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कच्‍ची उम्र में सयानापन लड़कियों के लिए ला रहा है ये खतरे

कच्‍ची उम्र में सयानापन

कच्‍ची उम्र में सयानापन – लड़कियों के सयाने यानि बाल अवस्‍था के गुज़र जाने पर शारीरिक और मानसिक रूप से कई बदलाव आते हैं।

कुछ लड़कियां जल्‍दी बड़ी हो जाती हैं तो कुछ में लड़कपन रह जाता है। आज हम आपको एक ऐसी लड़की की कहानी सुनाने जा रहे हैं जो कम उम्र में ही सयानी हो गई। सयानी से हमारा मतलब है कि उसके शारीरिक अंग बढ़ने लगे और लोगों का उसके प्रति नज़रिया भी बदलने लगा।

तो चलिए जानते हैं कच्‍ची उम्र में सयानापन – इस नई-नई सयानी हुई लड़की की आपबीती।

कच्‍ची उम्र में सयानापन –

सयानी लड़की की कहानी

मैं घर के पास एक किराने की दुकान पर गई थ्‍ज्ञी और वहां वहां एक आदमी मेरी मां के पीछे लाइन में खड़ा था और मुझे लगातार ऊपर से नीचे घूर रहा था। उम्र से तो वो मेरे पिता जितना लग रहा था लेकिन मुझे उसकी निगाहें चुभ रहीं थीं।

अपने बाकी दोस्‍तों के मुकाबले जल्‍दी बड़ी हो गई थी। मेरे अंग कम उम्र में ही विकसित हो गए थे और मैं अपनी हम उम्र से ज्‍यादा बड़ी लगती थी।

मेरा दिमाग, शरीर में आए इन बदलावों से तालमेल बिठाने में मुश्किल महसूस कर रहा था और अपने से दोगुने उम्र के आदमियों की घूरती निगाहें मुझे परेशान करती थीं। मैं तनाव में आ जाती थी और खुद को असुरक्षित महसूस करने लगी थी।

मेरे करीब से गुज़रते अजनबी जब भी चुंबन लेने की आवाज़ निकालते तो मेरा दिन तेजी से धड़कने लगता और कलेजा मुंह को आ जाता था।

आज भी अगर मैं आंखे बंद करके सोचूं तो करीब से गुजरती गाडियों से आते वो भद्दे कमेंट्स सुनाई देते हैं। मैं फिर से वही दस बरस की बच्‍ची बन जाती हूं, जो सब के सामने छोटे कपडे पहनने से डरती नहीं नहीं थी।

अनचाहे भद्दे कमेंट झेलना, खुद को घूरे जाने का तजुर्बा फिर भी दूसरे अपराधों के मुकाबले बहुत कम लगता था। फिर भी तमाम स्‍टडी बताती हैं कि वो किसी बच्‍ची के लिए बहुत तकलीफदेह होता है।

क्‍या हैं खतरे

ऐसी स्थिति में कम उम्र में ही बच्चियों को मनोवैज्ञानिक चुनौतियों का सामना करने का जोखिम उठाने को मजबूर होना पड़ सकता है। इसका असर उनके दिमाग पर भी पड़ता है। आजकल लड़कियां बहुत कम उम्र में ही सयानी हो रही हैं और शायद यही इसकी वजह है। वो मानसिक रूप से तो इन चीज़ों के लिए तैयार नहीं होती हैं ल‍ेकिन शारीरिक बदलाव उन्‍हें तैयार होने पर मजबूर कर देते हैं। सयाने होने से यहां मतलब ये है कि आजकल लड़कियों की माहवारी बहुत कम उम्र में ही शुरु होने लगी है। उनका शारीरिक विकास बहुत तेजी से कच्‍ची उम्र में ही होने लगा है।

अमेरिका का हाल

1970 के दशक में अमेरिका में बच्चियों के स्‍तनों के विकास की औसत उम्र 12 साल हुआ करती थी और 2011 की स्‍टडी में सामने आया है कि आज अमेरिका में बच्चियों के अंगों के विकसित होने की औसत उम्र घटकर 9 साल रह गई है।

कच्‍ची उम्र में सयानापन – एक शोध में भी पता चला है कि अमेरिका में 18 पर्सेंट गोरी, 43 पर्सेंट अश्‍वेत गैर हिस्‍पैनिक और 31 पर्सेंट हिस्‍पैनिक लड़कियों का मासिक धर्म नौ साल की उम्र में ही आ जाता है।

इसकी वजह पर अब तक रिसर्च चल रही है।

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