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नवरात्रे के पांचवे दिन माँ स्कंदमाता की पूजा विधि! मुर्ख व्यक्ति भी बन जायेगा ज्ञानी !

माँ स्कंदमाता

आप अगर हमेशा हर किसी के मुंह से यही सुनते हैं कि जा और जरा ज्ञान लेकर आ तो निश्चित रूप से आप निराश हो जाते होंगे.

अब ज्ञान भला बाजार में तो मिलता नहीं है. तो चलिए कोई नहीं आपको आज बता दें कि नवरात्रे का पांचवा दिन मुर्ख व्यक्तियों को भी ज्ञानी बन देता है.

जैसा कि आपको पता होना चाहिए कि नवरात्रे के पांचवे दिन माँ स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है. माँ स्कंदमाता के लिए जो बात सबसे अधिक विख्यात है वह यही है कि इनकी पूजा से व्यक्ति ज्ञान की प्राप्ति करता है. माता के चार हाथ होते हैं और माँ भक्तों के लिए मोक्ष का द्वार खोल देती हैं.

माँ स्कंदमाता की पूजा से मिलती है साधक को यह शक्ति –

माँ स्कंदमाता की पूजा से साधक को सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि वह परम सुख की तरफ आकर्षित होने लगता है. म्रत्यु लोक का भय भक्त के मन से निकल जाता है और भक्त आवागमन से मुक्ति की तरफ बढ़ने लगता है. भक्त का पुष्कल चक्र माता खोलती हैं और इससे उसको ज्ञान की प्राप्ति होती है.

तो ऐसे करें माँ स्कंदमाता की पूजा –

माँ स्कंदमाता की पूजन विधि काफी सामान्य ही है. पहले माता की चौकी पर गंगाजल से सफाई करें. उसके बाद माता की तस्वीर अपर फूल आदि से सजावट करें. माता को टीका लगायें. कंडी जलाकर उसपर आहुति दें. माता के सामने घी का दीया जरुर जलायें. गणेश जी की आरती के बाद माता की आरती करें.

माता का ध्यान मन्त्र –

आप सुबह और शाम माता के इस मन्त्र का जाप करना तो बिलकुल न भूलें. यह मन्त्र ही माता को प्रसन्न करता है और भक्त के पुष्कल चक्र को खोलने में सक्षम होता है. सुबह-शाम कम से कम 108 बार आपको बंद जुबान से इस मन्त्र का जाप करना होता है. मन्त्र इस प्रकार है-

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

इस ध्यान मन्त्र को कम से कम 5 बार पढ़ें –

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्वनीम्।।
धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पंचम दुर्गा त्रिनेत्रम्।
अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानांलकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल धारिणीम्॥
प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वांधरा कांत कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीया लावण्या चारू त्रिवली नितम्बनीम्॥

जब आपकी यह पूजा खत्म हो जाये तो कुछ देर आसन पर बैठे रहें और दोनों आँखों के मध्य द्वार पर माता के स्वरुप को देखने का प्रयास करें.

माता से विनती करें कि वह आपके सभी जाने-अनजाने पापों को माफ़ करे और आपको ज्ञान की गंगा से नहलाये.

माँ स्कंदमाता की खासियत ही यही है कि वह यदि भक्त की विनती से भी कई बार प्रसन्न हो जाती हैं. इसलिए दिखावा ना करते हुए, आप दिल से माँ को याद करें.

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