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उरी पहुंचने के पीछे ये है राहील शरीफ की मज़बूरी

राहील शरीफ

पाकिस्तान के सेना प्रमुख राहील शरीफ ने हाल में उरी सेक्टर के पास एलओसी का दौरा किया.

लेकिन सवाल है कि सीमा की अग्रिम चौकी पर पहुंचने के लिए राहील शरीफ को 10 दिन का समय क्यों लगा और उन्होंने इसके उरी को ही क्यों चुना?

दरअसल, उरी में भारतीय सेना के कैंप पर आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस प्रकार जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की सीमा में घुसकर 7 आतंकी अड्डों को तबाह कर सैंकड़ों आतंकियों को मार दिया था. भारतीय सेना की इस कार्रवाई में पाक सेना के 5 जवान भी मारे गए थे.

इस घटना से राहील शरीफ की छवि को धूल में मिल गई.

इससे पहले पाकिस्तान में सेना प्रमुख राहील शरीफ की छवि एक ईमानदार और सख्त सेना प्रमुख की है.

अफागनिस्तान सीमा के पास उन्होंने जिस प्रकार तहरीक – ए- तालिबान के आतंकवादियों के विरूद्ध सफाई अभियान चलाया और भ्रष्टाचार को लेकर सेना में बड़े अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई की उससे जनता और सेना उनका कद काफी बढ़ गया था. लेकिन भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाक सेना प्रमुख देश के भीतर राजनेताओं के निशाने पर आ गए.

पाक में कहा जाने लगा कि राहील शरीफ आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में जितने मजबूत नजर आ रहे थे भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद उतने ही कमजोर और असहाय दिखाई पड़ रहे हैं.

पाकिस्तान की संसद में जिस प्रकार आतंकवाद को लेकर सेना और आईएसआई पर आरोप लगाए गए उससे राहील शरीफ भारी दवाब में हैं. सेना प्रमुख तौर पर उनकी कार्य क्षमता को लेकर इशारों ही इशारों में पूर्व सेना प्रमुख परवेज मुर्शरफ भी सवाल उठा चुके हैं.

कहा जा रहा है कि भारत सेना की कार्रवाई के बाद राहील शरीफ कितना भी छुपाने की कोशिश करे लेकिन वे न तो स्वयं से और न ही अपने सैनिको से आंख मिला पा रहे थे.

राहील इस सदमें से खुद को बाहर निकालना चाहते हैं और दोबारा से अपनी छवि को एक मजबूत सेना प्रमुख के तौर पर खड़ा करना चाहते हैं. यही वजह है कि राहील शरीफ ने पाक सेना की रक्षा तैयारी को जांचने के लिए उरी के ठीक सामने दर्रा हाजीपीर को ही चुना. सैन्य परिभाषा में इसका सांकेतिक महत्व होता है.

भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पाक सेना का मनोबल काफी गिरा हुआ है. पाकिस्तानी सेना प्रमुख और सेना भारी दवाब में है. पाक सेना प्रमुख सर्जिकल स्ट्राइक से पहले अपनी जनता में देश की सुरक्षा को लेकर बड़े बड़े दावे करते थे. लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक ने दावों की पोल खोल दी.

भारतीय सेना की आक्रमक कार्रवाई के बाद पाक में जिस प्रकार के हालात है उससे सेना का मोराल डाउन है.

उसका असर पाक सेना के तालिबानियों के खिलाफ अभियान में भी नजर आने लगा था. उरी जाने के के पीछे उनका असली मकसद यही था कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अग्रिम मौर्चे पर स्वयं जाकर पाक सैनिकों के गिरे मनोबल बढ़ाया जाए.

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