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हिरण के गर्भ से जन्म हुआ ऋषि ऋष्यश्रृंग का ! क्या आप यकीन कर पाओगे इस कहानी पर?

हिरण के गर्भ से आखिर कैसे जन्म हुआ ऋषि ऋष्यश्रृंग का ! क्या आप यकीन कर पाओगे इस कहानी पर

हमारे वेद-शास्त्र काफी रोचक कहानियों से भरे हुए हैं.

यहाँ आपको ऐसी-ऐसी कहानियां मिल जाएगी कि इनको पढ़ने के बाद वाकई दिमाग से एक ही सवाल उठता है कि क्या यह कहानी सच है?

ऐसी ही एक कहानी से आज हम आपको वाकिफ कराने वाले हैं.

इस कहानी से पहले आपको पता होना चाहिए कि भारत में कई रामायण हैं. इन रामायणों में कहानियां भी अलग-अलग हैं तो तुलसीदास जी द्वारा रचित रामायण में एक ऋषि के जन्म की बड़ी रोचक कहानी का वर्णन हैं.

कौन थे यह ऋषि ऋष्यश्रृंग ?

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रामायण के अनुसार राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्ठि यज्ञ करवाया था. इस यज्ञ को मुख्य रूप से ऋषि ऋष्यश्रृंग ने संपन्न किया था. ऋषि ऋष्यश्रृंग के पिता का नाम महर्षि विभाण्डक था.

आपको मालूम होना चाहिए कि यह यज्ञ पुत्र प्राप्ति की कामना से किया जाता है. महाराज दशरथ ने यही यज्ञ ऋषि ऋष्यश्रृंग से करवाया था.

इस यज्ञ के परिणामस्वरूप श्रीराम सहित चार पुत्र जन्मे थे.

बड़ी रहस्यमयी है ऋषि ऋष्यश्रृंग के जन्म की कथा –

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ऋषि ऋष्यश्रृंग महात्मा काश्यप (विभाण्डक) के पुत्र थे.

महात्मा काश्यप को रामायण के इतिहास में बहुत ही प्रतापी ऋषि बताया गया है. इनके शौर्य और तेज की कहानियां तब कई मीलों तक फैली हुई थी. रामायण में एक जगह जिक्र है कि इनका वीर्य अमोघ था और तपस्या के कारण अन्त:करण शुद्ध हो गया था. एक बार महात्मा काश्यप सरोवर में स्नान करने गए. वहां उर्वशी अप्सरा को देखकर जल में ही उनका वीर्य स्खलित हो गया. उस वीर्य को जल के साथ एक हिरणी ने पी लिया, जिससे उसे गर्भ रह गया था.

आपको बेशक यह पढ़कर काफी हैरानी होगी क्योकि विज्ञान में ऐसा नहीं हो सकता है. लेकिन रामायण के अलावा भी कई इतिहास की पुस्तकों में यह कहानी जस की तस है.

यह हिरण भी कोई साधारण नहीं थी

कहानी में आगे बताया गया है कि यह हिरणी एक देवकन्या थी. किसी कारण से ब्रह्माजी ने इसे श्राप दिया था कि तू हिरण जाति में जन्म लेकर एक मुनि पुत्र को जन्म देगी, तब श्राप से मुक्त हो जाएगी.

ऋषि ऋष्यश्रृंग

इसी श्राप के कारण महामुनि ऋषि ऋष्यश्रृंग उस मृगी के पुत्र हुए.

वे बड़े तपोनिष्ठ थे. उनके सिर पर एक सींग था, इसीलिए उनका नाम ऋष्यश्रृंग प्रसिद्ध हुआ. वाल्मीकि रामायण के अनुसार राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्ठि यज्ञ करवाया था. इस यज्ञ को मुख्य रूप से ऋषि ऋष्यश्रृंग ने संपन्न किया था. इस यज्ञ के फलस्वरूप ही भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न का जन्म हुआ था.

अब सवाल उठता है कि क्या आज आप विज्ञान के दौर में इस कहानी पर विश्वास कर सकते हैं?

लेकिन अगर आप धर्म पर जरा भी विश्वास करते हैं तब तो आपको इस कहानी पर यकीन करना ही होगा. वैसे आज रामायण के सच्चे और प्रमाणित होने के कई सबूत दिए जा चुके हैं. राम सेतू को तो खुद विज्ञान मानने लगा है और अगर रामायण सच्ची है तो उससे यह साबित होता है कि हजारों सालों पहले का विज्ञान आज से काफी आगे था.

उस समय में कई बच्चे बिना पुरुष सम्भोग के पैदा हुए थे, जो तकनीके आज खोजी जा रही हैं जिसमें बिना स्त्री के पुरुष पिता बन रहे हैं और बिना पुरुष के साथ के स्त्रियाँ बच्चों को जन्म दे रही हैं, उस तरह की तकनीक तो हजारों सालों पहले ही हिन्दू शास्त्रों में बताई गयी हैं.

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