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‘समन’ और ‘वॉरंट’ – जानिए दोनों में क्या अंतर होता है

समन और वॉरंट

टीवी या अखबार में हम अकसर समन और वॉरंट शब्द सुनते रहते हैं।

इतना तो हर इंसान जानता है कि ये दोनों ही सब्द अदालती कार्रवाई में इस्तेमाल किए जानते हैं।

लेकिन कोई भी इंसान इन दोनों शब्दों का सही तरीके से अंतर नहीं जानता। ज्यादातर लोगों को ये पता नहीं रहता कि दोनों के क्या मायने होते हैं। शायद आपको पता ना हो लेकिन हम आपको बता दें कि दोनों में काफी अंतर हैं। आइए आपको बताते हैं कि दोनों में क्या अंतर है?

समन किसे कहते हैं:

जब अदालत में किसी आरोपी के खिलाफ केस चलता है और आरोपी को कोर्ट में पेस होने के लिए कहा जाता है तो इसे अदालत की भाषा में समन कहा जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो समन एक कानूनी नोटिस है जो सिविल और आपराधिक मामलों में जारी किया जाता है। समन में अदालत किसी आरोपी को व्यकितगत रूप से पेश होने के लिए कहती है। समन किसी भी आरोपी को रजिस्टर्ड डाक की सहायता से भेजा जाता है। जब ये समन आरोपी को मिलता है तो उसे उसपर हस्ताक्षर करने होते हैं।

वॉरंट क्या है:

वॉरंट को कानूनी आदेश कहा जाता है। वॉरंट को जज या मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया जाता है। वॉरंट में किसी भी इंसान को गिरफ्तार करने, उसके घर की तलाशी लेने या दूसरे कदम उठाने के लिए कहा जाता है। पुलिस बिना वॉरंट के किसी भी इंसान को गिरफ्तार नहीं कर सकती, ना ही किसी के घर की तलाशी ले सकती। इन सबके लिए पुलिस के पास वॉरंट होना डरूरी होता है। वॉरंट जारी करने का अधिकार कोर्ट के पास होता है। वॉरंट को लिखकर जारी करते हैं और इसके ऊपर जारी करने वाले की मुहर और पद का जिक्र भी किया जाता है। साथ ही ये भी लिखा जाता है कि किस अपराध के लिए वॉरंट जारी किया जा रहा है।

हमें पूरी उम्मीद है कि अब आप दोनों के बीच अंतर समझ गए होंगे। समन और वॉरंट दोनों जारी किए जाते हैं लेकिन एक कोर्ट में आरोपी के खिलाफ और दूसरा किसी को गिरफ्तार करने या तलाशी लेने के लिए। कई लोगों को कानूनी समझ नहीं होती और इस कारण वो किसी के भी बहकावे में आसानी से आ जाते हैं। लेकिन हर किसी को कानून की बेसिक जानकारी होनी बहुत जरूरी होती है।

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