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अजमेर दरगाह के मौलवी ने गौ हत्या को लेकर कही ऐसी बात कि सुनकर आप दंग रह जायेंगे !

गौ हत्या

आम तौर पर देखा गया है कि जब भी गौ हत्या बंदी को लेकर बात आती थी तो मुस्लिम मौलवी ऐसी बात कहते थे जिससे हिंदुओं की भावनाएं आहत होती थी.

लेकिन उत्तर प्रदेश के चुनावों में भाजपा की जीत और योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. अब मुस्लिम समाज का वो तबका जो गौ हत्या बंदी को लेकर पहले बोलने से बचता था अब वह खुलकर अपनी बात कह रहा है.

कह ही नहीं रहा है बल्कि गौ हत्या बंदी को लेकर मुस्लिम समाज से भी अपील कर रहा है कि वह खुद को इस काम से अलग कर लें.

ऐसा ही एक मामला अजमेर में देखने को मिला.

गौ हत्या

अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के वंशज और प्रमुख दरगाह दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने उर्स के मौके पर एलान किया है कि वे कभी भी बीफ नहीं खाएंगे. इतना ही नहीं उन्होंने मुस्लिम समाज से भी अपील की है कि वे सब भी बीफ नहीं खाएं.

अजमेर दरगाह के दीवान इतने पर ही नहीं रूके. उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि सरकार को देश में गौ हत्या पर ही प्रतिबंध लगा देना चाहिए. क्योंकि बीफ को लेकर देश में दो समुदायों के बीच पनप रहे वैमनस्य पर विराम देने के लिए देश में गोवंश की सभी प्रजातियों के वध और इनके मांस की बिक्री पर व्यापक प्रतिबंध लगना बहुत जरूरी है. नहीं तो दोनों समुदाय के लोग इसी प्रकार आपस में टकराते रहेंगे.

आप को बता दें कि इसको लेकर हिंदू समुदाय द्वारा उनकी तारीफ की जा रही है. लोगों का कहना है कि अगर सभी मौलाना अपने अपने स्तर से इसी प्रकार की अपील करें तो हालात में बदलाव आ सकता है.

अगर मुसलमान खुद को गौ हत्या से दूर रहकर इसके सेवन को त्यागने की पहल करता है तो इससे मुल्की मजहबी रवादारी मोहब्बत और सदभावना फिर से उसी तरह कायम हो सकती है जैसी सैकड़ों सालों से चली आ रही है.

शायद यही कारण है कि सैयद जैनुल आबेदीन अली खान उस खाई की वजह को पहचान रहे हैं. तभी वो इसके पाटने के लिए न केवल मुस्लिमों से अपील कर रहे हैं बल्कि केन्द्र सरकार को पूरे देश में गौ हत्या करने वालों को उम्रकैद की सजा देने की वकालत कर रहे हैं.

सैयद जैनुल आबेदीन तो हिंदू संगठनों की मांग का समर्थन करते हुए यहां तक कहते हैं कि केंद्र सरकार को गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए.

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