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एक ऐसी मिस इंडिया जिसे भूला देना चाहती है सारी दूनिया

खुबसूरती का दूसरा नाम मिस इंडिया, विश्व पटल पर अपना परचम लहरने वाली भारत की खुबसूरत महिलाओं में एक ऐसी भी मिस इंडिया थी जिसे आज कोई भी याद नही करना चाहता।

वो बहुत खुबसूरत और टैलेंट होने के साथ – साथ एक नामी आर्मी फैमिली से संबंध रखती थी पर उनकी लाइफ के छुपे हुए कई राज जल्दी ही उसकी फैमिली के लिए मुसीबत बनने वाले थे।

ब्रिटेन की पत्रिका में एक दिन एक 27 वर्षीय  पूर्व मिस इंडिया  के बारे में खबर छपी जिसने पूरे ब्रिटेन को ही नही बल्कि भारत को भी हिला के रख दिया।

वो खबर सन 1982 में मिस इंडिया रही पामेला सिंह के बारे में थी, उस खबर मे कई हाई प्रोफाइल लोगों के नाम छापे गए, जिसमे सबसे ज़्यादा सुर्खियाँ मिस इंडिया पामेला बोर्डेस या फिर कहे पामेला सिंह के नाम ने बटोरी ।

1982 में मिस इंडिया का ताज जीतने वाली पामेला सिंह यानी मिस इंडिया पामेला बोर्डेस एक मिडल क्लास हरियाणवी जाट परिवार से थीं. पिता मेजर महेंद्र सिंह सेना में थे जिनकी 1962 की लड़ाई में मौत हो गई थी और माँ का नाम था शकुंतला । कई लोगो का मनना था कि पामेला के जन्म से पहले ही उनके पिता की मौत हो चुकी थी। मेजर महेंद्र सिंह की मौत के बाद शकुंतला (पामेला की माँ)चंडीगढ़ के सरकारी कॉलेज होस्टल की वॉर्डन बन गई।

ऐसा कहा जाता है मिस इंडिया पामेला बोर्डेस बचपन से ज़िद्दी और अलग स्वभाव की थी लोगों को चौंकने में उसे मज़ा आता था, साथ ही बड़े और ताकतवर लोगों से दोस्ती रखना उसे पसंद था .पर पामेला के बेपरवाह स्वभाव के पीछे उनकी माँ की प्रताड़ना को भी कई बार ज़िम्मेदार ठहराया जाता है । पामेला की एक फ्रेंड ने  बताया था की पामेला के लिए उनकी मा आतंक का दूसरा नाम था उसने बताया कि गरमी की छुट्टी से लौटने के बाद पामेला ने उसे पिटाई से हुए अपने घाव दिखाए थे ।

सन 1989 का मिस इंडिया पामेला बोर्डेस केस

1982 के बाद पामेला पूरे 7 साल बाद लाइम लाइट मे आई, जब पामेला केस का खुलासा हुआ एक मैगजीन ने खुलासा किया कि पामेला बोर्डेस नाम की ये लड़की दोहरी जिंदगी जीती है- एक, सत्तारूढ़ टोरी पार्टी के एक सांसद की रिसर्च असिस्टेंट के रूप में और दूसरी, हाई प्रोफाइल कॉल गर्ल के रूप में ।

इससे ब्रिटेन सरकार से जुड़े कई बड़े नाम उजागर हुए जो मिस इंडिया पामेला बोर्डेस के ग्राहकों में शामिल थे. इसमें सिर्फ टोरी सांसद ही नहीं, दो ताकतवर हैसियत वाले एडिटर, इंटरनेशनल लेवल का हथियार डीलर, एक कैबिनेट मंत्री और एक प्रमुख लीबियाई खुफिया अफसर भी शामिल था ।

इसके बाद तो मिस इंडिया पामेला बोर्डेस की ग्लैमरस तस्वीरों और ‘मसालेदार दावों’ से सारी ब्रिटिश पत्रिकाएं भर गईं. एक मैगजीन ने दावा किया कि पामेला सामान्य दिन में 500 पौंड और वीकएंड पर 2000 पौंड में उनके एक रिपोर्टर के साथ सोने को राजी हो गई थीं.

ये भी कहा जाता है जब  ये किस्सा ज्यादा सुखियाँ बटोरने लगा तब पामेला गायब हो गई और अपने अपने दोस्त डेविड सुलिवान जो हल्की अश्लील कहानियाँ का लेखक था उसके जरिये कहलवाया कि वो ऐसे हैरतअंगेज़ राज़ जानती हैं जिससे ब्रिटेन की सरकार तक गिर सकती है. और इन राज़ो को उजागर करने के लिए वो मोटे पैसो की मांग रखने लगी । पामेला और उससे जुड़े किस्से काफी वक्त ब्रिटेन के अखबारो से लेकर संसद तक चर्चा के विषय बने रहे ।

1982 में मिस इंडिया बनने के बाद ये भारतीय मॉडल न्यूयॉर्क चली गई । कहा जाता हैं कि वहां पर ही वो सऊदी अरब के बदनाम हथियार कारोबारी अदनान खशोगी के संपर्क में आई. अदनान एक समय दुनिया के सबसे अमीर लोगों में था. कई लोगों का मानना है कि खाशोगी से उसकी मुलाकात विवादित धर्मगुरु चंद्रास्वामी ने करवाई थी. इसी समय कतर के एक अमीर से भी उसकी मुलाकात हुई. उस वक्त यह बात भी खूब उड़ी कि दोनों अमीरों में पामेला को अपने पास रखने के लिए होड़ लग गई थी.

पामेला सिंह से पामेला बोर्डेस का सफ़र

न्यूयॉर्क से जापान और जापान होते हुए पामेला लंदन पहुंची । वहां वो एक हथियार व्यापारी से मिली जो पेरिस से ऑपरेट करता था । उसके जरिये वो रिकॉर्ड प्रोड्यूसर डोमिनिक बोर्डेस से मिली और जून 1984 में उससे शादी रचा ली । इसी तरह से पामेला सिंह अब पामेला बोर्डेस हो गई।

डोमिनिक बोर्डेस ने उस वक्त कहा था, ‘उसने उस हथियारों के डीलर की धौंस से बचने के लिए मुझसे शादी की रिक्वेस्ट की । मैं बहुत सिंपल लाइफ जीता हूं, जबकि उसमें हाउसवाइफ जैसी कोई बात नहीं थी । यहां तक कि पांच साल पहले भी उसके पास काफी पैसे और महंगी ड्रेसेज रहती थीं । उस समय मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि उसे पैसे कहां से मिलते थे. लेकिन अब मैं उसके बारे में अंदाज़ा लगा सकता हूं. वो दुनियादारी में माहिर थी. पारंपरिक, शर्मीली भारतीय दुल्हन जैसी नहीं.’

एंड्यू नील और पामेला

पामेला ‘द संडे टाइम्स’ के कुंवारे एडिटर एंड्र्यू नील से पहली बार लंदन के एक नाइट क्लब पार्टी में मिली ।नील पामेला के लिए हाई क्लास सोसाइटी में पहुचने का जरिया था इसीलिए नील से रिश्ता टुटना उसे नागवार गुज़रा उसने गुस्से मे नील के कपड़े फाड़ दिए थे और बदला लेने के मकसद एक कंपटीटर अखबार ‘द ऑब्जर्वर’ के एडिटर डोनल्ड ट्रेलफोर्ड से दोस्ती कर ली, ऐसी कई बाते उस समय कही गई थी । वैसे नील और पामेला दोनों का रिश्ता सिर्फ तीन महीने तक ही चल पाया ।

संसद और सुरखियाँ

थोड़े ही दिन बाद पामेला ‘बोर्डरूम’ के एडिटर मार्क बर्का के जरिये सांसद डेविड शॉ से मिली. शॉ ब्रिटेन की संसद से मिलने वाले अपने कोटे के तीन पास पहले ही बांट चुके थे. इसीलिए उन्होंने अपनी ही पार्टी के एक सांसद हेनरी बलिंघम से पामेला को पास देने को कहा ताकि वो एक रिसर्च में उनकी मदद कर सके.इसके बाद पूरा मामला सुरक्षा घोटाले का बन गया। हर तरफपामेला के चर्चे होने लगे, लेकिन न डोमिनिक बोर्डेस उनके बचाव में आए और न ही सांसद मार्क बर्का.

इस घटना के बाद पामेला गायब हो गई । कहा जाता है कि 2010 के आसपास वो गोवा मे देखी गयी जहाँ अब वो प्रोफेशनल फोटोग्राफर बन कर काम कर रही थी, अब वो एक शांत सरल ज़िदंगी जी रही है ।

वैसे ये किस्सा तो अब खत्म हो चुका अब मिस इंडिया पामेला बोर्डेस आम ज़िंदगी जी रही है । इस आर्टिकल मे लिखी कहानी का मकसद किसी भावनाओं को ठेस पहुचाना नही है बल्कि कुछ जानकारी देना है ।

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