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नवरात्रि के शुरुआत की ये कहानी शायद ही आपको पता होगी!

नवरात्री की शुरुआत

नवरात्री की शुरुआत – हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है नवरात्रि.

यह साल में दो बार मनाई जाती है. पहला चैत्र मास में, जिसे चैत्र नवरात्र कहते हैं और दूसरा आश्व‍िन मास में, जिसे शारदीय नवरात्र‍ि कहते हैं. नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है और शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है. क्या कभी आपने सोचा कि नवरात्रि की शुरुआत कैसे हुई, किसने पहली बार नौ दिनों तक मां दुर्गा की अराधना की होगी? चलिए हम बताते हैं.

हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि शारदीय नवरात्री की शुरुआत भगवान श्रीराम ने की थी.

भगवान श्रीराम ने सबसे पहले समुद्र किनारे शारदीय नवरात्रों की पूजा की शुरुआत की. कहा जाता है कि लंका में रावण से युद्ध से पहले श्रीराम ने लगातार 9 दिनों तक शक्त‍ि की प्रतीक मां दुर्गा की पूजा की थी. तभी श्रीराम को लंका पर जीत हासिल हुई. इसी के बाद से नवरात्र में नौ दिनों तक देवी की उपासना का चलन शुरु हो गया. नौं दिनों तक देवी की पूजा करने के बाद दसवें दिन दशहरा का त्योहार मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन श्रीराम ने रावण का वध किया था.

दशहरे के पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत क रूप में मनाया जाता है.

इस दिन रावण का पुतला बनाकर जलाया जाता है और कई जगहों पर बड़े मेले और रामलीला का आयोजन भी किया जाता है. जहां तक नवरात्रि का सवाल है तो हर राज्य में इसे अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है, गुजरात में जहां नौ दिनों तक गरबा की धूम रहती है, वहां पश्चिम बंगाल में 4-5 दिनों तक दुर्गा पूजा की रौनक रहती है.

भले ही इसे हर जगह अलग-अलग तरह से मनाया जाता है, लेकिन इस त्योहार में हर राज्य में रौनक दिखती है.

इस बार नवरात्री की शुरुआत 10 अक्टूबर से हो रही है. शक्ति की प्रतीक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा के साथ ही इस दौरान कन्या पूजन का भी रिवाज है. छोटी कन्याओं को मां का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराया जाता है, कहा जाता है कि इससे मां प्रसन्न होती है.

ये थी नवरात्री की शुरुआत की कहानी – आप भी मां दुर्गा की कृपा चाहते हैं तो नवरात्रि में पूरे विधि-विधान से मां की पूजा-अराधना करें. माता रानी अपने भक्तों की पुकार ज़रूर सुनती हैं.

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