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मोसाद और सीआईए मिलकर करने वाली हैं ईरान के इन लोगों की हत्या क्योंकि

मोसाद और सीआईए

अगर ईरान बातों से नहीं मानता है तो फिर संभावना है कि ईरान के साथ वहीं हो जो जनवरी 2013 में हुआ था.

यानी जो लोग ईरान के परमाणु कार्यक्रमों से जुड़े हैं उनकी हत्या मोसाद और सीआईए करवा सकता है.

ऐसी आशंका इसलिए कि ईरान ने हाल में बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है. उसके बाद से इजराइल बहुत खफा है. इजराइल को लगता है कि ईरान की यह मिसाइल उसके लिए चुनौती है.

क्योंकि ईरान अक्सर इजराइल को परमाणु हमले की धमकी देता रहता है. आप को बता दें कि ईरान परमाणु हथियार बनाने में जुटा है. अमेरिका और इजराइल उसके कदम का विरोध कर रहें हैं. ये देश नहीं चाहते हैं कि ईरान किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार बनाए.

यही वजह है कि जब इजराइल को पता चला तो कि ईरान चोरी छिपे परमाणु कार्यक्रम चला रहा है तो उसने जनवरी 2013 में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिक की हत्या करा दी थी.

गौरतलब है कि ईरान के एक मुख्य परमाणु यूरेनियम संवर्धन संयंत्र के उप निदेशक मुस्तफा अहमदी रोशन की बम विस्फोट से हत्या कर दी गई थी.

उस समय ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमैनी ने कहा था कि बम विस्फोट में हुई ईरानी परमाणु वैज्ञानिक की हत्या के पीछे है मोसाद और सीआईए – अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद का हाथ है.

आपको बता दें कि इजराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए किसी भी हद जा सकता है यह वह पहले ही बता चुका है. इजराइल इन दिनों ईरान के मिसाइल परीक्षण से भी काफी चिड़ा हुआ है.

वहीं दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम  को लेकर एक बार फिर अपने सख्त रूख का इजहार किया है.

अमेरिकी दौरे पर आए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा, ‘मैं नेतन्याहू को आश्वस्त करना चाहता हूं कि अमेरिका का राष्ट्रपति रहते हुए ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने दूंगा.’

यही वजह है कि ईरान को भी आशंका है कि इजराइल के बाद अमेरिका के तेवरों के बाद हो सकता है कि उसके परामणु कार्यक्रमों को रोकने के लिए इससे जुड़े लोगों की हत्याएं करा दी जाएं.

इसके बाद से ईरान के परमाणु कार्यक्रमों से जुड़े लोगों की सुरक्षा पर पहले से मंडरा रहा खतरा बढ़ गया है.

अमेरिका और इजराइल ने यदि तय कर लिया है कि किसी भी कीमत पर ईरान का परमाणु कार्यकम आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा तो इसका संकेत साफ है कि मोसाद और सीआईए को बता दिया गया है कि उनको आगे क्या करना है.

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