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एक समय ऐसा भी था कि इस तांत्रिक की तूती बोलती थी सत्ता के गलियारों में

तांत्रिक चंद्रास्वामी

चर्चित तांत्रिक चंद्रास्वामी अब इस दुनिया में नहीं रहे. लेकिन एक समय ऐसा था जब सत्ता के गलियारों में चंद्रास्वामी की तूती बोलती थी.

कहा जाता है कि सऊदी अरब के कुख्यात हथियार माफिया अदनान खशोगी से लेकर पूर्व विदेश मंत्री के.नटवर सिंह, ब्रिटेन की प्रधानमंत्री रहीं मारग्रेट थैचर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन की पत्नी नैंसी रीगन, हॉलीवुड स्टार एलिजाबेथ टेलर ये लेकर ब्रूनेई के सुल्तान भी तांत्रिक चंद्रास्वामी की दोस्तों की लिस्ट में शामिल थे.

पी वी नरसिंह राव जब प्रधानमंत्री थे उस समय तांत्रिक चंद्रास्वामी की प्रधानमंत्री निवास में एंट्री बिना सुरक्षा जांच के होती थी. भारतीय राजनीति में ऐसे बहुत से जाने माने चेहरे हैं जो चंद्रास्वामी के दरबार में हाजिरी लगाया करते थे.

इनमें अरुण शौरी से लेकर जैन टीवी के जेके जैन भी थे, तो टीएन शेषन जैसे कड़क मुख्य चुनाव आयुक्त और पूर्व कांग्रेसी नेता व मंत्री कैप्टन सतीश शर्मा भी तांत्रिक चंद्रास्वामी के दरबार में जाया करते थे.

बताया जाता है कि जब पी.वी. नरसिंह राव प्रधानमंत्री थे तो उस समय उनकी तूती बोलती थी. जिस दिन चंद्रास्वामी का जन्मदिन होता था उस दिन उनके घर पर कई केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री जन्मदिन पर उपहार और गुलदस्ते लिए लाइन में खड़े रहते थे.

चंद्रास्वामी ने तांत्रिक की दुनिया में जो मुकाम हासिल किया उसके पीछे की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. तांत्रिक बनने के पहले राजनीति में हुआ था.

नरसिंह राव जब आंध्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे तो उन्होंने युवा चंद्रास्वामी को हैदराबाद युवा कांग्रेस का महासचिव बनाया था. उनका नाम तब नेमि चंद्र जैन हुआ करता था.

बताया जता है कि इसके बाद चंद्रास्वामी दिल्ली आ गए और उस समय युवा कांग्रेस के महासचिव और मध्य प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता रहे महेश जोशी के बंगले के बाहर नौकरों वाले क्वार्टर में रहने लगे थे.

बाद में चंद्रास्वामी ने बिहार-नेपाल सीमा पर तांत्रिक साधना सीखने चले गए और कुछ दिन बाद वे गुरू चंद्रास्वामी बन कर प्रकट हुए.

लेकिन उनकी जिदंगी का उठान शुरू हुआ संजय गांधी के संपर्क में आने के बाद. उस समय प्रकाश चंद्र सेठी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे. तभी दिल्ली से खबर आई कि सेठीजी, इंदिरा गांधी के नाश के लिए उज्जैन के महाकाल मंदिर में एक तांत्रिक यज्ञ करवा रहे हैं.

तभी तांत्रिक चंद्रास्वामी के एक शिष्य के जरिए चंद्रास्वामी का परिचय संजय गांधी से हुआ. संजय गांधी ने तांत्रिक चंद्रास्वामी को एक विशेष विमान दे कर जवाबी तांत्रिक साधना करने के लिए उज्जैन जाने को कहा और संयोग से प्रकाश चंद्र सेठी को दिल का दौरा पड़ गया.

बस फिर क्या था-चंद्रास्वामी की ख्याति रातों-रात सत्ता के गलियारों में स्थापित हो गई थी और वे महान तांत्रिक गुरू चंद्रास्वामी बन गए.

लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब तांत्रिक चंद्रास्वामी पर बहुत सारे इल्जाम लगे. उन्हीं में से एक इल्जाम था राजीव गांधी हत्याकांड के अभियुक्तों की मदद करने का.

भारत सरकार ने इस हत्याकांड की जांच के लिए मिलाप चंद्र जैन आयोग बैठाया था जिसने लगभग छह सौ पन्नों में यह साबित करने की कोशिश की कि चंद्रास्वामी राजीव गांधी की हत्या का षडयंत्र रचने वाले शिवरासन के मददगार थे और हत्या के बाद शिवरासन को विदेश भेजने का इंतजाम भी उन्होंने करवाया था जो पूरा नहीं हो सका.

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