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सुब्रमण्यम स्वामी के हाथ में है राम मंदिर की चाबी – ताला खुलवाने के लिए मिला है 31 मार्च तक का समय

राम मंदिर निर्माण

इस वक्त अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की चाबी सुब्रमण्यम स्वामी के हाथ में है.

इसका दावा स्वयं सुब्रमण्यम स्वामी ने अदालत में किया है. जैसे ही सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दी कि उनके पास राम मंदिर निर्माण विवाद को बातचीत से हल करने का फाम्र्यूला है तो उसके बाद वर्षों से अदालत की चौखट पर अटके अयोध्या राम मंदिर निर्माण विवाद का अदालत के बाहर हल होने की संभावनाएं जगी हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को संवेदनशील और आस्था से जुड़ा बताते हुए पक्षकारों से बातचीत के जरिए आपसी सहमति से मसले का हल निकालने को कह दिया है.

राम मंदिर निर्माण

कोर्ट ने यहां तक सुझाव दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो वो हल निकालने के लिए मध्यस्थता को भी तैयार है. कोर्ट का यह रुख इसलिए अहम है क्योंकि एक बड़ा वर्ग इसे बातचीत और सामंजस्य से ही सुलझाने की बात करता रहा है.

गौरतलब है कि यह टिप्पणी मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की अयोध्या जन्मभूमि विवाद मामले की जल्दी सुनवाई की मांग पर की. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 2010में जन्मभूमि विवाद में फैसला सुनाते हुए जमीन को तीनों पक्षकारों में बांटने का आदेश दिया था.

हाईकोर्ट ने जमीन को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बराबर बराबर बांटने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में अपीलें दाखिल कर रखी हैं जो कि पिछले छह साल से लंबित हैं. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले में फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दे रखे हैं.

भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर अयोध्या विवाद पर जल्द सुनवाई की अपील की है. मंगलवार को स्वामी ने मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष अर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि मामला छह सालों से लंबित है कोर्ट को इस पर रोजाना सुनवाई कर जल्दी निपटारा करना चाहिए.

उनकी मांग पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ये संवेदनशील और लोगों की आस्था से जुड़ा मुद्दा है. संबंधित पक्षकारों को आपसी सहमति से इसका हल निकालना चाहिए, कोर्ट तो आखिरी उपाय होना चाहिए. अदालत तो तब बीच मे आएगी जब पक्षकार बातचीत के जरिए मामला न निपटा पाएं.

कोर्ट ने स्वामी से कहा कि राम मंदिर निर्माण के विवाद का हल निकालने के लिए नये सिरे से सहमति बनाने की कोशिश होनी चाहिए. पक्षकारों को मिल बैठकर आपसी सहमति से हल निकालना चाहिए. पक्षकार इसके लिए मध्यस्थ चुन सकते हैं.

पीठ ने स्वामी से कहा कि उनके पास 31 मार्च तक का समय है वो इस बीच पक्षकारों से वार्ता कर बता दे.

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