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21 साल पहले की अपनी इस राजनैतिक गलती पर आज भी अफसोस करते हैं रजनीकांत

रजनीकांत सियासत से दूर

आठ साल बाद रजनीकांत मीडिया के सामने आए।

इस दौरान उन्‍होंनें अपनी लाइफ से जुड़े कई खुलासे किए।राजनीति में आने के सवालों पर रजनीकांत ने साफ जवाब दिया कि उनका इरादा राजनीति में आने का बिलकुल भी नहीं है। जयललिता की मौत के बाद तमिलनाडु की गद्दी खाली है।

तमिलनाडु हमेशा से ही नायकों के प्रति आसक्त रहा है जिसके कारण सबकी निगाहें रजनीकांत पर थी लेकिन रजनीकांत ने जयललिता की जगह लेने से साफ इंकार कर दिया।

इस बात का है अफसोस

21 साल पहले की एक बात को याद करते हुए रजनीकांत ने बताया कि सालों पहले राजनीति में उनके आने से जयललिता को भारी नुकसान हुआ था जिसके बाद उन्‍होंनें राजनीति से तौबा ही कर ली। रजनीकांत और जयललिता के बीच जो 21  साल पहले हुआ था उसी पर वह आज अफसोस जता रहे हैं। रजनीकांत सियासत से दूर इसी कारणवश रहे हैं और इसलिए ही उन्होंने आज तक कोई भी पार्टी ज्‍वाइन नही की.

क्या हुआ था 21 साल पहले

1990 में आई रजनीकांत की दो फिल्में सुपरहिट हुई थी। पहली फिल्‍म थी “अन्नामलाई” और दूसरी “बाशा”। इन दोनों फिल्मों के धूम मचाने के बाद यह अफवाह भी फैलाई गयी थी कि अब रजनीकांत पॉलीटिक्स ज्‍वाइन करने वाले हैं और इसी दौर में जयललिता सरकार (1991 से 1996) से उनके विवादों की कहानियां भी खूब सुनने को मिल रही थी।

1996 में हुए चुनाव में रजनीकांत ने तमिल मनीला कांग्रेस को यह कहकर सपोर्ट दिया कि “अगर जयललिता दोबारा जीती तो तमिलनाडु को भगवान भी नहीं बचा पाएंगे।” नतीजे आए तो DMK-TMC गठबंधन से प्रचंड बहुमत मिला। वहीं दूसरी ओर AIADMK 4 सीटों पर सिमट गई और जयललिता अपनी सीट भी नहीं बचा पाईं।. इसी बात को रजनीकांत ने “राजनीतिक हादसा” करार दिया है और रजनीकांत सियासत से दूर रहे ।

इस बात पर रजनीकांत को आज तक अफसोस है और बस तभी से रजनीकांत सियासत से दूर रहे और उन्‍होंने राजनीति से तौबा कर ली।

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