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प्रधानमंत्री मोदी ने गढ़वाघाट आश्रम जाकर खेला है एक सियासी दाव !

गढवा घाट आश्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का प्रचार खत्म होने से ठीक पहले गढवा घाट आश्रम में गए.

आखिर क्या कारण है कि प्रधानमंत्री काफिला अचानक इस आश्रम में जाता है और प्रधानमंत्री मोदी वहां गायों को चारा खिलाते है.

दरअसल, वहां जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दूर की कोड़ी चली है, क्योंकि इस आश्रम के साथ पिछड़ी जातियों खास कर यादव बड़ी संख्या में अनुयायी के रूप में जुड़े हुए हैं.

माना जा रहा है कि यादव मतदाताओं को मैसेज देने के लिए मोदी इस आश्रम में गए थे. इससे अलावा प्रधानमंत्री सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पैतृक घर भी गए और उन्हें श्रधांजलि अर्पित की.

लेकिन इन सब के बीच प्रधानमंत्री मोदी आश्रम में पूजा करना और आश्रम की गायों को चारा खिलाना अपने में कई संकेत देता है.

मोदी ने यहां जाकर उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति को साधने की कोशिश की है. मोदी चाहते हैं कि यदि आने वाले समय में भाजपा ने यदि यादव मतदाताओं में छोड़ी बहुत सेंध भी लगा दी तो उसकी राह आसान हो सकती है.

क्योंकि जिस प्रकार इस सयम यादव कुनंबा बिखरा हुआ है उसमें यह सबसे सही मौका है. नरेंद्र मोदी का मानना है कि यादव मतदाताओं में जो पढ़ा लिखा तबका है उसको यदि सही प्रकार से साधा जाए तो वह भाजपा के साथ आ सकता है.

इसके अलावा चुनाव प्रचार के आखिरी दिन मोदी गढवा घाट आश्रम पहुंचने का एक कारण ये भी है कि गढवा घाट आश्रम के प्रमुख यादव जाति से आते हैं और आश्रम यादवों की आस्था का केंद्र है. आश्रम के अनुयायी इस पूरे क्षेत्र में फैले हुए हैं, जहां अंतिम चरण में मतदान होना है.

जानकारों की माने तो मोदी के आश्रम दौरे को यादव समुदाय तक पहुंच बनाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है, जिनका झुकाव पारंपरिक रूप से समाजवादी पार्टी की ओर रहा है. आश्रम के प्रमुख गुरू ने मोदी को अपना आशीर्वाद दिया.

आश्रम के रास्ते में सड़क के दोनों तरफ बड़ी संख्या में लोग खड़े हुए थे जो मोदी की कार पर फूलों की बारिश कर रहे थे. प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में आश्रम में वैदिक मंत्रोचार किया गया. संतों ने प्रधानमंत्री को रुद्राक्ष की माला देकर उनका स्वागत किया. मोदी ने यहां की गौशाला में गायों को केले खिलाए.

वहां उस वक्त जो नजारों था उसको देखते हुए राजनीति जानकारों का मानना है कि मोदी कहीं न कहीं अपने प्रयास में सफल होते भी दिखे हैं.