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सांप पालने से क्या होता है ज़रा सीखे अफगानिस्तान से!

afghanistan

आतंकियों को पनाह देना मतलब सांप पालने जैसी बात होती है.

यह बात कितनी सच है, ये आप अफगानिस्तान के संसद पर हुए हमले की खबर देख कर और पढ़ कर अंदाजा लगा सकते है. इस आतंकी हमले में 21 लोग घायल हो गए है. बाद में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें सुरक्षाबलों ने सभी सात हमलावर आतंकवादियों को मार गीराया.

अफगानिस्तान के संसद पर हुए हमले के बाद भारत के संसद पर हुआ हमला याद अता है. २००१ में भारत के संसद पर कुछ आतंकवादियों ने हमला बॊल दिया था. जिसमे १२ लोग मर गए और २२ से अधिक लोग घायल हुए थे. भारत और अफगानिस्तान के संसद पर हुए हमले में काफी समानता है.

दोनों ही जगह आतंकवादी गुटों में आए थे और संसद में मेन दरवाज़े के  बहार उन्होंने हमला कर दिया था.

दोनों में मानव विस्फोटक का इस्तमाल किया गया था.

afghan sansad attack

आरोप का सिलसिला

भारत के संसद पर जब हमला हुवा तब पकिस्तान को दोष लगया था. यह तो जग जाहिर है की हमला किसने किया था. आंतंकवादी कहा से अधिकतर आते है और क्या करते है. अब जब अफगानिस्तान के संसद पर हमला हुआ है तो पाकिस्तान भारत को दोष लगाने का कोई मौका नही छोड़ रहा है.

पाकिस्तान ने सीधे सीधे भारतीय RAW पर उंगली उठाकर आरोप लगाया कि उन्होंने ही यह हमला करवाया है.

क्योंकि इन दोनों हमलो में कई समानता है और अफगानिस्तान एक समय भारत का अंग भी रहा है.

मगर पाकिस्तान यह भूल रहा है की आतंकवादीयों को वो भी पनाह देता है.

मुख्या आतंकवादी

१. अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकवादी :-
इनको प्रशिक्षण और मदद पूरी तरह से पाकिस्तान करता है. इस लिए इनके हौसले मजबूत है. यह एक वजह भी है अमेरिका अफगान से सीधा कोई रिश्ता नहीं बन पा रहा है.

२. टीटीपी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान :-

यह आतंकी अफगानिस्तान में रह कर दोनों देशों में आतंक फैलाने में सक्रीय है. इनको धर्मनिरपेक्ष पाकिस्तानीयों को उखाड़ फेंकना है और एक अपना अलग इस्लामिक प्रदेश लाना है.

३. लश्कर-ए-तैयबा LeT :-

1990 में अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में हाफिज मुहम्मद सईद और जफर इकबाल द्वारा स्थापित यह संघटन स्थापित किया गया था. अब यह पाकिस्तान से कार्यरत होता है. इस संघटन ने कई जानलेवा हमले भारत पर किए है और उसकी जिमेदारी भी लेते हुए अपना उद्देश्य साफ़ किया है.

४. अल-कायदा :-

इस संघटन के विभिन्न विभिन्न अवतार है. कायदा अल, काले गार्ड, ब्रिगेड (Arab Legion of AQ) और लीबिया के इस्लामिक जिहाद ये सारे मिले हुए है और इनका एक ही उद्देश्य  है जो कि अपना अलग इस्लामिक प्रांत हो। किंतु यह संघटन बेहद खतरनाक है. यह इंटरनेट पर लोगों के कतले आम की विडिओ डालते है. युवाओं से सीधा संपर्क में आने के लिए वो इंटरनेट पर बहुत सक्रीय है. इन्टरनेट बोम भेजना इनके लिए आम बात है.

यह तो केवल चंद आतंकवादी संघटन है जिनके बारे में आपने कई बार सूना होगा. मगर इससे भी ज्यादा और संघटन है जो अफगानिस्तान और आस पास के देशों में रह कर अपने तरीके से उनका साम्राज्य लाना चाहते है.

इनकी तादात इतनी है की इनके देश में उतनी आबादी भी नहीं होगी.

क्यों पालकर रखा है ऐसे सांप ?

अन्य इस्लामिक देशों की तुलना में पाकिस्तान अब समझ दार हो रहा है. पाकिस्तान को इस बात का ज्ञान हो चुका है की आतंकवादी पालना मतलब खुद की जान खतरे में डालना है. मगर जो बोया है उसके पेड़ इतने बड़े हो गए है की अब उन्हें जड़ से उखाड़ना क्षमता के बहार हो गया है. उसी तरह के हालात अफगानिस्तान में भी है. किंतु अफगानिस्तान पाकिस्तान से भी बड़ा गरीब देश है.

अफगान में नैसर्गिक तेल और नशीली पथार्दो से केवल आमदनी होती है. इस के आलावा आतंकी संघटनो को कई देश अपने फायदे के लिए पैसे देते है. उन्ही पैसों से देश चलता है. गरीब जनता की हालत बदतर होने के कारण उन्हें उन सांपों में शामिल हो कर अपने परिवार का बोझ ढोना पड़ता है.

साथ में वह  इन देशों की सरकार के सूत्र सब आतंकवादियों के हाथो में होते है.

यह एक वजह भी है, पडोसी मुल्क कभी किसी आतंकवादी और देशद्रोही को भारत के हवाले नहीं करता है.

दरअसल यह सभी देशों की सरकारों को अपनी इच्छा शक्ति दिखानी होगी और इन सब का सफाया करने का प्रण करना होगा.

तब जाके कही इन देशों के हालत सामान्य होंगे और फिर विकास की और बढेंगे.

भारत को भी इन देशों से यह सीख लेनी होगी वरना एक दिन नक्सलवादियों को बढावा देते देते उनका बढ़ा हुआ कद खुद के लिए जान लेवा हो जायेगा.

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