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राजीव गाँधी ने जिसको बुलेटप्रूफ जैकेट दिया उसी ने ही उनकी मौत का सौदा कर लिया !

लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण

राजीव गांधी को नहीं मालूम था कि जिस शख्स की जिंदगी बचाने के लिए वे उसे अपनी बुलेटप्रूफ जैकेट दे रहे हैं, एक दिन वहीं उनकी मौत का सौदा करेगा.

ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण भारत आया था और उसने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से दिल्ली में मुलाकात भी की थी. इस मुलाकात का मकसद प्रभाकरण को भारत श्रीलंका समझौते को लेकर बात करना और उसको इसके लिए उसे तैयार करना था.

प्रभाकरण जब दिल्ली आया तो उसको दिल्ली के अशोका होटल में ठहराया गया. जहां उससे कई दौर की बात चली लेकिन सभी नाकाम रही. फिर अंत में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से उसकी मुलाकत हुई.

इस बातचीत में भी प्रभाकरण समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ. राजीव गांधी ने भी प्रभाकरण पर समझौते के लिए कोई दवाब नहीं डाला. दोनों की जब बातचीत खत्म हुई तो राजीव गांधी ने चलते समय अपनी बुलेटप्रूफ जैकेट प्रभाकरण को थमा दी.

राजीव गांधी का अपनी बुलेटप्रूफ  जैकेट प्रभाकरण को देना दर्शाता है कि वे उसकी जान पर मंडराते खतरे को लेकर न केवल चिंतित थे बल्कि उसकी सुरक्षा को लेकर भी सतर्क थे.

लेकिन उनको नहीं मालूम था कि जिस शख्स की जान की वे इतनी चिंता कर रहे हैं वो ही एक दिन उनकी हत्या की साजिश रचेगा.

गौरतलब है कि राजीव गांधी की तमिलनाडु के श्रीपेरमबदूर में मानव बम के जरिए हत्या कर दी गई थी.

इस साजिश को अंजाम देना वाला कोई ओर नहीं लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण ही था.

जब भारत ही नहीं श्रीलंका के लोगों को इस बात का पता चला कि राजीव गांधी की हत्या प्रभाकरण ने करवाई है तो उनको भी इस बात का यकीन नहीं हुआ. लेकिन जब सच्चई सामने आई कि प्रभाकरण ही इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड है तो उनके पैरो तले से भी जमीन खिसक गई.

आपको बता देे कि लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण को श्रीलंका की सेना के हाथों से बचाने में भारत सरकार ने बहुत मदद की थी. शुरूआत में भारत चाहता था कि श्रीलंका में रहने वाले तमिलों की समस्या का सामाधान बातचीत से निकले. इसमें लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण की मुख्य भूमिका रहने वाली थी.

लेकिन राजीव गांधी की हत्या के बाद स्थिति पूरी तरह से बदल गई और उसी दिन से यह भी तय हो गया था कि प्रभाकरण का अलग तमिल ईलम बनाने का सपना अब कभी पूरा नहीं हो सकेगा.

क्योंकि राजीव गांधी की हत्या करके लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण ने न केवल भारत का बल्कि दुनिया के बाकी देशों की भी सहानुभूति खो दी थी.

प्रभाकरण सभी की नजरों में एक गैर जिम्मेदार और अविश्वसनीय आदमी बन गया था, जिसकी किसी भी बात पर अब भरोसा नहीं किया जा सकता था.

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