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हिमाचली गबरू का डरबन में डंका, तय वक्त से पहले पूरी की दुनिया की सबसे पुरानी मैराथन

सुनिल शर्मा

कहते है ना जब हौसले बुलंद हो तो कोई कार्य मुश्किल नहीं होता। सुनिल शर्मा इस कहावत की असली मिसाल बन गए है।

हिमाचल प्रदेश के सिमौर के रहने वाले मैराथन धावक सुनिल शर्मा ने एक बड़ा मुकाम हैसिल करते हुए अपने परिवार के साथ देश का नाम भी रोशन कर दिया है। सुनिल दक्षिण अफ्रीका के डरबन में अपना लोहा मनवा देश भर में छा गए है।

हिमाचली गबरू का डरबन में डंका

सुनिल शर्मा

डरबन में दुनिया की सबसे पुरानी और लम्बी 93वीं कामरेड अल्ट्रा मैराथन का आयोजन किया गया था, जिसमें हिमाचली गबरू सुनिल शर्मा ने 90 किलोमीटर की दूरी निर्धारित समय से दो घंटे 11 मिनट पहले ही पूरी कर ली। सुनिल ने अपनी इस रेस में जीत के साथ साथ एक नया रिकॉड भी कायम किया है। सुनिल शर्मा ने हालांकि पहले 45 किलोमीटर की दूरी महज चार घंटे में ही तय कर ली थी। मगर इसके बाद उनके घुटने में चोट लगने के चलते उनकी रफ्तार चार मिनट 53 सैकेंड प्रति किलोमीटर से घटकर सात मिनट किलोमीटर के करीब हो गई।

घुटने पर लगी चोट के बावजूद भी सुनील ने हौंसला नहीं छोड़ा। हालांकि उनकी दौड़ पर इसका असर जरूर हुआ, जिसके चलते उन्होंने इस दौड़ को 9 घंटे 49 मिनट में पूरा किया। कामरेड अल्ट्रा मैराथन दौड़ का निर्धारित समय 12 घंटे का है, जिसे इतने कम समय में पूरा कर सुनील ने रिकॉड बना दिया है।

कामरेड रन में स्टार ग्रुप-बी में दौड़ रहे इस हिमाचली धावक सुनील शर्मा ने विदेशी धरती पर आयोजित लंबी दौड़ को दूसरी बार तय समय से पहले पूरा करने में कामयाबी हासिल की। सुनिल की दौड़ देखने के बाद देशवासी ही नहीं बल्कि अन्य देश के लोग भी उनकी दौड़ की जमकर तारीफ करने लगे और तालियां बजाने लगे।

सुनिल शर्मा

बुधवार को सुनिल शर्मा अपने देश की सरजर्मी पर कदम रखेंगे। सुनील के घर लौटने पर विभिन्न संगठनों द्वारा उनका स्वागत किया जायेगा।

इस कामरेड अल्ट्रा मैराथन में विश्व के कई देशों ने भाग लिया और भारत से 161 लोगों ने इस मैराथन में भाग लिया। सुनील शर्मा के भारत लौटने के बाद उनका अगला टारगेट अमेरिका में होने वाली डैथ वेली मैराथन होगा। इस अगली चुनौती पर सुनील ने बताया कि ये मैराथन 23 से 25 जुलाई तक अमेरिका में आयोजित होगी।

48 घंटों तक चलने वाली 135 मील की इस मैराथन को डैथ वैली मैराथन के नाम से जाना जाता है। यह मैराथन विश्व की सबसे मुश्किल मैराथन है। इसका कारण है इस रेस के दौरान डैथ वैली के जंगल से गुजरना पड़ता है। इतना ही नहीं इस दौरान यहां का तापमान मायन्स 4 से 50 डिग्री सेल्सियस तक होता है। एक तो इतनी लम्बी दौड़ उस पर वहां का तापमान इस रेस को और ज्यादा मुश्किल बना देता है।

आपको बता दे कि उपमंडल संगड़ाह के गांव माइना से सबंध रखने वाले सुनील शर्मा को अंतरराष्ट्रीय स्तर की मैराथन के लिए स्पांसरशिप मिलने… अथवा उनकी कामयाबी का दौर 4 अगस्त 2016 को दि ग्रेट इंडिया रन से शुरू हुआ था… और आज उनकी मेहनत और लगन के चलते यह सफर कामयाबी के कदम चूमने लगा है।

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