांत करने के लिए मजबूर हो इस घृणित कार्य को अपनाती हैं.

जिंदगी जीने के लिए जीविकोपार्जन के दूसरे साधनों के अभाव में महिलाएं इस कूकृत्य को अपनाने को मजबूर होती हैं. कानपुर के एक अध्ययन के अनुसार लगभग 65 फ़ीसदी वेश्याएं आर्थिक विवशता के कारण इस वृती को अपनाने को मजबूर है.

लेकिन क्या आपको पता है कि वेश्यावृति की शुरुआत की क्या कहानी है? किस तरह वेश्यावृति की शुरुआत हुई ? और दिन-ब-दिन समाज में इस कदर अपना पैठ बनाता चला गया, जिसका पूरी तरह निवारण अब तक नहीं हो पाया.

दोस्तों आज हम वेश्यावृति की शुरुआत के विषय के बारे में चर्चा करेंगे कि आखिर भारत में वेश्यावृति की शुरुआत कैसे हुई.

नगरवधू से शुरू दोहरे समाज की कहानी

दोस्तों नाम से ही पता चलता है कि प्राचीन भारत में नगरवधू हुआ करती थी, जिस पर किसी एक आदमी का नहीं बल्कि नगर के प्रतिभाशाली व्यक्तियों का स्वामित्व हुआ करता था. शुरुआत में नगरवधुएं सिर्फ नाचने – गाने और मनोरंजन का काम किया करती थी. लेकिन धीरे-धीरे इन्हें दाम देकर खरीदा जाने लगा.

दूसरी सदी में सुदरका नाम के लेखक के द्वारा संस्कृत में लिखी गई पुस्तिका ‘मृक्क्षकतिका’ में नगरवधू का पूरा विवरण मिलता है, जिसमें यह साबित होता है कि दिन में लोगों का मनोरंजन करने वाली ये लड़कियां रात में दाम देकर राजाओं के पास बुलाई जाती थी. इनमें ‘आम्रपाली’ नाम की नगरवधू बहुत मशहूर है. कहा जाता है कि वो इतनी खूबसूरत थी कि सिर्फ नगर के ही नहीं बल्कि दूसरे जगहों के राजा भी उसे जीतने का प्रयास किया करते थे.

शुरुआत में मुगल काल के दौरान तवायफें केवल दरबार में हीं नृत्य कर के शाही परिवार का मनोरंजन किया करती थी. लेकिन धीरे – धीरे कर इनके कोठों को वेश्यावृत्ति के ठिकानों में बदल दिया गया.

16वीं – 17वीं शताब्दी में जब पुर्तगालियों ने गोवा पर कब्जा किया हुआ था, उन दिनों पुर्तगाली जापान से मुंह मांगी दाम देकर लड़कियां यहां लाया करते थे. लेकिन धीरे-धीरे जब पुर्तगालियों की दोस्ती भारत के अन्य ब्रिटिश शासकों से हुई, तो वो भारत की गरीब लड़कियों को दाम देकर या जबरन उठाकर वेश्यावृत्ति के ठिकानों पर भेजने लगे.

इस तरह आर्मी कैंप के पास ही वेश्यावृति के कोठे बनाकर ब्रिटिश सिपाही अपनी इच्छा से इन लड़कियों के कोठों पर पहुंच जाते थे.

आज वेश्यावृति का धंधा इतना तेज हो चला है कि शायद हीं कोई हो जिसने रेड लाइट इलाके के बारे में ना सुना हो. महाराष्ट्र में और कर्नाटक के कई इलाकों में देववाशी बेल्ट वेश्यावृति से ही जुड़ा हुआ नाम है. कोलकाता का सोनागाछी, मुंबई का कमाटीपुरा, दिल्ली का जीबी रोड, आगरा का कश्मीरी मार्केट, ग्वालियर का रेशम पुरा आदि इलाके रेड लाइट एरिया के लिए बदनाम है.

समाज के सामने ये एक ज्वलंत सवाल है कि इतनी सदियाँ बीत जाने के बाद भी पुलिस प्रशासन या सरकार इसपर लगाम लगाने के लिए कोई कठोर कदम नहीं उठा पाई है.

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