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NASA की अब तक की सबसे बड़ी खोज, ढूंढ निकाली एक ‘दूसरी दुनिया’

नासा की सबसे बड़ी खोज – ये तो हम सभी जानते हैं कि नासा विश्व की सबसे बड़ी वैज्ञानिक कंपनी है.

आज से पहले नासा ने कई बड़ी खोज और अभियानों को अंजाम दिया है जैसे कि चाँद पर सबसे पहले नासा के नील आर्मस्ट्रॉग ने कदम रखा था, नासा ही वो वैज्ञानिक कंपनी है जिसने दुनिया को बताया कि पृथ्वी फ्लैट नहीं बल्कि गोल है और साथ ही हमारे अलावा ब्रह्माण में और कितने प्लैनेट मौजूद है.

आज भी हम नासा की सबसे बड़ी खोज के बारे में आपको बताने जा रहे हैं. नासा की ये खोज अब तक की नासा की सबसे बड़ी खोज मानी जा रही है, जिसके बारे में जानकर आप भी दंग रह जाएंगे.

नासा ने गूगल की मदद से एक दूसरी दुनिया ढूंढ निकाली है.

जी हाँ, दरअसल नासा ने पृथ्वी जैसा ही एक प्लैनेट खोज निकाला है. इस जानकारी को मीडिया को देते ही यह दुनिया भर में बेहद तेजी से फैलती जा रही है. नासा का कहना है कि यह दूसरी दुनिया धरती से करीब 2545 प्रकाश वर्ष दूर है.

नासा ने आज से पहले कई बार ऐसे दावे किये हैं कि उन्होंने धरती 2 ढूंढ निकाली है, लेकिन हर बार उसे साबित करने में नाकाम रही थी. तो जानिए नासा के लिए आखिर कैसे पॉसिबल हुआ इस प्लैनेट को ढूंढना.

नासा ने गूगल की मदद से ये कारनामा दुनिया के सामने कर दिखाया है.

गूगल भी दुनिया की सबसे जानी मानी कंपनियो में से एक है और इस कंपनी के भी कई बडे आविष्कार हैं. गूगल ने आज से पहले इंसानों का भविष्य सुधारने के लिए कई काम किए हैं लेकिन नासा की मदद कर के इस खोज के जरिए गूगल ने मानव जाति पर एक बहुत बडा परोपकार किया है. नासा ने गूगल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से पहली बार सौर मंडल जैसा ही आठ ग्रहों वाला एक और सोलर सिस्टम खोज निकाला है. वैज्ञानिकों ने नए सौर मंडल का नाम केप्लर-90 रखा है.

नासा की सबसे बड़ी खोज केप्लर-90 हमारे और मंडल के छोटे संस्करण जैसा है. वहीं केप्लर-90आई इस सौर मंडल का पथरीला ग्रह है जो हर 14.4 दिनों में अपने तारे की परिक्रमा पूरी करता है.

नासा ने आज से पहले कभी भी इतने दूर के किसी प्लैनेट को इतने सक्रिय तरीके से नहीं परखा था, लेकिन गूगल की मदद से मशीन लर्निंग के जरिए नासा के शोधकर्ताओं के लिए यह कार्य बेहद आसान हो गया. दरअसल, मशीन लर्निंग आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का ही एक हिस्सा है, जो केप्लर टेलीस्कोप के आंकड़ों का विश्लेषण करता है.

नासा की सबसे बड़ी खोज केप्लर-90 के ग्रहों की व्यवस्था काफी हद तक हमारे सौर मंडल जैसी ही है. इसमें भी छोटे ग्रह अपने तारे से नजदीक हैं और बड़े ग्रह उससे दूर हैं. नासा की रिपोर्ट्स के मुताबिक केप्लर-90आई पर जीवन बसर करने के आसार अब तक के खोजे गए सभी ग्रहों से ज्यादा हैं. इस समय और आने वाले भविष्य में यह मानव जाति का नया घर बन तो सकता है लेकिन इसकी दूरी एक बहुत बडी़ समस्‍या बन कर हमेशा खड़ी रहेगी.

अब देखते हैं कि इस समस्‍या को लेकर नासा और उसके वैज्ञानिक क्‍या करते हैं।

Shivam Rohatgi

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