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दुश्मनों को खोज खोजकर मारेगा भारत का ये छुपा रूस्तम

रुस्तम-2

16 नंवबर को भारत ने लड़ाकू क्षमता वाले अपने स्वदेशी ड्रोन रुस्तम-2 का पहला सफल परीक्षण किया.

इस मानवरहित वायुयान के आपॅरेशनल हो जाने के बाद भारत अपने दुश्मनों को खोज खोज कर मारेगा.

डिफेंस रिसर्च एंड डिवेलपमेंट ऑर्गजाइनेशन यानी डीआरडीओ द्वारा विकसित यह रुस्तम-2 500 किलोमीटर घंटे प्रति घंटे की रफ्तार से 30 हजार फीट की ऊंचाई पर आसानी से उड़ान भर सकता है.

रुस्तम-2 की तुलना दुनिया के बेहतरीन ड्रोन से की जा सकती है.

जानकारी के मुताबिक दो टन वजनी इस ड्रोन – रुस्तम-2 – की कई खासियतें हैं. इसके डैने लगभग 21 मीटर लंबे हैं और यह 24 घंटे उड़ान भरने में सक्षम है. क्षमता के मामले में इसे अमरीकी ड्रोन प्रिडेटर की टक्कर का माना जा सकता है.

इतना ही नहीं, मध्य ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले मानवरहित विमान तापस 201, जिसे रुस्तम- 2 का नाम दिया गया है, को देश के सशस्त्र बलों के लिए टोही मिशन पर भी भेजा जा सकता है.

इसको अमेरिका के प्रिडेटर ड्रोन की भांति मानवरहित लड़ाकू यान के रूप में भी उपयोग में लाया जा सकता है.

ये दुश्मनों के इलाके में घुसकर टोह लेने, निगरानी रखने और लक्ष्य की पहचान करने उस पर हमला करने में भी सक्षम है. इसमें खुद को दुश्मन की नजर से बचाने की भी क्षमता है. क्योंकि इसमें ऐसे सिस्टम लगे है जो दुश्मन की पकड़ में नही आएंगे.

इतना ही नहीं, ये दिन के साथ-साथ रात में भी उड़ान भरकर अपने मिशन को अंजाम दे सकता है. यह उन सभी खूबियों से लैस हैं जो एक छोटे टोही विमान में होती है. ये टोही व निगरानी क्षमता के साथ-साथ लक्ष्य पर सटीक मार करने में भी सक्षम है.

करीब 250 किलोमीटर रेंज वाला यह भारत का यह रूस्तम सिंथेटिक अपर्चर राडार लगा होने के कारण बादलों के पार भी देख सकता है. यानी दुश्मन बरसात और घने बादलो की आड़ लेकर छुप भी चाहेगा तो यह रुस्तम उसको खोज कर मारेगा.

बहराल, तापस 201 यानी रुस्तम-2 का डिजाइन और विकास डीआरडीओ की बेंगलुरु स्थित प्रयोगशाला एयरोनॉटिकल डिवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट और एचएएल-बीईएल ने मिलकर किया है. इसका वजन दो टन है और डीआरडीओ के युवा वैज्ञानिकों की एक अलग टीम ने इसका परीक्षण किया. इसमें सशस्त्र बलों के पायलटों ने भी सहयोग किया.

यह परीक्षण बेंगलुरु से करीब 250 किलोमीटर दूर चित्रदुर्ग में एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज से किया गया. इस स्थान को देश के भारत में नए विकसित मानवरहित यानों एवं मानवयुक्त विमानों के लिए उड़ान परीक्षण स्थल के रूप में तैयार किया गया है.

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