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इस बार जर्ब-ए-अज्ब के बजाए रद्द-उल-फसाद करेगी पाक सेना

रद्द-उल-फसाद

बहुत ही जल्द पाकिस्तान की सेना रद्द-उल-फसाद करती नजर आएगी.

यह करना पाकिस्तान की मजबूरी बन चुका है. अगर पाकिस्तानी सेना ये नहीं कर पाई तो समझों उसको टूटने से कोई नहीं बचा सकता है.

नाम सुनकर आप सोच रहे होंगे कि ये रद्द-उल-फसाद क्या हैं. दरसअल, यह एक उर्दू का शब्द है. जिसका अर्थ है कलह को हमेशा के लिए शांत करना. यानी आतंकवाद की जननी पाकिस्तान इस समय आतंकवाद के जाल में बुरी तरह फंस चुका है. यही वजह है कि पाकिस्तान को बचाने के लिए उनकी सेना, वायुसेना और नौसेना के अलावा अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी रद्द उल फसाद में कूद पड़ी हैं.

सेना का कहना है कि इस अभियान का मकसद आतंकियों के ठिकानों को हमेशा के लिए खत्म कर देना है. इसके तहत पाकिस्तान के सबसे सघन आबादी वाले पंजाब प्रांत में भी सुरक्षा और आंतकवाद-विरोधी गतिविधियों को मजबूत किया जाएगा.

मालूम हो कि लश्कर जैसे कई बड़े आतंकी संगठनों का गढ़ पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में ही है.

गौरतलब है कि जिस वक्त राहिल शरीफ पाकिस्तान की सेना के प्रमुख थे तो उस समय भी पाकिस्तानी सेना देश के कबायली इलाकों और स्वात घाटी क्षेत्र में सैन्य अभियान चला चुकी है.

उस वक्त बैड तालिबान यानी आतंकवादियों से निपटने के लिए उत्तरी वजीरिस्तान में एक ऑपरेशन चलाया था. उसका नाम था जर्ब ए अब्ज.

ये अभियान जून 2015 में शुरू किया गया था लेकिन पाकिस्तानी सेना का यह अभियान परवान नहीं चढ़ सका था. लिहाजा पाकिस्तानी सेना देश से आतंकवादियों को खत्म करने के लिए रद्द-उल-फसाद नाम का नया अभियान शुरू कर रही है.

आपको बता दें कि ऑपरेशन रद्द-उल-फसाद का मकसद देश के बाकी हिस्सों में बचे हुए चरमपंथियों का खात्मा करना है. इस ऑपरेशन के ऐलान से पहले पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के नेतृत्व में लाहौर में सुरक्षा को लेकर बैठक हुई थी.

काबिले गौर हो कि आतंकियों ने सेहवन में मशहूर दरगाह पर आत्मघाती हमले में कम से कम 80 लोगों को मौत के घट उतार दिया था. इसके साथ वहां हर रोज आतंकी हमलों में बड़ी संख्या में लोग मारे जा रहे हैं.

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