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भगवान कृष्ण ने यहाँ के राजा से मांगा था बेटे का मांस !

बेटे का मांस

बेटे का मांस – भारत का छत्तीसगढ़ राज्य वैसे तो नक्सवादियो की वजह से बदनाम है जिस वजह से ज्यादातर लोग इस राज्य में ज्यादा जाना पंसद नही करते ।

लेकिन आपको बात दे छत्तीसगढ़ बाकी राज्यो की तरह ही बेहद खूबसूरत और अद्धभुत है ।

छत्तीसगढ़ में राजधानी रायपुर से 36 किलोमीटर आगे आरंग नाम का शहर है जिसकी खूबसूरती देख चौक जाएंगे । इस शहर को 11 वी सदी चके भांडदेवल मंदिर और महामाया मंदिर  की वजह से जाना जाता है । ये शहर द्रोपर युग में राजा मोरध्वज  की नगरी हुआ करती थी जो भगवान कृष्ण का परम भक्त था। राजा मोरध्वज के शासनकाल मे ये राज्य हर सुख सुविधा से सपन्न था। क्यो कि राजा मोरध्वज एक नेक दिल राजा था ।

इस शहर के मंदिर बेहतरीन आर्कटेक्चर के उदाहरण है । जिस वजह से इस शहर को मंदिरों की नगरी भी कहा जाता है ।

बेटे का मांस

आरंग के राजा मोरध्वज को लेकर एक कहानी बहुत मशहूर है ।

माना जाता है कि मोरध्वज की भक्ति पर भगवान कृष्ण को बहुत यकीन था जिस वजह से भगवान कृष्ण मोरध्वज को अपना परम भक्त मानते थे । महाभारत का युद्ध खत्म होने के बाद भगवान कृष्ण अर्जुन को इस बात का यकीन दिलाना चाहते थे। भगवान कृष्ण और अर्जुन ऋषि वेश बदलकर मोरध्वज के नगरी में पहुंचे। राजा मोरध्वज से भगवान कृष्ण ने ऋषि का वेश बनाकर कहा कि मेरा शेर भूखा है और ये सिर्फ इंसान का मांस खाता  है । इस पर राजा मोरध्वज ने कहा कि मेरा मांस ले लो । इस पर भगवान कृष्ण ने कहा कि मेरा शेर सिर्फ बच्चे का मांस खाता है. इस पर मोरध्वज ने अपने बेटे का मांस देनेकी पेशकश की । इस पर भगवान कृष्ण ने कहा कि लेकिन ध्यान रहे मांस काटते वक्त दोनो पति पत्नी में से किसी की भी आँख में आँसू नही होना चाहिए । राजा मोरध्वज ने ऐसा ही किया। और बिना रोए अपने बेटे का मांस ऋषि के शेर को खिला दिया । भगवान कृष्ण और अर्जुन की इस परीक्षा में राजा मोरध्वज सफल हुए  । जिसे खुश होकर भगवान कृष्ण ने राजा मोरध्वज के बेटे को पुनर्जीवित कर दिया और अपने परम भक्त का पद दे दिया।

बेटे का मांस

यहां राजा मोरध्वज के महल में एक भी कुआं मौजूद है जिसमें गंगा नदी का पानी उपजता है । इस कुएँ में नहाने से सभी तरह की स्कीन संबंधी बीमारियों से छुटकारा मिलता है ।माना जाता है कि राजा मोरध्वज सुबह – सुबह अपने महल से नंगे पांव 4 किलोमीटर दूर गंगा नदी के किनारे स्नान के लिए जाया करते थे। जिसे देख मां गंगा को राजा मोरध्वज पर दया आ गई ओर उन्होंने अपनी एक धारा महल के बीच कुएं से निकाली।जिस वजह से इस कुएं में त्वचा रोग खत्म करने की ताकत है यहाँ दूर दूर से भक्त आकर स्नान करते है।ये शहर आज भी अपनी उसी भव्यता , संस्कृति को समाए हुए हैं। यहाँ सबसे ज्यादा मशहूर भांडवलदेव मंदिर है जो जैनियों का मंदिर है जिसे 11 वी और 12 वी शताब्दी के मध्य बनाया गया था। यहाँ के महामाया मंदिर भी काफी प्रचलित है जिसमे 24 देवी देवताओं की मूर्तियां है । जिनमें बाग देव , पंचमुखी महादेव , पंचमुखी हनुमान के मंदिर सबसे ज्यादा प्रचलित है।

इन सब से आप भी समझ गए होंगे कि छत्तीसगढ राज्य भी बाकी राज्यों की ही तरह प्राचीन भारत के इतिहास का गवाह है इसलिए छुट्टियाँ प्लान करते वक्त इस बेहतरीन शहर को शामिल करना न भूलें

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