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ये आंसू प्याज़ के नहीं, ख़ुशी के है

Success-story

राजस्थान… वीरों की धरती …

कड़ी मेहनत और कुछ कर दिखाने का ज़ज्बा तो जैसे यहाँ के खून में ही है.

आखिर हो भी क्यों नहीं भारत का सबसे ठन्डे और सबसे गर्म मैदानी / रेगिस्तानी इलाका. परिस्थितियां कितनी भी विषम हो चाहे भौतिक रूप से चाहे आर्थिक रूप से, कुछ लोग होते है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए किसी की परवाह किये बिना अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बढ़ते ही रहते है.

ऐसी ही एक कहानी है राजस्थान के चुरू ज़िले के एक छोटे से गाँव में रहने वाले मुकेश की. चुरू से लगभग पांच किलोमीटर दूर है ये छोटा सा गाँव जो आस पास के इलाकों में अपने गणेश मंदिर के लिए प्रसिद्ध है.

मुकेश इसी गाँव से है और एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है.

इस साल मुकेश ने 10वीं कक्षा की परीक्षा दी थी. एक साधारण स्कूल में पढ़कर साधनों के आभाव में भी मुकेश ने ऐसी सफलता हासिल की जो प्रेरणा स्त्रोत है सबके लिए.

मुकेश ने वरीयता सूचि में राज्य में चौथा स्थान प्राप्त किया है.

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मुकेश के पिता  पूर्णाराम चुरू में प्याज बेचते है. रोज़ अपने गाँव से निकल कर दिन भर वो शहर में प्याज बेचते है. पूर्णाराम ख़ुद अनपढ़ है पर शिक्षा के प्रति बिलकुल भी लापरवाह नहीं है.

उनकी तीन संताने है जिन्हें उन्होंने हमेशा पढने के लिए प्रेरित किया है.  तीनों भाई बहनों में मुकेश सबसे छोटे है.

मुकेश का कहना है कि उनके पिता ने हमेशा उनका साथ दिया और सीमित संसाधनों में भी हमारी पूरी मदद की. पूरे गाँव का नाम रोशन करने वाले मुकेश अब आगे आई आई टी करना चाहते है.

मुकेश को देखकर पूर्णाराम की आँखों में आंसू छलक जाते है, पर ये आंसू प्याज़ के नहीं ,ख़ुशी के है.

मुकेश ने दिखाया है कि सुविधा संसाधन हो या ना हो, अगर ज़ज्बा हो तो इंसान बड़ी से बड़ी सफलता हासिल कर सकता है.

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