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सिकंदर कभी नहीं हरा पाया था राजा पोरस को ! एक झूठा इतिहास जिसने बना दिया सिकंदर को महान

पोरस और सिकंदर

आपने आज तक यही पढ़ा होगा कि जो जीता वही सिकंदर.

लेकिन असल में जो जीता वही पोरस होना चाहिए. किस तरह से पोरस ने सिकंदर से युद्ध लड़ा था, कैसे पोरस से जान बचाकर सिकंदर भागा था यह बहुत कम जगह लिखा हुआ है. असल में पोरस की हार, सिकन्दर से नहीं हुई थी बल्कि पोरस उन यूरोपीय इतिहासकारों से हारा है जिन्होनें गलत तरह से पोरस को हारा बताया है.

इतिहास ज्ञाता और विख्यात लेखक प्लूटार्क ने लिखा है कि ‘सिकंदर सम्राट पुरु (पोरस) की 20,000 की सेना के सामने तो ठहर नहीं पाया था. असल में पोरस की सेना ने सिकंदर की सेना को इस तरह से काटा था जैसे कि कोई गाजर-मूली काट देता है. अगर सिकंदर जीत जाता तो वह आसानी से मगध तक पहुँच जाता किन्तु वह मगध तक नहीं पहुंचा. सिकंदर का कारवा वहीँ क्यों रूक गया, जहाँ पारस का साम्राज्य था. इसका जवाब आप खुद ही सोच लो. एक कम अक्ल का इंसान ही यह बता सकता है कि सिकंदर यहीं हार गया था इसलिए वह मगध तक नहीं पहुँच पाया था.

सबूत के तौर पर पुस्तक ‘व्यथित जम्मू कश्मीर’ पढ़ सकते हैं या थोड़े खोजने पर आपको प्लूटार्क का लिखा भी मिल जायेगा.

चलिए आज आपको पोरस और सिकंदर के एक युद्ध के बारें में पूरी और सही जानकारी देते हैं-

पोरस और सिकंदर कौन थे?

महाराजा पोरस सिंध-पंजाब सहित एक बहुत बड़े भू-भाग के स्वामी थे. भारत में ऊपर की तरफ से घुसने के लिए हर व्यक्ति को सिंध पार करना पड़ता था और यहाँ के एक बड़े भूभाग पर राजा पोरस का ही साम्राज्य था.

वहीँ दूसरी तरफ सिकंदर मेसेडोनिया का ग्रीक शासक था और अपने पिता की मृत्यु के बाद वह अपने भाईयों का क़त्लकर राज सत्ता प्राप्त कर सका था. भारतीय इतिहास में सिकंदर को दयालु राजा की तरह पेश किया गया है असल में सिकंदर ने बहुत अधिक कत्लेआम किया है.

क्या हुआ था जब सिकंदर भारत आया

जब सिकंदर भारत आया तो उसकी यही इच्छा थी कि वह भारत पर कब्जा कर ले. सिकंदर ने जब पोरस के बारें में सुना तो वह पहले पोरस को अपने साथ शामिल होने का प्रस्ताव उसके पास लेकर जाता है. किन्तु एक हिन्दू राजा अपनी माँ को गिरवी कैसे रख सकता था? इसलिए तय हुआ कि अब युद्ध होगा और जो जीतेगा वही इतिहास लिखेगा.

सिकंदर जानता था कि भारत में आगे कब्ज़ा करने के लिए पोरस को हराना जरुरी है.

तब झेलम नदी को पार कर सिकंदर की सेना ने पोरस पर हमला किया लेकिन सिकंदर समझ ही नहीं पाया था कि झेलम नदी को पार करना ही सिकंदर की गलती थी. जैसे ही सिकंदर की सेना ने नदी पार की तभी झेलम में बाढ़ आ गयी थी और एक तरफ से पोरस सेना वार कर रही थी वहीँ दूसरी तरफ नदी का पानी वार कर रहा था. पोरस और सिकंदर के युद्ध में इस तरह से सिकंदर की यहाँ हार हुई थी.

कुछ इतिहासकार लिखते हैं

कुछ इतिहासकार लिखते हैं कि सिकंदर की गर्लफ्रेंड या पत्नी (ज्ञात नहीं) भी उसके साथ आई थी. जब इसको लगा कि पोरस को हराना मुश्किल है और हो सकता है कि राजा पोरस, सिकंदर की जान ले ले तो उसने पोरस के राखी बाँध दी थी. इसी कारण पोरस ने सिकंदर को नहीं मारा था. पोरस और सिकंदर के बीच युद्ध काफी भयंकर हुआ था और सिकंदर की जान, राजा पोरस ने नहीं ली थी.

सिकंदर की सेना पोरस से काफी डर गयी थी और वह लौट रही थी तब सिकंदर पर जाटों का एक और हमला हुआ था. यह हमला आज के सोनीपत के आसपास हुआ था यहाँ सिकंदर गंभीर रूप से घायल हुआ था और आगे उसकी मृत्यु हो गयी थी.

तो असल इतिहास यह है जो यूरोपीय लेखक नहीं लिख पाए हैं. अगर आप ध्यान से खोजने का प्रयास करेंगे तो आपके यहाँ लिखा हुआ इतिहास कई प्रमाणित किताबों में मिल जायेगा.

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