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बंगाल में मोदी की रैली का टेंट गिरा इसके पीछे है इस आदमी का हाथ

मोदी की रैली

मोदी की रैली – लोक सभा चुनाव अगले साल है लेकिन सभी पार्टियाँ अपनी तैयारी अभी से कर चुकी हैं.

फिलहाल केंद्र में NDA की सरकार है. वैसे कहें तो बीजेपी की है. बीजेपी काफी साल बाद सत्ता में आई है और नहीं चाहती  कि अगले साल वो ये चुनाव हार जाए.

प्रधान मंत्री मोदी फिर से सत्ता की सीट पर काबिज़ होना चाहते हैं और चाहते हैं कि वो अगले और ५ साल के लिए प्रधानमंत्री बन जाए. फिलहाल इसी सोच को आगे बढाते हुए मोदी देश के अलग अलग हिस्सों में रैलियां करनी शुरू कर दिए हैं. वो अपने पार्टी के बड़े नेताओं के साथ देश के कोने कोने में जा रहे हैं.

मोदी की रैली

ऐसी ही एक रैली करने के लिए मोदी अपनी पार्टी के नेताओं के सतह पश्चिम बंगाल जा पहुंचे. जी हाँ वाही बंगाल जहाँ दीदी का राज़ चलता है. एक ऐसी महिला जो वहां किसी और को आने नहीं देना चाहती और न ही कोई उसकी सत्ता में सेंध लगा सकता है. मोदी सेंध लगाने के इरादे से बंगाल में किसान कल्याण रैली करने चल पड़े. रैली में बहुत से लोग जुटे लेकिन कुछ अव्यवस्था रह गई.

जी हाँ अचानक से मोदी की रैली के टेंट का एक भाग गिर गया और कई लोग घायल हो गए. इसमें महिलाएं भी थीं. अपनी रैली ख़त्म करने के बाद मोदी हॉस्पिटल जाकर घायलों का हालचाल पूछे.

लेकिन अब सवाल ये उठता है कि इसके पीछे किसका हाथ था. क्या कोई जान बुझकर ऐसा किया. कई जगह ख़बरें ऐसी छपी थीं कि ममता के समर्थकों ने ऐसा किया. वो नहीं चाहते थे कि मोदी की रैली सही तरह से अंजाम तक पहुंचे.

मोदी की रैली

ममता के समर्थक नहीं चाहते थे कि बंगाल के किसानों और आम जनता पर मोदी का जादू चले और वो दीदी के राज़ को भूलकर आगामी लोक सभा चुनाव में मोदी की लहर में बह जाएं. शायद इसीलिए ममता समर्थकों ने ऐसा किया था.

बंगाल के मिदनापुर में रैली में बारिश से सुरक्षा के रूप में कैनवास, लौह और लकड़ी की संरचना को रखा गया था। चूंकि विशाल तम्बू के एक हिस्से में गिरावट शुरू हो गई, प्रधान मंत्री मोदी ने लोगों से आग्रह किया कि वे सुरक्षित रहें और अपने सुरक्षा कर्मियों को घायल लोगों की देखभाल करने का आदेश दिया. अधिकारियों ने इस घटना को एक प्रमुख सुरक्षा विलंब कहा और सवाल किया कि सरकारी संरचनात्मक अभियंता की मंजूरी के बाद पीएम के लिए घटना और उसके स्थान को मंजूरी दे दी गई थी या नहीं.

हम आपको बता दें कि हर साल पीएम की सुरक्षा पर 350 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं. और यदि सबसे सुरक्षित व्यक्ति का स्थान संरचनात्मक रूप से सुरक्षित नहीं है तो देश के बाकी लोगों की सुरक्षा की क्या बता करें.

ऐसा वाकया कई बार आता रहता है. कई बार रैली में टेंट गिरने और स्टेज गिरने से लोग घायल हुए हैं. इसकी ज़िम्मेदारी आखिर कौन लेगा.

बहरहाल मोदी के अधिकारियों को चाहिए कि उनकी सुरक्षा का इंतज़ाम ठीक से करें. अगर यही घटना मोदी के टेंट की हुई होती तो आज क्या नज़ारा होता. इस तरह से चूक देश के लिए ठीक नहीं.

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