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भारतीय टीम का वो खिलाडी जिसे वर्ल्ड कप के लिए रिटायरमेंट के बाद बुलाया गया !

जवागल श्रीनाथ

भारतीय सरजमीं को हमेशा से ही बेहतरीन बल्लेबाजों के लिए जाना जाता रहा है।

यहां पर कई विश्वस्तर के बल्लेबाज हुए है जिन्होंने कई विश्वकिर्तीमान रचे है। लेकिन क्या आप जानते है बल्लेबाजों वाले इस देश में कुछ ऐसे बेहतरीन गेंदबाज भी हुए है, जिन्होंने सबको प्रभावित किया है और कई रिकॉर्ड भी बनाये है।

आज हम ऐसे ही एक फ़ास्ट बॉलर के बारे में आपको बताने जा रहे है जो कभी भारतीय क्रिकेट टीम की गेंदबाजी की धार हुआ करता था। इतना ही नही इस गेंदबाज को रिटायरमेंट के बाद खास तौर पर वर्ल्डकप खेलने के लिए बुलाया गया था।

हम बात कर रहे है इंडिया के बेहतरीन फास्ट बॉलर जवागल श्रीनाथ की।

जवागल श्रीनाथ का जन्म 31 अगस्त 1969 को कर्नाटक के मैसूर में हुआ था। उन्होंने बचपन से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। हालाँकि पढ़ाई में वे शुरू से अच्छे थे इस वजह से अपना एजुकेशन मैसूर के ही एक कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करके पुरा किया था। जवागल श्रीनाथ ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपने करियर की शुरूआत 29 नवम्बर 1991 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट खेलकर की थी। वहीं वनडे में उनका डेब्यू पाकिस्तान के खिलाफ था जो कि 18 अक्टूबर 1991 को खेला गया था।

जवागल श्रीनाथ लम्बे वक्त तक भारतीय पेस अटैक के अगुआ रहे है।

उनका गेंद पर सटीक नियंत्रण था जिसकी वजह से वे जल्दी ही विकेट निकालने में कामयाब रहते थे। श्रीनाथ ने भारत के लिए कुल 67 टेस्ट मैच खेले है जिनमें उन्होंने 236 विकेट लिए है वहीं वनडे मैच की बात करें तो उन्होंने 229 वनडे मैच खेले है जिनमें 315 विकेट लिए है। अपने आखिरी दिनों में श्रीनाथ आने वाले बॉलर को मोटीवेट करते भी नज़र आये जिनमें जहीर खान और आशीष नेहरा थे।

वहीं बात अगर उनके विश्वकप मैचों की करें तो श्रीनाथ भारत के एकमात्र ऐसे फास्ट बॉलर रहे है जिन्होंने चार विश्व कप खेले है, जिनमें 1992, 1996, 1999, और 2003 का विश्वकप शामिल है।

लंबे समय तक भारतीय पेश अटैक के अगुआ रहे जवागल श्रीनाथ ने साल 2002 में क्रिकेट से रिटायरमेंट ले लिया था। लेकिन कप्तान सौरव गांगुली चाहते थे कि श्रीनाथ 2003 का विश्वकप खेले इसलिए सौरव श्रीनाथ को मनाकर सिर्फ विश्वकप खेलने के लिए वापस लेकर आये। श्रीनाथ ने भी इस पूरे टूर्नामेंट में जोरदार गेंदबाजी कर साबित कर दिया कि क्यों कप्तान गांगुली को उन पर इतना भरोसा था। 2003 का विश्वकप श्रीनाथ के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट का आखिरी टूर्नामेंट था इसके बाद उन्होंने क्रिकेट से सन्यास ले लिया।

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