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करोड़ों कमाता है ये पकोड़े वाला, इनकम टैक्स वाले हैं परेशान

गरीबी और अमीरी – हमारे देश में भी गरीबी और अमीरी की स्थिति बड़ी अजीब है।

कभी अमीर दिखने वाला शख्‍स भी अंदर से कंगाल निकलता है तो कभी सड़कों पर भीख मांगने वाले भिखारी के अकाउंट में करोड़ों रुपए निकल आते हैं। ऐसे में ये समझ पाना बहुत मुश्किल है कि देश में अमीर ज्‍यादा हैं या गरीब।

कुछ दिनों पहले पीएम मोदी ने पकौड़े बेचने को रोज़गार का एक तरीका बताया था। उन्‍होंने कहा था कि अगर कोई व्‍यक्‍ति पकौड़े बेचकर दिन में 200 रुपए भी कमाता है तो वो बेरोज़गार नहीं है। मोदी जी की इस बात का विपक्षी पार्टियों ने खूब मजाक उड़ाया था लेकिन लुधियाना के एक पकौड़े वाले ने उनकी इस बात को सच साबित कर दिया है। ये पकौडे वाला धनकुबेर निकला ले‍किन इसकी कमाई काली निकली और इनकम टैक्‍स ने इसके यहां छापा मार दिया।

गरीबी और अमीरी –

गरीबी और अमीरी

6 दशक पुरानी है दुकान

लुधियाना में इस पकौड़े वाले की दुकान बहुत पुरानी है। उसने 1952 में गिल रोड़ पर अपनी पहली दुकान खोली थी। कुछ समय में ये दुकान शहर ही नहीं बल्कि पूरे पंजाब में फेमस हो गई। इसके बाद मॉडल टाउन में भी उसने एक और दुकान देखी।

खूब मशहूर है दुकान

दुकान के मालिक का नाम पन्‍ना सिंह है और उसकी दुकान के पनीर-पकौड़े और दही भल्‍ले पूरे पंजाब में मशहूर है। नेताओं से लेकर पुलिस अधिकारी, व्‍यापारी और नौकरशाह इनकी दुकान पर आकर पकौड़े खाते हैं। मॉडल टाउन की दुकान से सोसायटी के बड़े लोगों की किटी पार्टी होती है।

60 लाख रुपए है कमाई

ये पकौड़े वाला साल में 60 लाख रुपए कमाता है और इस वजह से इनकम टैक्‍स विभाग ने यहां छापा मारा। पहले पन्‍ना सिंह ने अपनी सालाना आय एक से सवा लाख रुपए घोषित की थी। जब आयकर विभाग ने जांच की तो दुकानदार ने बताया कि सारे खर्च और कर्मचारियों का वेतन निकालकर भी वह 60 लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। अब टैक्‍स विभाग ने चोरी पकड़ ली तो अब उसे पैनल्‍टी के तौर पर 45 लाख रुपए देने होंगें।

गरीबी और अमीरी

इस दुकान पर 400 रुपए किलो पनीर पकौड़ा और दही भल्‍ला मिलता है। एक बार इसका स्‍वाद चखने के बाद आप जिंदगीभर के लिए इसके दीवाने हो जाएंगें। आज से नहीं बल्कि पिछले 66 सालों से लोग इस दुकान के पकौड़े खा रहे हैं और हर उम्र के लोग यहां पकौड़े खाने आते हैं।

इस खबर के खुलने के बाद तो ऐसा लगता है कि देश में कोई भी गरीब नहीं है। जब यहां एक पकौड़े वाला भी 60 लाख रुपए सालाना कमाता है तो फिर ये देश गरीब कैसे हुआ। इससे पहले एक ऐसी ही खबर सामने आई थी जिसमें एक भिखारी की दो पत्नियां थीं और उसके अकाउंट में लाखों रुपए पाए गए थे। अब ज़रा आप ही सोचकर बताइए कि हमारे देश में गरीबी और अमीरी का ग्राफ कहां जा रहा है?

क्‍या यहां पर शक्‍ल और कपड़े देखकर लोगों की गरीबी और अमीरी का पता लगाया जा सकता है? इन सब सवालों का जवाब दे पाना हम आम इंसानों के लिए बहुत मुश्किल है लेकिन इनकम टैक्‍स इसका जवाब निकाल ही लेता है।

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