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एक ऐसा शिव मंदिर जहाँ विज्ञान के सारे नियम फेल हो जाते हैं

मोस्टा देवता

मोस्टा देवता – विज्ञान कितना भी आगे क्यों न बढ़ जाए, लेकिन कुदरती शक्तियों से वो जीत नहीं सकता.

भगवान के अस्तित्व को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता. भारत हो या विदेश हर जगह भगवान् की शक्तियों को माना जाता है.

भगवान के बिना कुछ भी पूरा नहीं होता. आज हम आपको एक ऐसे ही शिव मंदिर के बारे में बताएंगे, जहाँ विज्ञान के सारे नियम फेल हो जाते हैं. ये शिव मंदिर कहीं और नहीं बल्कि हिन्दुस्तान में ही है. ये मंदिर दिल्ली से काफी दूर है. यहाँ की शक्तियों के बारे में जानकर लोग अब तक हैरान हैं. कहते हैं की यहाँ आने वाला अगर सच्चे मन से शिव मन्त्र का जाप करे तो वो बड़े से बड़े पहलवान को भी एक ऊँगली पर उठा सकता है.

इस मंदिर से जुड़ी एक कहानी हम आपको बताते हैं. आसपास के लोगों का मानना है कि  मोस्टा देवता भगवान शिव के ही एक रुप हैं, लेकिन चंडाक वन का नाता है मां काली से. पौराणिक कथा के मुताबिक शुंभ-निशुम्भ ने मां काली को चुनौती देने के लिए शक्तिशाली राक्षस चंड-मुंड को उनके पास भेजा. मां काली ने चामुंडा का अवतार लेकर चंड-मुंड का वध कर दिया. मान्यता है कि चंडाक वन ही वो जगह है जहां चंड-मुंड का वध किया गया था.

मोस्टा देवता

कहा जाता है कि इस मंदिर के इस रहस्य को जानने के लिए कई वैज्ञानिक भी आए, लेकिन कभी इसका रहस्य सुलझ नहीं पाया. आखिर ऐसा हो कैसे सकता है. बहुत ही आसान है इसे समझना. एक और रहस्य है इस मंदिर का. जिसे जानने के लिए सदस्य बेचैन हैं. मोस्टा देवता मानो मंदिर का प्रवेश द्वार बेहद भव्य है. मंदिर परिसर में पहुंचते ही आपको एक बहुत बड़ा झूला दिखाई दिया. ये झूला कोई मामूला झूला नहीं है. इसे दैव लोक का झूला कहते हैं. ये पशुपतिनाथ का मंदिर कहा जाता है. लोगों ने बताया कि यहां देवियां झूला करती थीं. सावन में इस पर झूलना पुण्य का काम माना जाता है. पहले ये झूला देवदार के पेड़ों पर था, साल १९२३  में झूले को लोहो की पाइप में डाला गया है. यहां पहले देवदार का वृक्ष था.

ये रहस्य से ज्यादा श्रद्धा का विषय है.

असल में इस मंदिर में कुछ चीज़ें ऐसी मिलाती हैं जो रहस्य खड़ा कर देती हैं. लोग कंफ्यूज हो जाते हैं, लेकिन उसे मानना ही पड़ता है. असल में अगर आप दिल से मानते हैं कि भगवान् हैं, तो आप कुछ भी करते हैं और भगवान् का आशीर्वाद आपके सर पर होता है. ऐसे में आपको और विश्वास हो जाता है.

भले ही दुनिया के बाकी देश हमारे यहाँ के मंदिरों के रहस्य को मानने से इनकार करें, लेकिन हम सभी जानते हैं कि उनके पीछे एक इसा सत्य छुपा है, जो कभी अस्तित्व में था.

शायद इसीलिए हम आज भी कहते हैं कि ऊपर वाले से बड़ा और कोई नहीं है. भले ही चाहे कितनी भी कोशिश क्यों न कर ले इंसान लेकिन भगवान् की लीला और उसके रहस्य को जान पाना मुश्किल ही रहेगा. आप भी अपने भगवान् पर यूँ ही अपनी श्रद्धा बनाए रखें और जीवन में आगे बढ़ें.

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