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देश के कैंची धाम में मांग चुके हैं फेसबुक फाउंडर जुकरबर्ग भी मन्नत

करोली बाबा

करोली बाबा – इंडिया की मिट्टी में भगवान बसते हैं। यहां जितने लोग हैं उतने ही भगवान हैं।

यहां हर किसी का अपना भगवान है और लोगों की हर समस्या का समाधान उनके भगवान ही निकालते हैं। इस कारण ही भारतीयों के भगवान की चर्चा विदेशों में भी होती है। इंडिया के एक प्रसिद्ध भगवान हैं जिनके भक्त एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स से लेकर फेसबुक फाउंडर मार्क जुकरबर्ग भी हैं।

फेसबुक और एप्पल को बनाया इस मंदिर ने ही कामयाब

यह मंदिर देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध राज्य उत्तराखंड में स्थित है। हम बात कर रहे हैं कैंची धाम की जहां की प्रसिद्धी पूरी दुनिया में फैली हुई है। आज फेसबुक और एप्पल को कामयाब बनाने में कैंची धाम का और इस मंदिर का बहुत बड़ा हाथ है। इस मंदिर में किस्मत चमकाने वाले करोली बाबा की समाधि है जो करोली बाबा के नाम से फेमस हैं।

करोली बाबा

नहीं लौटते हैं भक्त खाली हाथ

इस मंदिर से भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटते हैं। इन भक्तों में ऐप्पल कंपनी के मालिक स्टीव जॉब्स और फेसबुक के फाउंडर मार्क जकरबर्ग जैसे बड़े-बड़े लोग शामिल हैं।

करोली बाबा

जब खराब स्थिति में था फेसबुक

जब फेसबुक बड़ी मुसीबत से गुजर रहा था और तो जुकरबर्ग इस मंदिर में ही शरण लेने आए थे। जुकरबर्ग को इस मंदिर में जाने की सलाह स्टीव जॉब्स ने दी थी। जुकरबर्ग के मुताबिक जब उनकी कंपनी एक मुश्किल दौर में थी, तब ऐपल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत के एक आश्रम में जाने की सलाह दी थी।

करोली बाबा

स्टीव जॉब्स के पास अंतिम समय तक थी बाबा की फोटो

इस मंदिर में स्टीव जॉब्स भी आ चुके हैं। स्टीव जॉब्स ने 1973 में संन्यास लेने की सोची थी। इस उद्देश्य से जब वे मंदिर पहुंचे थे। लेकिन जब वे मंदिर पहुंचे थे तब तक नीम करौली बाबा का देहांत हो चुका था। ऐसे में स्टीव जॉब्स ने यहीं रहकर कुछ दिनों तक ध्यान-आराधना की। यहीं से उन्हें ये प्रेरणा मिली कि संन्यास लेने के बजाय अपने देश अमेरिका लौटकर नई कंपनी बनानी चाहिए। स्टीव जॉब्स जिंदगी भर नीम करौली बाबा के भक्त रहे। कहते हैं कैंसर से मौत के वक्त भी उनके तकिए के नीचे बाबा की तस्वीर रखी मिली थी।

करोली बाबा

1962 में हुई थी इस मंदिर की स्थापना

इस मंदिर की स्थापना सन् 1962 में हुई थी। सन् 1962 में नीम करोली बाबा ने क्षिप्रा नाम की छोटी पहाड़ी नदी के किनारे कैंची धाम में इस मंदिर की स्थापना की। यहां पर दो घुमावदार मोड़ हैं, जिसकी वजह से इसे कैंचीधाम आश्रम कहते हैं। इस बात का जिक्र उनके एक अमेरिकी भक्त ने अपनी किताब में किया था। इसी के बाद पश्चिमी देशों के लोगों में इस मंदिर को लेकर क्रेज बढ़ गया।

हो चुके हैं कई चमत्कार

इस मंदिर में कई चमत्कार हो चुके हैं। एक बार मंदिर में भंडारा हो रहा था तब यहां घी की कमी पड़ गई थी। बाबा जी ने लोगों को नदी से कनस्तर में पानी भरकर लाने के लिए। लोग नदी से पानी भर के लाए और उसी का भंडारे में इस्तेमाल किया। एक अन्य चमत्कार यह भी है कि नीम करोली बाबा ने गर्मी की तपती धूप से एक भक्त को बादल की छतरी बनवाकर उसको सुरक्षित जगह पर पहुंचाया।

तो ऐसे थे करोली बाबा जिसके चर्चे आज भी होते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी तक इस बाबा के भक्त थे।

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