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बंटवारे ने भारत की कोहिनूर कही जाने वाली ये सिंगर भी छीन ली

नूरजहां

नूरजहां – भारत और पाकिस्तान का बंटवारा, एक ऐसा दर्द है जो जितना हिन्दुस्तानियों के दिल में है, उतना ही पाकिस्तान वालों के दिल में भी। जिसने भारत की कई कीमती विरासतों, कई नायाब हीरों, कई कलाकारों की भारत की ज़मीं से दूर कर दिया।

साहित्य, संगीत और अभिनय की दुनिया तो मानो लुट ही गई। ज़मीन पर खिंची एक लकीर ने मानो सब कुछ अलग कर दिया। 1947 के उस दौर ने भारत से कई कोहिनूरों को दूर कर दिया।

आम जनता हो या बड़े-बड़े कलाकार, इस लकीर ने मानो सभी की ज़िंदगी बिखरा सी दी। सरहदों के बंटवारे ने काफी कुछ बांट दिया।

इस बंटवारे के बाद भारत से कई नायाब शख्सियतें दूर चली गईं और उन्हीं में से एक थी सुर सामग्री नूरजहां, बला की खूबसूरती और गज़ब की आवाज़ की मल्लिका। नूरजहां को खुदा ने बड़ी ही खूबसूरती के साथ बनाया था। आवाज़ भी बक्शी थी और रंग रूप भी। 21 सितम्बर 1926 को पैदा हुई नूरजहां ने 23  दिसंबर 2000 को आखिरी सांस ली थी।

नूरजहां, भारत का एक ऐसा हीरा थी, जिनकी तुलना एक वक्त पर स्वर कोकिला लता मंगेशकर से की जाती थी। ये कहना अतिश्‍योक्ति नहीं होगा कि अगर नूरजहां, भारत में ही रहती तो लता मंगेशकर को अपने करियर में उतनी सफलता नहीं मिल पाती जितनी उन्होने हासिल की।

जब भारत और पाकिस्तान के बीच कोई दीवार नहीं थी, उस वक्त पर नूरजहां यहां की साहित्यिक धरोहर का बेशकीमती हिस्सा थी लेकिन बंटवारे के बाद नूरजहां वहीं जाना चाहती थी जहां वो पैदा हुई और उसके बाद, बंटवारे में उनका गांव कसूर, पाकिस्तानी पंजाब में चला गया था इसलिए नूरजहां पाकिस्तान की होकर रह गईं।

नूरजहां ने कईं गानों को अपनी आवाज़ में बांधकर उन्हे और पॉपुलर कर दिया।

‘मुझसे पहली सी मुहब्बत’ उनका गाया हुई एक ऐसा गाना है जिसके बारे में जितना कुछ कहा जाएं वो कम ही है। ये कहना गलत नहीं होगा कि शब्द उनकी आवाज़ में ढ़लकर और ज्यादा खूबसूरत हो जाते थे।

नूरजहां ने दर्द भरे कई गानों को अपनी आवाज़ दी, ये गाने लोगों के दिल की आवाज़ बनें।

कहते हैं मशहूर संगीतकार ओ पी नय्यर उनका गाया गीत ‘कल्ली कल्ली जान, दुःख लक्ख ते करोड़ वे’ सुन कर रो पड़े थे। ये अपने आप में ही ये बताने के लिए काफी है कि उनके गाए हुए गाने कितने अपीलिंग हुआ करते थे।

‘अनमोल घडी’ का गीत ‘आवाज़ दे कहां है, दुनिया मेरी जवां है’ इस गाने के बारे में तो कुछ कहने की ज़रूरत ही नहीं है क्योंकि इस गाने के बोल अपने आप में ही बहुत कुछ कहते थे।

यूं तो नूरजहां बंटवारे के वक्त ही भारत की सरज़मीं से चली गईं थी और अब तो वो इस दुनिया से भी रूखसत हो गईं हैं लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं है कि उनके गाए हुए गाने कयामत तक लोगों के दिल में रहेंगे और उन्हे खूबसूरत संगीत की मिसाल देते रहेंगे।

इसके अलावा बॉलीवुड के कई सितारों का जन्‍म भी पाकिस्‍तान में हुआ है जो बंटवारे के दौरान पाकिस्‍तान से भारत आए थे जिनमें दिलीप कुमार का नाम भी शामिल है।

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