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नेताजी सुभाषचंद्र बोस गये थे रूस ! तो क्या रूस ही है नेताजी का हत्यारा ?

नेताजी सुभाषचंद्र बोस

नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी की मृत्यु का रहस्य आज तक हल नहीं हो पाया है.

कोई कहता है कि इनकी मृत्यु विमान दुर्घटना में हुई थी तो कोई गुमनामी बाबा को ही नेताजी मान रहा है. वैसे भारत की आजादी के सबसे अधिक संघर्ष करने वाले देशभक्त का अंत ऐसा होगा, यह किसी ने नहीं सोचा था.

जिस व्यक्ति का नाम सुनते ही अंग्रेज कांपते थे और गांधी जी भी जिस व्यक्ति की बातें सुनते थे और उसको पूरी मदद देते थे, वह व्यक्ति नेताजी सुभाषचंद्र बोस, इस तरह से गुमनाम हो जायेगा किसी को यह अंदाजा नहीं था.

आज हम आपको नेताजी सुभाषचंद्र बोस का एक और रहस्य बताने वाले हैं कि रूस भी इनका हत्यारा साबित हो जायेगा, तो आइये पढ़ते हैं यह पूरी खबर-

नेताजी गये थे रूस –

नेताजी सुभाषचंद्र बोस

रूस को भारत हमेशा अपना दोस्त मानता है, इसी भूल के चलते 23 अगस्त 1945 को नेताजी भी रूस में एंट्री ले चुके थे.

यह बात कुछ समय पहले बंगाल सरकार के वित्त मंत्री अमित जी ने कही थी. अब एक नेता कोई भी ब्यान हवा में तो देगा नहीं. इसका अर्थ साफ है कि नेताजी की मृत्यु जहाज दुर्घटना में तो नहीं हुई थी. तो अगर जहाज दुर्घटना में इनकी मृत्यु नहीं हुई थी, तो फिर नेताजी कहाँ गायब हो गये थे?

असल में सन 1952 में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु रूस में हुई थी और साथ ही यह कोई दुर्घटना नहीं थी बल्कि रूस के बड़े नेता के कहने पर रची गयी साजिश थी.

असल में नेताजी सुभाषचंद्र बोस को स्टालिन बहुत पसंद थे –

stalin

नेताजी सुभाषचंद्र बोस हमेशा से ही रूस के माडल के प्रशंसक रहे थे. साथ ही साथ नेहरु भी इसी मॉडल को चाहते थे. नेहरु को एक बार रूस से खबर की गयी थी कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस को पकड़ लिया गया है और नेहरु ने यह खबर सीधे इंग्लैंड को दे दी थी. अब इंग्लैंड को तय करना था कि आखिर नेताजी का करना क्या है? लेकिन इंग्लैंड तब रूस से किसी भी प्रकार की मदद नहीं ले सकता था.

नेताजी सुभाषचंद्र बोस 1945 में अपने एक रेडियो भाषण पर कहते हैं कि यूरोप का एक ही व्यक्ति ऐसा है जो भारत समेत विश्व के कई देशों की मदद कर सकता है. यह व्यक्ति जोसेफ स्टालिन ही था. असल में जब जापान हार गया तो नेताजी को पता चल गया था कि अब भारत की आजादी में यह देश कोई मदद नहीं करने वाला है. तब नेताजी को अन्य विकल्प के लिए जोसेफ स्टालिन ही नजर आ रहा था.

तब 1945 को ही सुभाषचंद्र रूस पहुँच गये थे और बोला तो यहाँ तक जाता है कि इनकी मुलाकात तानाशाह स्टालिन से हुई भी थी. किन्तु भारत की आजादी की कोई बात तब नहीं बन पाई थी.

नेहरू ने सुभाषचंद्र को खोजने की भी कोशिश नहीं की थी –

नेताजी सुभाषचंद्र बोस

असल में भारतीय सरकार की गोपनीय फाइलों में यह पात्र भी दबा हुआ है, जो नेहरु ने इंग्लैंड को यह बताने के लिए लिखा था कि नेताजी रूस में पकड़े गये हैं.

इसके बाद नेहरु ने नेताजी को खोजने की अन्य कोई कोशिशे नहीं की थी. जब रूस से पत्र आया था तो क्या नेहरु किसी हद तक जाकर सुभाषचंद्र को बचाने की कोशिश तो कर ही सकते थे लेकिन ऐसा नहीं किया गया था.

असल में कुछ लोग तो यह भी बताते हैं कि नेताजी रूस में तब कुछ लोगों की मदद कर रहे थे जो रूस की सरकार के खिलाफ थे और इसी वजह से इनको जेल में डाला ज्ञाता और अंत में रूस के अन्दर ही नेताजी की मृत्यु हो गयी थी. रूस से बाहर इंग्लैंड नेताजी का इन्तजार कर रही थी और इनके ऊपर सभी की निगाह भी थी. इसीलिए नेताजी रूस में ही रहे और आखिरकार रूस ही नेताजी की मृत्यु का कारण भी रहा था.

लेकिन दुःख इसी बात का है कि आखिर क्यों जवाहरलाल नेहरु ने सुभाषचंद्र बोस को खोजने की कोशिश नहीं की थी.

भारत सरकार हमेशा बस लोगों से यही बोलती रही थी कि नेताजी की मृत्यु विमान दुर्घटना में हुई है.

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