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प्रार्थना करते समय करें इन नियमों का पालन, हर मन्नत होगी कुबूल

प्रार्थना के नियम

प्रार्थना के नियम – पवित्र मन से भगवान का अर्चन कर उनसे कुछ मांगना ही प्रार्थना है।

कहते हैं कि सच्चे मन से की गईं सभी प्रार्थनाओं को परमपिता परमेश्वर अवश्य सुनते हैं और पूरा भी करते हैं। भगवान को फूल, प्रसाद अर्पण करने , पूजन-व्रत करने को प्रार्थना नहीं कहा जाता है।

असल में प्रार्थना सच्चे मन से की जाती है। कईं बार ऐसा होता है कि हम भगवान से प्रार्थना करते हैं, कुछ मांगते हैं लेकिन हमारी भक्ति, हमारा निवेदन भगवान तक नहीं पहुंचता, इसके पीछे कईं वजहें हो सकती हैं, प्रार्थना के नियम।

प्रार्थना के नियम

असल में भगवान के सामने प्रार्थना करने के भी कुछ नियम हैं, जिन्हे अगर आप ध्यान में रखेंगे तो आपकी हर प्रार्थना सुनी जाएगी।

आइए आपको बताते हैं प्रार्थना के नियम बारे में-

प्रार्थना के नियम –

1- वासना से रहे दूर –

प्रार्थना करते वक्त किसी भी प्रकार की वासना से दूर रहे, वासनायुक्त भावनाओं को मन में ना आने दें। जब मनुष्य वासना से ऊपर उठकर भगवान से प्रार्थना करता है, तो वो प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है।

2- एकांत में नहीं, अकेले में करे प्रार्थना –

आप इसे पढ़कर ज़रूर कंफ्यूज हो गए होंगे क्योकि दोनों का शाब्दिक अर्थ एक जैसा ही है लेकिन आध्यात्मिक आधार पर दोनों में बहुत बड़ा अंतर है। एकांत का अर्थ है आप बाहरी आवरण में अकेले हैं, लेकिन आपका मन परमात्मा से जुड़ा हुआ है जबकि अकेलापन अवसाद को जन्म देता है।

3- ईश्वर से उन्ही को मांगे –

अगर आप भगवान से सुख-समृध्दि मांगते हैं तो आपको सिर्फ वो ही प्राप्त होगी लेकिन अगर आप भगवान से उनका साथ, उनका सानिध्य मांगते हैं तो आपका जीवन खुद ही सुख और सौभाग्य से परिपूर्ण हो जाएगा।

प्रार्थना के नियम

4- दूसरे के लिए भी कुछ मांगे –

अगर आप भगवान से हर समय अपने लिए ही प्रार्थना करते हैं तो ये भी सही नहीं है, कभी अपने साथ-साथ किसी ऐसे इंसान के लिए भी कुछ मांगे जिसके लाभ-हानि से आपका कोई लेना-देना नहीं है। ऐसी निस्वार्थ प्रार्थना ज़रूर सुनी जाती है।

5- खुद को समय दें –

परमात्मा से कुछ मांगने के लिए ज़रूरी है कि आप अपनी अंतर्रात्मा के साथ समय बिताएं, अपने मन की आवाज़ सुनें और आपने क्या चूक की है, कहां आप ग़लत हैं, इन पहलुओं पर विचार करें। याद रखें, खुद के साथ वक्त बिताना भी बहुत ज़रूरी है।

प्रार्थना के नियम

6- ऐसे करें अपने प्रार्थना की परख –

अगर आपको मुश्किल परिस्थिति में, विपरीत हालात में भी ऐसा लगता है कि कोई है जो आपका हाथ थामे आपके साथ चल रहा है तो समझिए कि भगवान तक आपकी प्रार्थना पहुंच रही है और वो आपको संभालने के लिए मौजूद हैं वहीं अगर आप परेशानियों में खुद को अकेला महसूस करते हैं तो सचेत हो जाइए, आपकी प्रार्थना भगवान तक नहीं पहुंच रही हैं।

ये है प्रार्थना के नियम जो ना केवल आपकी प्रार्थनाओं को भगवान तक पहुंचाएंगे बल्कि अगर आप इन नियमों का पालन करेंगे तो भगवान आपकी प्रार्थनाएं ज़रुर सुनेंगे।

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