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बड़े बड़े शूरमा भी इस पत्थर को हिला नहीं सके उठाना तो बहुत दूर की बात है

मंदिर का पत्थर

मंदिर का पत्थर – बड़े बड़े शूरमा भी इस पत्थर को हिला नहीं सके उठाना तो बहुत दूर की बात है

बचपन में जब हम मेला देखने जाते थे, तो वहां पानी में एक पत्थर रखा होता था और हा उसे जितनी बार पानी में डूबोने की कोशिश करते वो पत्थर ऊपर ही आ जाता. वो पत्थर पानी में कुछ इस तरह से तैरता जैसे वो पत्थर नहीं बल्कि किसी पेड़ का पत्ता हो.

उसे देखकर बच्चे हैरान होते थे और उन्हें ये बताया जाता था कि ये पत्थर कोई साधारण पत्थर नहीं है. ये तो वो पत्थर है जिसे भगवान् राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए समुद्र में रखकर पुल बनाया था. हम बड़े ही आश्चर्य से वो कहानी सुनते थे.

आज कुछ वैसी ही कहानी फिर सुनने में आ रही है. असल में इसका जीता-जगाता प्रमाण भी है. आप इसे जाकर देख सकते हैं. पिथौरागढ़ के मोस्टा मानो मंदिर का पत्थर जो भी उसे कमर से ऊपर तक उठा ले, उसकी किस्मत चमक जाती है. हैरत तो दावे के दूसरे पहलू में है, जिसके मुताबिक लोग इस मंदिर का पत्थर को हिला तक नहीं पाते. उसे महादेव का नाम लेकर उंगलियों पर आसानी से उठाया जा सकता है.

मंदिर का पत्थर

आप सोच रहे होंगे की ये सच है. जी हाँ ये बिलकुल सच है. बिना भगवान शिव का नाम लिए आप उसे हिला तक नहीं सकते. बड़े बड़े शूरमा भी ऐसा नहीं कर पे. और एक नन्हा सा बालक महज़ शिव को याद कर उसे उठा लेता है. ये सबको हैरान कर देती है बात. ये वाकई कोई करिश्मा है या लोगों ने विज्ञान के किसी सिद्धांत को चमत्कार का नाम दे दिया है. जिस पत्थर को उठाने में बड़ों-बड़ों के पसीने छूट जाते हैं. आखिर कैसे महादेव का नाम लेकर उंगलियों से उठ जाता है.

आपको मंदिर का पत्थर एक कोने में दिखाई देगा. आपको लगेगा की शायद कोई इसे आराम से उठा सकता है. इस पत्थर की बनावट बड़ी अजीब है. इसकी लंबाई 2 फीट है और गोलाई करीब 1 फिट है. इसमें पकड़ बनाने के लिए कोई जगह नहीं है. लोगों का कहना है कि जो इस पत्थर को हटा देगा, उसकी किस्मत बदल जाएगी और वह धनी हो जाएगा. ऐसा माना जाता है. वहां के लोग इसे मानते हैं. उनके पास ऐसे कई उदाहरण हैं.

वहां के लोगों का कहना है कि ये पत्थर यहाँ का नहीं है इसे नेपाल से लाया गया है. उस समय एक नेपाली डोका में इस पत्थर को लाया गया था. नेपाल से लाकर इसे जहां रखा गया, वहां से आज तक कोई भी उस पत्थर को हिला नहीं सका है.

वैसे मंदिर का पत्थर जाने वाला हर शख्स ये कोशिश करता है कि वो उसे थोड़ा भी उठा ले तो उसकी किस्मत बदल सकती है, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता. हर किसी के बस की बात नहीं इसे हिलाना. वैसे ये पत्थर भले ही देखने में छोटा लगता है लेकिन इसका वज़न एक कुंतल तक बताया जाता है.

सही कहा है किसी ने किसी की श्रद्धा पर सवाल नहीं उठाना चाहिए और न ही किसी के भगवान का मज़ाक उड़ाना चाहिए. कण-कण में भगवान् हैं. आज भी इस बात को कई जगह आप सिद्ध होता देख सकते हैं.

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