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क्या अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा डर गए भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से?

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27 दिसम्बर 1925 के दिन जब राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ की नीव रखी गई थी तब शायद उसके संस्थापकों ने यह नहीं सोचा होगा कि RSS को एक आतंकी संगठन घोषित कर दिया जाएगा.

जी हाँ! आपने सही सुना, एक अमरीकी संस्था ने, राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ (RSS) को एक आतंकी संगठन घोषित कर दिया है.

अब RSS का नाम, ISIS और इंडियन मुजाहिद्दीन जैसे आतंकी संघटनों की सूची में शुमार हो चुका है.

RSS के नेता और अन्य कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर अपना गुस्सा जताया. शायद अमरीका को यह बात पता नहीं कि जो नरेंद्र मोदी, ओबामा के अच्छे दोस्तों में से एक हैं, वे खुद RSS के सदस्यों हैं.

कितनी शर्म की बात है अमरीका के लिए कि उनके देश के मुद्दे छोड़ यह देश दूसरे देशों की राजनीति पर ज़्यादा नज़र रखता है.

इतिहास गवाह रहा है कि दखलंदाज़ी, अमरीका की पहले की आदत रही है. सबसे बड़ा उदाहरण है वियतनाम युद्ध.

RSS के प्रवक्ता, राम माधव ने इस घटना पर अपना गुस्सा जताते हुए कहा कि, “RSS काफी समय से उनके फाइलों में एक आतंकी संगठन की सूची में शामिल था, हमने उनसे रिक्वेस्ट की है कि वे हमारा नाम उनकी इस सूची से हटा दें लेकिन उन लोगों ने न जाने क्यों अभी तक हमारा नाम नहीं हटाया है”

लेकिन फिर बराक ओबामा ने कहा है कि उनकी सरकार RSS को एक आतंकी संगठन नहीं मानती.

तो क्या ओबामा, नरेंद्र मोदी से डर गए?

दरअसल हुआ यह था कि एक सिख सेपरेटिस्ट दल, सिख फॉर जस्टिस ने अमरीका की उस संस्था को RSS के बारे में बताया था और उनके कहने पर ही इस संस्था ने RSS का नाम इस सूची में शामिल कर दिया. सिख फॉर जस्टिस ने इससे पहले सोनिया गाँधी, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी मुक़दमे ठोके हैं.

अब आप ही बताइये, अमरीका जैसे इतने ताकतवर देश को ऐसी छोटी-छोटी, नीच हरकतें शोभा देती हैं?

या कहीं इसके पीछे ओबामा का हाथ है?

राजनीति अजीब चीज़ है भैय्या!

राजनीति में मुर्दे कभी गाड़े नहीं जाते……

उन्हें जिंदा रखा जाता है……

ताकि टाइम आने पर वो बोलें- ‘राजनीति’

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