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योग की यह क्रिया बढ़ाती है बीमारियों से लड़ने की ताकत

मौन साधना

जब भी आप योगाचार्य के पास योग सीखने के लिए जाते हैं तो उस दौरान वहां आप से ध्यान लगाने के लिए कहा जाता है.

जब आप ध्यान लगाते हैं तो उस दौरान आपके सामने योगगुरू द्वारा पहली शर्त मौन रहने की रखी जाती है.

दरअसल, मौन साधना योग की एक बहुत बड़ी ताकत है. इसके द्वारा आप इतनी शक्ति अपने अंदर समाहित कर सकते हैं कि आप अपने अंदर छिपी बीमारियों पर भी विजय पा सकते हैं.

आपको घ्यान होगा भारत के जितने भी बड़े ऋषि महापुरूष हुए हैं सब मौन साधना करते थे. मौन के बल पर भगवान महावीर और गौतम बुद्ध ने आत्मज्ञान प्राप्त किया था. महर्षि रमण और चाणक्य भी मौन के महत्व को समझते थे.

लेकिन अब जैसे जैसे विज्ञान में भारतीय योग को लेकर शोध हो रहा है तो नए नए चौंकाने वाले रहस्य सामने आ रहे हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार चुप रहने से हमारी संवदेनशीलता, सोच और भावनाओं में चमत्कारिक सकारात्मक परिवर्तन आता है. मौन रहने से दिमाग में सकारात्मक विचार आते हैं.

मौन हमें जागरूक और सचेत रहना सिखाता है. मौन से हमारी भावनात्मक गतिविधियां नियंत्रण में रहती हैं. किसी बाहरी चीज से हम प्रभावित नहीं होते. शरीर का सबसे जटिल और ताकतवर हिस्सा दिमाग होता है. जिस तरह से मांसपेशियों को कसरत करने से फायदा पहुंचता है, वैसे दिमाग को मौन से फायदा होता है.

मौन साधना से मन की शक्ति तो बढ़ती ही है, साथ ही तन भी शक्तिशाली होता है. शक्तिशाली मन में किसी भी प्रकार का भय, क्रोध, चिंता और व्यग्रता नहीं रहती. सारे मानसिक विकार समाप्त होने के साथ ही रात की नींद भी अच्छी आती है.

मौन साधना का निरंतर अभ्यास करने से शरीर में बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ती है.

कहा जाता है कि जगत में सारे अच्छे विचार मौन से उत्पन्न होते हैं.

जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शुद्ध और पौष्टिक भोजन और गहरी नींद आवश्यक है, उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य के लिए मौन साधना भी बहुत जरूरी है.

यहां तक कि मौन साधना की अहमियत को मनोवैज्ञानिक और कॅरियर काउंसलर भी स्वीकार करने लगे हैं. वे लोगों को स्मरण शक्ति बढ़ाने, एकाग्रता, शांति और सकारात्मक सोच के लिए मौन धारण करने की सलाह देते हैं.

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