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अगर मोदी की जगह कोई दूसरा प्रधानमंत्री होता तो जापान कभी नहीं जाता

प्रधानमंत्री की जापान मुलाक़ात

प्रधानमंत्री की जापान मुलाक़ात – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्थान पर अगर कोई दूसरा प्रधानमंत्री होता तो शायद इस समय देश के बाहर जाने की कभी हिम्मत नहीं करता.

देश में काले धन के विशाल और ताकतवर संगठित साम्राज्य पर कार्यवाई करने के बाद अगर कोई प्रधानमंत्री एक दिन बाद ही विदेश यात्रा पर चला जाए तो ऐसा साहसिक कदम कोई ओर नहीं नरेंद्र मोदी जैसा ही प्रधानमंत्री ले सकता है.

इतिहास साक्षी है. खिलजी और मुगल सल्तनत ही नहीं आजादी के बाद भी भारत में जब भी किसी शासक ने भ्रष्टाचारियों और काले कारोबारियों के विरूद्ध कार्रवाई की है तो तब तब देश विरोधी शक्तियों ने षडयंत्र रचकर उस सत्ता को गिराने का प्रयास किया है.

अधिकांश मामलों में उनको सफलता ही मिली है .

जिसको देखते हुए बहुत कम ही शासक ऐसे नाजुक मौके पर देश के बाहर जाते हैं. प्रधानमंत्री की जापान मुलाक़ात उनका साहसी कदम है.

बात 1990 की है. विश्वनाथ प्रताप सिंह देश के प्रधानमंत्री थे. धीरूभाई अंबानी के रिलायंस ग्रुप पर वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सीबीआइ ने रेड की थी. कहा जाता है कि प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह और धीरूभाई के संबंध सही नहीं थे.

विश्वनाथ सिंह प्रताप पहले से ही धीरूभाई अंबानी ग्रुप की कार्य शैली को लेकर खफा थे. लेकिन सीबीआइ रेड के बाद धीरूभाई ये और खफा  हो गए. बताया जाता है कि रेड से खफा धीरूभाई ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को उस वक्त मदद देकर वी पी सिंह की सरकार को गिराने ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. कहा जाता है कि करीब 4 दर्जन सांसदों को वी पी सिंह से अलग कर चंद्रशेखर को प्रधानमंत्री बनाने के लिए उनके पक्ष में तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका धीरू भाई अंबानी ने निभाई थी.

ऐसा ही प्रयास उड़ीसा में उस समय हुआ था जब वे विदेश में तो उस समय उनकी पार्टी के कुछ विधायकों ने बगावत कर उनको सत्ता से बेदखल कर दिया था. यही नहीं कारपोंरेट लाॅबी का सरकार बनवाने और बिगाड़ने में क्या भूमिका होती है राडिया टेप कांड में हम देख ही चुके हैं.

ऐसे में नरेंद्र मोदी ने जिस प्रकार काले धन पर प्रहार किया है वह भी उस दौर में जब देश के अंदर और बाहर एक संगठित गिरोह सत्ता को बनाने और बिगाड़ने के खेल में महारत रखता हो.

इस समय जो हालात है उसमें काले धन के कारोबारियों को नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में जरा भी नहीं सुहा रहे होंगे. लेकिन इस बार वे चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते हैं, क्योंकि मोदी ने यह जो साहासिक कदम उठाया है उसके पीछे उनकी नियत और साहस के साथ देश की जनता की बहुत बड़ी ताकत खड़ी है. इस बात को ये लोग भलीभांति समझ रहे हैं.

मोदी भी यह जानते हैं देश की जनता ने बहुत विश्वास और उम्मीद के साथ उनको प्रधानमंत्री चुना है यही कारण है कि मोदी जन समर्थन के दम पर इतना बड़ा कदम उठाने के बाद निश्चिंत होकर प्रधानमंत्री की जापान मुलाक़ात कर रहे है और कार्य निपटा रहे हैं

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