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मोदी जी, ज़रा सम्भालियें अपने चल्ले-भल्लों को

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कला के क्षेत्र से सरोकार रखता हूँ, तो यह मेरी मौरल रिस्पांसिबिलिटी बनती हैं कि FTI मामले में जो “भसड़” चल रही हैं, उसके बारे में अपने गुस्से को लफ़्ज़ का लिबास दू.

शुरुआत में मैंने जो “भसड़” का शब्द का इस्तेमाल किया हैं उसे ज्यादातर दिल्ली में बोला जाता हैं, जिसका मतलब एक तरह की “परेशानी” या “स्याप्पा” हैं.

इसे क्लियर करना इसलिए ज़रूरी हैं क्योकि मैं जिनके लोगों के बारे में लिख रहा हूँ, वो लोग अपनी संस्कृति को लेकर किसी सरफिरे बॉयफ्रेंड की तरह अतिवाले पोसेसिव हैं. उनके हिसाब से युवाओं द्वारा फैलाई जा रही अश्लीलता से बाबा आदम के ज़माने वाली हिन्दू संस्कृति भ्रष्ट होती हैं और ऐसी किसी भी बात से वो लोग एकदम तिलमिला उठते हैं साथ ही भसड़ शब्द का इस्तेमाल किसी और तरीके से करने लगते हैं.

चलियें अब मुद्दे पर आते हैं. FTI में जो कुछ अभी चल रहा हैं, उसमे एक बात तो साफ़ हैं कि सरकार अभी नए-नए मिले अपने पावर का इस्तेमाल “बाये हुक और बाये क्रूक” वाले तरीके से करने में उतारूं हैं. उस पावर का सेण्टर हैं “नरेंद्र मोदी” जिनके सरकार में आते हैं बीजेपी के चल्ले-भल्ले संगठन ताव में आ गए हैं.

आप सब ने कभी न कभी अपने गली-मुहल्लों में देखा ही होगा, कुछ लौंडे होते हैं जिनका एक लीडर होता हैं और उस लीडर को अगर किसी भी तरह का पावर मिल जाता हैं तो उसके साथ वाले चमचे चौड़े होने लगते हैं और अपनी-अपनी रोटी सेकने लगते हैं. ये किस्सा भी बिलकुल ऐसा ही जा रहा हैं.

मुझे न तो नरेन्द्र मोदी से तकलीफ हैं, न ही आरएसएस या इस तरह के सांस्कृतिक कांट्रेक्टरों से हैं. लेकिन अगर कुछ सही नहीं दिख रहा हैं तो उसके बारे में तो मैं ज़रूर बोलूँगा.  हाँ एक बात और कि मैं हिन्दू हूँ और इस बात का मुझे आप से कही ज्यादा गर्व हैं.

आप FTI क्या हर एक संस्थान के चेयरमैन का चुनाव करिएँ, हमें कोई तकलीफ नहीं हैं. लेकिन चयन उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर करें. हिन्दू संस्कृति वाले घटिया फार्मूला के आधार पर नहीं.

मैं जब 1 साल का था तब हर सन्डे महाभारत सीरियल DD में पापा के साथ बैठ कर देखता था. लाज़मी हैं कि उस बारे में मुझे न तो कुछ याद था न ही समझ आया था. 10-12 साल बाद जब उसका रिपीट टेलीकास्ट होने लगा तब मैंने पहली बार धर्मराज युधिष्टिर की कहानी जानी और उस सीरियल में युधिष्टिर का किरदार निभाने वाले थे “गजेन्द्र चौहान” जो इस मामले के सबसे प्रमुख चेहरें हैं.

ऐसा नहीं हैं कि इस पुरे मामले में एक नाम ही सबसे प्रमुख हैं गजेन्द्र चौहान. इन महानुभवों के अलावा और भी फ्रेशर हैं जो FTI के लिए निकली इस खुली भर्ती में लाइन लगायें खड़े हैं. इन सभी प्रतिभागियों को फ्रेशर कहने की वजह हम आप को बतातें हैं.

1.  गजेन्द्र चौहान– लगता हैं इन्होनें महाभारत में निभाया “धर्मराज” का किरदार बहुत सीरियसली ले लिया और अब सिनेमा को धर्म और संस्कृति के रंग में रंगने का बीड़ा उठाने निकल पड़े हैं. दिमाग में बहुत जोर देने के बाद भी मुझे इनका युधिष्टिर वाला किरदार ही याद आता हैं, क्योकि इन्हें इस रोल के अलावा दूसरा कोई ढंग का किरदार मिला ही नहीं. इन्होने कुछ फिल्म भी करी लेकिन लगभग ऐसी की जिसमे या तो इंस्पेक्टर बने या किसी के भाई, मामा, चाचा या फूफा. अब अगर आप इसे अनुभव और योग्यता कहते हैं, तो मेरी बिल्डिंग में अभी एक नया लड़का एक्टर बनने आया हैं लेकिन पिछलें 1 साल में ही उसने ऐसे कितने रोल कर लियें हैं. कहिएं तो उसे भी चेयरमैन की जॉब का फॉर्म भरने को कह दूँ?

2.  अनघा घैसास– इस भसड़ में शामिल यह दूसरी महारथी हैं. अगर अनुभव की बात करे तो इन मौहतरमा ने बतौर निर्माता नरेन्द्र मोदी, राम मंदिर, NDA, नाना देशमुख की डाक्यूमेंट्रीस बनायीं हैं. ये बात वैसी ही लगती हैं जैसे घर में कोई बच्चा जो चित्रकारी या ऐसी ही कोई कला सिख रहा होता हैं और उसके घर वाले उसे प्रोत्साहित करने के लिए अपने ही लोगों की पैन्टिन्ग बनाने के लिए कहते हैं. लेकिन ये पैन्टिन्ग उसके प्रोफेशनल करियर का अनुभव तो नहीं हो सकती हैं. जब अनघा से इन बातों का जवाब लेना चाहा तो वह व्यक्तिगत आक्षेपों में उतर आई और FTI के स्टूडेंट को “सेक्स और ड्रग्स” का एडिक्ट बता दिया. देखियें मैडम मुद्दे की बात करिएँ न, काहे इस तरह का ब्लेम-गेम खेल रही हैं.

3.  प्रांजल सैकिया- FTI के अन्य पदों के लिए दुसरे नामों में प्रांजल सैकिया हैं जो एक अभिनेता हैं जिन्हें मैंने न तो टीवी में देखा हैं न फिल्मों में. इस पोस्ट को पढ़ने वाले रीडर में से किसी के भी पास इनकी जानकारी हो तो मेरी जानकारी ज़रूर दुरुस्त करे.

4.  राहुल सोलपुरकर– कहते हैं कि ये मराठी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हैं. ऐसा हैं तो अतुल कुलकर्णी, सचिन, स्वप्निल जोशी,  सिद्धार्थ जाधव जैसे कलाकार कौन हैं, जिन्होंने कितने मराठी फिल्मे कर ली होंगी उन्हें भी याद नहीं होगा.

5.  शैलेश गुप्ता– इन्होनें “शपथ मोदी की” नाम की एक फिल्म बनायीं हैं. ना ना आप किसी धोखे मत रहियें कि यह कोई फीचर फिल्म हैं, यह मात्र 5 मिनिट 3 सैकंड का विडियो हैं, जो यू-टुयुब में हैं. इस पोस्ट को लिखते समय तक इस विडियो के  21047 व्यूज हैं. अगर ऐसा हैं तो यू-टुयुब में और कई यू-टुयुबर हैं जिनके व्यूज और लाइक्स लाखों में हैं तो क्या वो सभी इस जॉब के लिए ज्यादा योग्य नहीं हैं. मैं दावें के साथ कह सकता हूँ की मेरे इस पोस्ट को लिखने के बाद शैलेश गुप्ता जी के उस विडियो के व्यूज को ज़रूर बढ़ जायेंगे.

साहब ऐसा हैं कि जब पानी के तेज़ बहाव को सही दिशा देनी होती हैं, तो मट्टी काटने वाला फावड़ा भी मजबूत लेना पड़ता हैं. एक बार तकलीफ कर के फिल्म इंडस्ट्री खंगालियों तो सही, सिनेमा के ऐसे धुरंधर मिलेंगे कि आप के यह फ्रेशर उनके सामने टिक भी नहीं पायेंगे.

मोदी जी अब ये मत कहियेगा कि हर बात पर मुझे क्यों घसीट लेते हो? तो ऐसा हैं कि जो मुखियां होता हैं न तो सारा अच्छा भी उसके नाम जाता हैं और सारा बुरा भी उसी के माथे आता हैं. कभी सोचा हैं आप ने कि आप के पावर में आने के बाद ही क्यों अचानक ये सारें धर्म की पिपड़ी बजाने वाले लोग अपने बिल से बाहर आ गए? कहा से “घर वापसी” जैसी वाहियात चीज़ सामने आ गयी. महराष्ट्र के कई इलाकों में कैसे कुछ लड़के-लड़कियों को ये लोग सिर्फ इसलिए मारने लगे कि वो सभी युवा एक साथ खड़े थे और हिन्दू संस्कृति ख़राब कर रहे थे. आप मौरल पोलिसिंग करने वाले उन सभी लोगों का कभी इतिहास देखिये, आँखें खुल जायेगीं आपकी.

आप को अपने दिल की एक बात बताऊँ तो आप मुझे वैसे लगते थे जैसी किसी घर में कोई सबसे ‘कूल’ चाचा या ताऊ होता हैं न जिससे घर के सभी बच्चे बड़े फ्री होते हैं, अपनी हर तरह की बात, समस्याएं उन्ही से शेयर करते हैं क्योकि सारे बच्चे जानते हैं कि आप के पास आकर सभी समस्या सुलझ जाएगी.

भारत की युवा आबादी कितनी हैं ये बात आप तो अच्छे से जानते हैं और जब आप को पूर्ण बहुमत मिला हैं तो यह भी समझियें की उन्हें आप से कई उम्मीदें हैं तभी उन्होंने आप को चुना हैं. तो इन सब बातों को ध्यान में रखियें नहीं तो जिस दिन ये यंगिस्तान आप से रूठ गया ना आप के लिए ही बुरा होगा और हां अपने चमचों को थोड़ा लताड़ दीजियें ताकि वो लोग अपनी हद में रहे, नहीं तो एक दिन यहीं लोग आपके गले की फांस बनेंगे.

नेपोलियन की कहानी तो ज़रूर सुनी होगी आपने, उसके समर्थकों ने ही उसे मार कर बीच चौराहें में लटका दिया था.

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